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भारतीय बेटियों को नेपाल नागरिकता के लिए कराएगा सात साल इंतजार

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Sep 18, 2019 11:21 AM | Updated: Sep 18, 2019 11:23 AM

Gorakhpur

  • भारत के एनआरसी को पड़ोसी देश ने दे दी चुनौती
  • सालों से रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए हो सकती है मुश्किलें

भारत-नेपाल के रिश्तों में लगातार खटास आती जा रही है। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी अब कटु मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। व्यापारिक संबंधों को दुरुह करने के बाद अब सामाजिक संबंधों को भी नेपाल कठिन करता दिख रहा है। अब भारत की बेटी का अगर नेपाल में शादी होता है तो उसे सात साल तक नेपाली नागरिकता के लिए इंतजार करना पड़ेगा। यही नहीं नेपाल में अगर किसी भारतीय बच्चा जन्मता है तो उसे नेपाली नागरिक नहीं माना जाएगा।

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इंडो-नेपाल संबंधों को भारत सरकार जितना ही प्रगाढ़ करने केलिए कदम बढ़ा रही है नेपाल भारतीय नागरिकों के लिए नियमों को और कड़ा करते जा रहा है। नेपाल में व्यवसाय को कठिन करने के बाद वहां की सरकार ने नेपाल में बसे भारतीयों के लिए दिन ब दिन मुश्किलें खड़ा करते जा रहा है। नेपाल सरकार ने अब अपने देश में नागरिकता कानून में बदलाव कर दिया है।
लागू हो चुके नए नियम के अनुसार अगर भारतीय नागरिक अपनी बेटी नेपाल में किसी से ब्याहता है तो उस दंपत्ति को मैरिज सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए सात साल तक इंतजार करना होगा। यानी नेपाल में ब्याह कर गई भारतीय बेटी को सात साल बाद नेपाल अपना नागरिक मानते हुए नागरिकता प्रदान करेगा। तत्काल नागरिकता देने पर नेपाल ने रोक लगा दी है। पहले शादी के बाद ही भारतीय बेटियों को नेपाल की नागरिकता मिल जाती थी।

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नेपाल में जन्में भारतीय बच्चे अब नेपाली नागरिक नहीं

नए नागरिकता कानून के मुताबिक अब नेपाल में जन्में भारतीय बच्चों को नेपाली नागरिक नहीं माना जाएगा। पहले नेपाल में बसे भारतीयों से जन्में बच्चों को नेपाल का नागरिक मान लिया जाता था।

नेपाल में तीन तरह की नागरिकता मिलती रही

नेपाल सरकार अपने देश में तीन तरह की नागरिकता प्रदान करती थी। नेपाल में जाकर बसे भारतीयों जिनकी तीन से अधिक पीढ़ियां नेपाल में ही रहती आ रही उनको नेपाल का नागरिक मान लिया जाता था। दूसरा वह युवतियां नेपाल की नागरिक मान ली जाती थी जो नेपाल के युवकों से शादी कर लेती थीं। इसके अलावा काफी लंबे समय से रह रहे दंपत्ति अगर नेपाल देश में बच्चे को जन्म देते थे तो उन बच्चों को भी नेपाल का नागरिक मान लिया जाता था। लेकिन नेपाल सरकार ने नागरिकता कानून में बदलाव कर नेपाल में रह रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

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