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मुख्यमंत्री के शहर में अतिकुपोषित बच्चों को नया जीवन दे रही हैं मोहित

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Sep 17, 2019 17:37 PM | Updated: Sep 17, 2019 17:37 PM

Gorakhpur

  • अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित कर 13 बच्चों को एनआरसी सेंटर में भर्ती करवाया
  • 9 बच्चे सेंटर से स्वस्थ होकर निकले, अब कार्यकर्ताओं के साथ कर रही हैं फालो अप

गोरखपुर शहर के गंगानगर टोले में मजदूरी करने वाले मकसूदन और उनकी पत्नी सीमा के शिवम और मोहिनी दो ही संतान हैं। फरवरी की 25 तारीख को जब बच्चों को पोषण पुनर्वांस केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया तो शिवम का वजन 8.3 किलो था और मोहनी का वजन 8 किलो। दोनों अति कुपोषित थे और लाल श्रेणी में सबसे नीचे थे। पांच मार्च को जब दोनों बच्चे एनआरसी से डिस्चार्ज हुए तो उनका वजह एक किलो बढ़ चुका था और अब दोनों का वजह 11.1 किलो है। यह चमत्कार शायद नहीं हो पाता अगर इस परिवार में मोहित सक्सेना नहीं पहुंचती। मोहित मुख्य सेविका के पद पर तैनात हैं। एक सरकारी कर्मचारी की भांति नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए वह कर्मचारी की भूमिका से उपर उठकर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की धार को तेज करने में जुटी हैं। अकेले मोहिनी या शिवम ही नहीं छह महीने के भीतर मोहित ऐसे 13 बच्चों को अतिकुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकाल चुकी हैं। इन 13 में से नौ बच्चे तो स्वस्थ्य होकर घर जा चुके हैं।

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शिवम और मोहिनी की मां सीमा बताती हैं कि उनके घर बच्चों को पल्स पोलियो का ड्राप पिलाने पहुंचीं आंगनबाड़ी सहायिका मंजू देवी ने बताया था कि उनके बच्चे अति कुपोषित हैं और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र लाने को कहा। जब बच्चे केंद्र पहुंचे तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उषा कुशवाहा ने बच्चों का वजन किया और अति शीघ्र उन्हें बीआरडी मेडिकल कालेज में स्थित एनआरसी में भर्ती कराने को कहा। सीमा तैयार नहीं हुईं क्योंकि उनके पति पेशे से मजदूर हैं। अगर वह बच्चों के साथ अस्पताल चली जातीं तो दो जून की रोटी भी नहीं मिल पाती। उषा ने अपने सुपरवाईजर मोहित से सम्पर्क किया। मोहित ने सीमा और उसके पति दोनों को साथ बैठा कर काउंसिलिंग किया। आश्वासन दिया कि बच्चों की देखरेख के लिए अलग से सहायिका देंगी। तब जाकर यह दम्पत्ति एनआरसी जाने को तैयार हुआ। मोहित ने सहायिकाओं को प्रेरित कर बच्चों के अभिभावकों के साथ एनआरसी सेंटर में अलग-अलग शिफ्ट में चार सहायिकाओं को तैनात किया। बच्चों का इलाज चला और वे स्वस्थ हो गए।

पति, सास, ससुर को भी समझाया

मुख्य सेविका मोहित सक्सेना का कहना है कि अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को एनआरसी सेंटर ले जाने के लिए प्रेरित करने में काफी सावधानी की आवश्यकता होती है। जल्द वे बच्चों को यहां भेजना नहीं चाहते। उन्होंने बताया कि सितम्बर 2018 से लेकर मार्च 2019 के बीच उनकी टीम ने 17 बच्चों को एनआरसी ले जाने के लिए चिन्हित किया था और ले भी गए। वहां सभी बच्चों को एडमिट करने का सुझाव दिया गया लेकिन कोई तैयार नहीं था। बच्चों को भर्ती करने के लिए दादा, दादी, सास, ससुर, पति सभी के पास टीम के साथ जाकर मोटिवेट किया गया लेकिन सिर्फ 13 बच्चों के अभिभावक एडमिशन के लिए तैयार हुए।

मालिक तक को किया प्रेरित

मोहित बताती हैं कि झुंगिया में एक बच्चे की मां ने उनसे कहा कि वह काम छोड़ कर एनआरसी जाएगी तो मालिक उसे नौकरी से निकाल देंगे। टीम मालिक के पास गई। वह तैयार भी हो गए लेकिन महिला ने बच्चे को भर्ती नहीं कराया। मोहित ने बताया कि जिन 13 बच्चों को भर्ती कराया गया उनमें से 05 बच्चों के माता पिता उन्हें अस्पताल से वापस लेते आए। इन बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि अगर हफ्ता-दस दिन अस्पताल में रहेंगे तो रोजी-रोटी कैसे चलेगी। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ज्योति, किरन, नीता, सुनीता, शांति, सरोज और पुष्पा की मदद से जंगल मातादीन निवासी सुदर्शन की बेटी सौम्या, सेमरा नंबर एक निवासी विजय का बेटा दिव्यांश, सेमरा नंबर दो निवासी अंकित का बेटा आयुष, भेड़यागढ़ निवासी पप्पू की बेटी लाडो, हकीम नंबर एक के निवासी बृजेश का बेटा यश, मानबेला निवासी रामस्वरूप की बेटी कुसुम और यहीं के बंगला टोला निवासी 2.9 वर्षीय अनुराग को एनआरसी में भर्ती कराया गया था और अब यह बच्चे स्वस्थ हैं।

समुदाय की मदद आवश्यक

शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) पीके श्रीवास्तव ने बताते हैं कि कुपोषण को दूर करने में समुदाय को साथ देना होगा। सभी जबतक मिलकर काम नहीं करेंगे तबतक रिजल्ट नहीं आएगा।


एनआरसी सेंटर की सुविधाएं

  • जनपद के बीआरडी मेडिकल कालेज में एनआरसी सेंटर है और यहां सभी सुविधाएं निशुल्क हैं।
  • यहां बच्चों के इलाज के अलावा दोनों समय भोजन और एक केयर टेकर को भी निशुल्क भोजन मिलता है।
  • भर्ती बच्चों को दोनों समय दूध और अंडा दिया जाता है।
  • जो अभिभावक बच्चे के साथ रहते हैं उन्हें 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनके खाते में दिए जाते हैं।
  • जो आंगनबाड़ी बच्चों को एनआरसी ले जाती हैं उन्हें सिर्फ एक बार 50 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
  • केंद्र में भर्ती कराने से बच्चे को नया जीवन मिलता है। केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सक और स्टाफ नर्स बच्चों की देखभाल करती हैं।