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जब एक लाइफ कोच की भांति अरुण जेटली ने यूपी के इस वरिष्ठ विधायक को जीवन का मूलमंत्र दिया

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Aug 24, 2019 16:00 PM | Updated: Aug 24, 2019 16:04 PM

Gorakhpur

  • पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली (Ex Minister Arun Jaitely) की वह यादें जो हर किसी को सकरात्मकता की ओर ले जाती
  • यूपी के भाजपा विधायक डाॅ.राधामोहन दास अग्रवाल(Dr.RMD Agarwal) ने साझा किए कई संस्मरण
  • विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान 2012 में गोरखपुर आए थे जेटली

जीवन में सकारात्मकता के साथ आगे कैसे बढ़ा जाता है, यह कोई अरुण जेटली से सीखे। अलोचनाओं को भी सकरात्मक तरीके से स्वीकार करना उनकी आदतों में शुमार थी। यूपी बीजेपी के वरिष्ठ विधायक डाॅ. राधामोहन दास अग्रवाल (Dr.RMD Agarwal)के जेहन में पूर्व वित्त मंत्री से जुड़ी तमाम यादें हैं। वह बताते हैं कि 2012 में उनके चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitely) पहुंचे थे। चुनाव के दौरान उन्होंने बौद्धिक समाज की बैठक कर उनके दायित्वों को समझाया था।

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राजनीति के जाना माना चेहरा अरुण जेटली का एक संस्मरण याद करते हुए डाॅ.अग्रवाल बताते हैं कि यह उन दिनों की बात है जब मेडिकल कौंसिल आॅफ इंडिया की जगह मेडिकल कमीशन बिल प्रस्तावित हुआ था। चहुंओर चिकित्सक इसका विरोध कर रहे थे। इसी बीच वह उनसे मिलने पहुंचे। बातचीत के दौरान इस बिल पर चर्चा हुई तो जेटली से उन्होंने मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के जगह पर प्रस्तावित मेडिकल कमीशन बिल के निर्णय की प्रशंसा कर दी। इस पर उन्होंने कहा कि आप चिकित्सक होकर भी कह रहे कि आधी गिलास पानी से भरी है यानी आप इसके सकरात्मक पहलुओं को देख रहे लेकिन बहुत से चिकित्सक तो उसे आधी गिलास खाली है वाली कहानी रटे हुए हैं।
डाॅ.अग्रवाल बताते हैं कि उन्होंने तारीफ करते हुए एक मूलमंत्र पर काफी देर तक चर्चा किया कि जीवन में किसी चीज का नकारात्मक पक्ष देखने की जगह सकारात्मक पक्ष देखना ही उचित है और किसी भी कृत्य,संस्था या व्यक्ति का मूल्यांकन हमेशा समग्रता में ही करना चाहिए।
डाॅ.अग्रवाल बताते हैं कि एक बार मैं उनसे अपनी पीड़ा लेकर मिला और राजनीति में व्याप्त द्वेष, ईष्र्या, निजी विरोध तथा घटिया फर्जी आरोपों की चर्चा की। इस पर उन्होंने बड़े ही शांत भाव से समझाते हुए साईकिल चलाते समय चैपायों के द्वारा दौड़ाने जाने का बहुत व्यवहारिक उदाहरण दिया। कहा कि आप बिना किसी पर ध्यान दिये, बिना किसी से डरे, आलोचना तथा विरोध से निर्विकार रहकर, बिना कोई प्रतिक्रिया दिये अपने सिद्धांतों पर मूक होकर चलते रहिये, समय अपने-आप सबकुछ स्थापित कर देता है। डाॅ.अग्रवाल कहते हैं कि हमनें उसे अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया।
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि देश ने एक सर्वाधिक अध्ययनशील बौद्धिक, पूरी तरह निर्विकार, उत्कृष्ट विधिवेत्ता, मर्मज्ञ तर्कशास्त्री तथा अर्थविशेषज्ञ राजनेता खो दिया। एक वित्त मंत्री के रूप में वे देश को जिन ऊंचाईयों पर ले गये, देशवासी उनके ऋणी रहेंगे। वे एक दृढ़ निश्चयी, सिद्धांतों पर अडिग, समझौता न करने वाले और तात्कालिक हानि-लाभ से दूर रहकर दूरगामी दृष्टि से आर्थिक योजना बनाने वाले अर्थशास्त्री थे।
उन्होंने कहा कि यह राजनीति में उनकी निस्पृहता ही थी कि जब उन्हें लगा कि वे पूरे समर्पण से अपना समय सरकार को नहीं दे सकते तो उन्होंने मंत्री बनने से इन्कार कर दिया और प्रधानमंत्री मोदी जी के कहने पर भी नहीं माने।

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