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Ayodhya Verdict इस मंदिर के संतों ने क्यों कहा तीन पीढ़ियों से था इंतजार

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Nov 10, 2019 12:17 PM | Updated: Nov 10, 2019 12:20 PM

Gorakhpur

 

Ayodhya ka faisla

 

गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने कहा कि तीन पीढ़ियों का इंतजार शनिवार को खत्म हुआ। राममंदिर बनने का रास्ता प्रशस्त कर सुप्रीम कोर्ट ने न्याय किया है।
मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने कहा कि फैसला तो सबसे अच्छा आया है। अब मंदिर बनेगा। मुसलमानों को भी पांच एकड़ जमीन दे दिया गया मस्जिद के लिए। हिंदू खुश हैं, पूरी जनता खुश है। जनता खुश है कि अब मंदिर बनेगा। हमलोगों के लिए यह ऐतिहासिक दिन है।

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यह आस्था का विषय था, सब खुश हैं

योगी रामेंद्रनाथ ने कहा कि आस्था का विषय था। बहुत दिनों से लोगों को इंतजार था। सर्वाेच्च न्यायालय को धन्यवाद देता हूं। पूरे विश्व के हिंदू खुश हैं। गोरखनाथ पीठ की तीन पीढ़ियों को इंतजार था कि अयोध्या में राममंदिर बने। हम सब बहुत खुश हैं। इस पीठ के लिए यह सबसे खुशी का क्षण है।

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गोरखनाथ मंदिर में रामचरित मानस

गोरखनाथ मंदिर में राममंदिर पर फैसला आने के पहले से ही तैयारियां प्रारंभ हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फोन पर ही लगातार संपर्क में थे। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के आदेश पर शनिवार को सुबह साढ़े आठ बजे मंदिर में रामचरित मानस का पाठ प्रारंभ हो गया। मंदिर प्रबंधन के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि मानस पाठ शांति स्थापना के साथ राममंदिर के पक्ष में फैसला आने के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि महराजजी ने आदेश दिया था कि फैसला आने के बाद सभी आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद दिया जाए।

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Ayodhya Verdict इस मंदिर के संतों ने क्यों कहा तीन पीढ़ियों से था इंतजार

इसलिए खुश हैं गोरखनाथ मंदिर के संत-महंत

गोरखनाथ मंदिर के महंतों ने अयोध्या में राममंदिर आंदोलन को धार देने का काम किया था। अयोध्या में राममंदिर आंदोलन का गोरखनाथ मंदिर का रिश्ता यहां तीन पीढ़ियों से है।
गोरखनाथ मंदिर के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने 22 दिसंबर 1949 को विवादित ढांचे परिसर में भगवान श्रीराम की प्रतिमा रखवाई गई थी। महंत दिग्विजयनाथ हिंदू महासभा के प्रथम पंक्ति के नेताओं में शुमार थे। हिंदू महासभा के विनायक दामोदार सावरकर के साथ महंत दिग्विजयनाथ ने मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाया। ये दोनों लोग अखिल भारतीय रामायण महासभा के सदस्य भी थे। उनके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ भी राममंदिर आंदोलन के अगुवा रहे। 1991 के राममंदिर आंदोलन के समय आंदोलन के प्रणेता नेताओं में महंत अवेद्यनाथ की महती भूमिका रही। वे श्रीराम जन्‍मभूमि मुक्‍ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्‍यक्ष रहे।
वर्ष 1989 में इलाहाबाद में विश्व हिंदू परिषद ने धर्म संसद का आयोजन किया था। उसमें अवेद्यनाथ ने श्रीराम मंदिर आंदोलन पर काफी महत्वपूर्ण भाषण दिया था। इस आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में महंत अवेद्यनाथ रहे।
गोरखनाथ मंदिर की तीसरी पीढ़ी में योगी आदित्यनाथ ने भी राममंदिर आंदोलन को धार देने की खूब कोशिश की। राममंदिर पर जनमानस को समझाने की बात हो या राजनैतिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाने का मामला, हर बार योगी आदित्यनाथ ने इस जिम्मेदारी को बाखूबी निभाया। हालांकि, राममंदिर पर विवादित बयान देने में भी वह कभी पीछे नहीं हटे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद राममंदिर मुद्दे को लेकर किसी प्रकार से यूपी अशांत न हो इसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने बाखूबी निभाई। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के पहले से ही वह अधिकारियों संग लगातार बैठक कर जानकारी लेते रहे। शनिवार को फैसले वाले दिन वह खुद पुलिस कंट्रोल रूम में जमे रहे। गोरखनाथ मंदिर से भी वह लगातार संवाद स्थापित कर अपने जिले में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए सतर्क दिखे।