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इस रोग या मरीज की जानकारी दीजिए और 250 रुपये स्वास्थ्य विभाग से पाइए

Dheerendra Vikramadittya

Publish: Sep 20, 2019 09:45 AM | Updated: Sep 20, 2019 02:54 AM

Gorakhpur

  • रोग के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सामाजिक सहयोग के लिए की अपील
  • आशा बहुओं के लिए भी प्रोत्साहन राशि का प्राविधान

कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए अब सामाजिक सहयोग लिया जाएगा। कुष्ठ रोगियों की जानकारी देने वाले को स्वास्थ्य विभाग इनाम देने का ऐलान किया है। कुष्ठरोगी की जानकारी देने या उसे अस्पताल पहुंचाने पर ढाई सौ रुपये प्रति रोगी जानकारी देने वाले को दिया जाएगा।
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डाॅ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि आशा बहू और कुष्ठ रोग उन्मूलन से संबंधित कर्मचारियों के नेटवर्क के माध्यम से कुष्ठ रोगियों को चिह्नित और पंजीकृत करके इलाज किया जाता है, फिर भी समुदाय के लोगों का सहयोग इस प्रयास को और अधिक गति देगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी के आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जिसमें कुष्ठ रोग के लक्षण दिख रहे हों तो उसे लालकोठी स्थित कुष्ठ रोग विभाग तक अवश्य पहुंचाए। अगर चिकित्सकीय जांच में उक्त व्यक्ति में रोग की पुष्टि हो जाती है तो 250 रूपये की प्रोत्साहन राशि भी संबंधित व्यक्ति के खाते में दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह रोग विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नेगलेक्टेड डिजीज प्रोग्राम में भी शामिल हो चुका है और कुष्ठ रोग उन्मूलन में डब्ल्यूएचओ भी सहयोग कर रहा है।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी (डीएलओ) डाॅ. एके प्रसाद ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 345 कुष्ठ रोगी जनपद में खोजे गए, जिनमें 323 रोगमुक्त हो चुके हैं। विभाग को जब भी कोई नया कुष्ठ रोगी मिलता है तो उसके आसपास के दस घरों में सर्वे कराया जाता है। इन घरों में स्वस्थ व्यक्तियों को कुष्ठ रोग से बचाव के लिए दवा खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि आशा बेस्ड सर्विलांस सिस्टम (एबसल्स) के तहत आशा बहू जब अपने कार्यक्षेत्र से नया कुष्ठ रोगी खोज कर लाती है और संबंधित व्यक्ति में कुष्ठ रोग की पुष्टि हो जाती है तो आशा को 250 रूपये प्रति रोगी देने का प्रावधान है। अगर आशा लगातार फालोअप करवा कर कुष्ठ रोगी को ठीक करवा देती है तो पासिबैसीलरी (पीबी) रोगी के ठीक होने पर 400 रूपये जबकि मल्टीबैसीलरी (एमबी) रोगी के ठीक होने पर 600 रूपये अतिरिक्त देने का प्रावधान है। पीबी रोगी का इलाज छह महीने जबकि एमबी रोगी का इलाज बारह महीने चलता है।

गोरखपुर में कुष्ठ रोग

  • विभागीय प्रयासों से जनपद में 31 मार्च 2019 तक जिले 323 कुष्ठ रोगी इस रोग से मुक्त हो चुके हैं जबकि 209 कुष्ठ रोगियों का इलाज चल रहा है।
  • जनपद में कुल दिव्यांग कुष्ठ रोगियों की संख्या 259 है जिनमें से 232 को प्रति माह ढाई हजार रूपये की पेंशन मिलती है।
  • 04 कुष्ठ रोगियों का निशुल्क आपरेशन कराया गया जबकि 76 को सेल्फ केयर किट बांटे गए हैं।
  • 89 कुष्ठ रोगियों को एमसीआर नामक मुलायम चप्पल दिया जा चुका है।
  • जनपद में कुष्ठ रोग की व्यापकता दर 0.41 फीसदी है।

कुष्ठ रोग को जानिए

  • शरीर में कोई ऐसा दाग-धब्बा जो सुन्न रहता है वह कुष्ठ रोग हो सकता है।
  • यह रोग लैपरी नामक माइक्रो बैक्टेरिया से होता है जो बहुत धीमी गति से इंफेक्शन करता है।
  • अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इलाज हो सकता है।
  • यह हेल्दी कान्टैक्ट से नहीं फैलता है। इसका इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे में तभी होता है जबकि वह 16-18 घंटा प्रतिदिन कई महीनों तक रोगी के क्लोज कान्टैक्ट में रहे।

यह है लक्ष्य

डीएलओ ने बताया कि आजादी के बाद 1952 में कुष्ठ रोगियों के लिए सर्वे, एजुकेशन एंड ट्रीटमेंट (सेट) नामक प्रोग्राम चलाया गया था जिसका स्वरूप समय-समय पर बदलता रहा है। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम आया और वर्ष 2006 से डीपीएमआर पर फोकस किया गया। डीपीएमआर का लक्ष्य है कि वर्ष 2020 तक विकलांगता की दर प्रति दस लाख जनसंख्या में एक से कम किया जाए।