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मस्जिद विस्फोट में मौलवी ने किया बड़ा खुलासा, सेना में कार्यरत अशफाक भी एजेंसियों के रडार पर

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Nov 14, 2019 12:28 PM | Updated: Nov 14, 2019 12:28 PM

Gorakhpur

  • दस किलोग्राम विस्फोटक रखा गया था मस्जिद में
  • बारुद सुरक्षित करने का मकसद अभी भी तलाश रही एजेंसियां

कुशीनगर की मस्जिद में हुए धमाके का राज अब रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी कर्मी व सेना में कार्यरत उसका पोता खोल सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां रिटायर्ड कर्मी को मुख्य आरोपी मान रही है। एजेंसियों का मानना है कि ये लोग किसी बड़ी साजिश की फिराक में थे लेकिन बारुद की तीव्रता कुछ खास नहीं होने से आशंका को कोई विशेष बल नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, दोनों के गिरफ्त में आने के बाद ही कुछ राजफाश हो सकता है। पुलिस व एटीएस की टीमें मउ व हैदराबाद के साथ कई जगहों पर उनकी तलाश कर रही हैं।

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पूर्व कर्मी की गतिविधियां रही हैं संदिग्ध

पूर्व रिटायर कर्मचारी कुतुबुद्दीन की गतिविधियां हमेशा से संदिग्ध रही हैं। कुशीनगर के फाजिलनगर के बैरागीपट्टी के रहने वाले कुतुुबुद्दीन का पूरा परिवार मउ में शिफ्ट हो चुका है। लेकिन वह गांव में अधिकतर रहता है। गांववालों के अनुसार कुतुबुद्दीन पीडब्ल्यूडी से करीब पंद्रह साल पहले रिटायर हुआ था। उसकी छवि गांव में कट्टरवादी रही है। 2011 में गांव में बन रहे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए रखी गई मूर्ति को तोड़ने के आरोप में उसके खिलाफ केस हुआ था। उसकी आपराधिक गतिविधियों के चलते ही 2013 में उसे जिला बदर कर दिया गया था। 2014 में उसके खिलाफ बलवा, छेड़खानी, मारपीट का केस तुर्कपट्टी थाने में दर्ज हुआ था। इसी तरह 1988 में भी उसके खिलाफ तीन लोगों की हत्या का प्रयास का केस दर्ज हो चुका है।

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सेना में कार्यरत उसके पोते को भी माना जा रहा संदिग्ध

कुतुबुद्दीन का पोता अशफाक व उसकी पत्नी सेना में कार्यरत हैं। दोनों सेना के मेडिकल कोर में कार्यरत हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती हैदराबाद में बताई जा रही है। एजेंसियां उसे भी संदिग्ध मान रही है। वजह यह कि विस्फोट वाले दिन वह गांव में ही था। विस्फोट के बाद वह मस्जिद पहुंचा था, बिना देर किए साफ-सफाई करा दिया था। एजेंसियां इसे तथ्य छुपाने की नीयत से की गई कार्यवाही मान रही है।

दस किलो विस्फोट होने का दावा

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मस्जिद में दस किलोग्राम विस्फोटक होने की आशंका है। लेकिन दस किलोग्राम बारुद की तीव्रता अगर तेज होती तो काफी नुकसान भी हो सकता था। अब लैब टेस्ट से ही पता चल सकेगा कि बारुद की तीव्रता क्या रही। यह कितना नुकसान कर सकता था।

व्हाइट सीमेंट बताकर बारुद को रखवाया था आरोपी ने

पुलिस के हत्थे चढ़े मस्जिद के मौलवी ने बताया कि कुतुबुद्दीन ने अप्रैल महीना में बारुद लाकर मस्जिद में रखवाई थी। वह बारुद को व्हाइट सीमेंट बताकर रखवा दिया था। मौलवी अजीमुद्दीन पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। उसे मस्जिद कमेटी ने छह हजार रुपये मासिक पर रखे हुए है। मौलवी के अनुसार गांव के ही कुछ लड़के इस बारुद के बोरे को लेकर मस्जिद आए थे।

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यह है पूरा मामला

कुशीनगर के बैरागी पट्टी गांव में एक मस्जिद में सोमवार को धमाका हुआ था। बताया गया कि इन्वर्टर की बैैटरी फटने से यह धमाका हुआ। यह धमाका इतना तेज था कि मस्जिद के खिड़की-दरवाजे टूट गए थे और दीवारों में दरारें पड़ गईं थीं। पूरा गांव इस धमाके की आवाज से दहल उठा था। विस्फोट की खबर पाकर पुलिस गांव में पहुंची। उच्चाधिकारियों को सूचना मिली तो वे भी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों को मस्जिद के मौलाना अजमुद्दीन ने बताया कि इन्वर्टर की बैट्री फटने से विस्फोट हुआ। लेकिन फाॅरेंसिक जांच में बारुद के होने की पुष्टि हुई तो सुरक्षा एजेंसियों के होश फाख्ता हो गए।
एटीएस के अलावा खुफिया एजेंसियों ने पड़ताल शुरू की। पूछताछ के दौरान मौलान अजमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि मौलाना ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया है कि गांव के ही कुछ युवकों ने मस्जिद में बारुद रखा था। मौलाना के खुलासा के बाद पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
एजेंसियां फिलहाल बारुद रखने की वजह और उनके असली मकसद को जाानने के लिए सिर खपा रही हैं।
उधर, एसपी कुशीनगर के अनुसार मौलाना अजमुद्दीन के साथ बैरागीपट्टी गांव के इजहार, आशिक व जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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