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Ayodhya Ram Mandir Verdict दशकों से इस पीठ की तीन पीढ़ियां जुड़ी रही राममंदिर आंदोलन से

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Nov 09, 2019 21:52 PM | Updated: Nov 10, 2019 09:53 AM

Gorakhpur

Ayodhya Ram Mandir and Gorakhnath Peeth

अयोध्या और गोरखपुर में क्या राब्ता है, यह बात जेहन में आते ही गोरखनाथ मंदिर एकबारगी याद आ जाएगा। यहां के महंतों ने अयोध्या में राममंदिर आंदोलन को धार देने का काम किया था। यह बात दीगर है कि जिस पीठ ने मंदिर आंदोलन को धार देने का काम किया उसी पीठ के पीठाधीश्वर के जिम्मे अब प्रदेश के मुखिया के रूप में इस प्रकरण में फैसला आने के बाद शांति व संयम कायम रखने की जिम्मेदारी है।

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अयोध्या में राममंदिर आंदोलन को धार देने के लिए गोरखनाथ मंदिर के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने सबसे पहले काम किया था। पुराने लोग याद करते हुए बताते हैं कि 22 दिसंबर 1949 को विवादित ढांचे परिसर में भगवान श्रीराम की प्रतिमा रखवाई गई थी। महंत दिग्विजयनाथ हिंदू महासभा के प्रथम पंक्ति के नेताओं में शुमार थे। हिंदू महासभा के विनायक दामोदार सावरकर के साथ महंत दिग्विजयनाथ ने मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाया। ये दोनों लोग अखिल भारतीय रामायण महासभा के सदस्य भी थे।

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उनके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ भी राममंदिर आंदोलन के अगुवा रहे। 1991 के राममंदिर आंदोलन के समय आंदोलन के प्रणेता नेताओं में महंत अवेद्यनाथ की महती भूमिका रही। वे श्रीराम जन्‍मभूमि मुक्‍ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्‍यक्ष रहे।
वर्ष 1989 में इलाहाबाद में विश्व हिंदू परिषद ने धर्म संसद का आयोजन किया था। उसमें अवेद्यनाथ ने श्रीराम मंदिर आंदोलन पर काफी महत्वपूर्ण भाषण दिया था। इस आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में महंत अवेद्यनाथ रहे।

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गोरखनाथ मंदिर की तीसरी पीढ़ी में योगी आदित्यनाथ ने भी राममंदिर आंदोलन को धार देने की खूब कोशिश की। राममंदिर पर जनमानस को समझाने की बात हो या राजनैतिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाने का मामला, हर बार योगी आदित्यनाथ ने इस जिम्मेदारी को बाखूबी निभाया। हालांकि, राममंदिर पर विवादित बयान देने में भी वह कभी पीछे नहीं हटे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद राममंदिर मुद्दे को लेकर किसी प्रकार से यूपी अशांत न हो इसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने बाखूबी निभाई। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के पहले से ही वह अधिकारियों संग लगातार बैठक कर जानकारी लेते रहे। शनिवार को फैसले वाले दिन वह खुद पुलिस कंट्रोल रूम में जमे रहे। गोरखनाथ मंदिर से भी वह लगातार संवाद स्थापित कर अपने जिले में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए सतर्क दिखे।

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गोरखनाथ मंदिर में सुबह से ही रामचरित मानस

गोरखनाथ मंदिर में राममंदिर पर फैसला आने के पहले से ही तैयारियां प्रारंभ हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फोन पर ही लगातार संपर्क में थे। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के आदेश पर सुबह साढ़े आठ बजे मंदिर में रामचरित मानस का पाठ प्रारंभ हो गया। मंदिर प्रबंधन के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि मानस पाठ शांति स्थापना के साथ राममंदिर के पक्ष में फैसला आने के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि महराजजी ने आदेश दिया था कि फैसला आने के बाद सभी आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया जाए।

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