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विरोध करने दिल्ली पहुंचे किसानों के साथ हुआ कुछ ऐसा कि उलटे पैर लौटना पड़ा घर, जानिये क्या कहा सरकार ने

Virendra Kumar Sharma

Publish: Sep 21, 2019 16:11 PM | Updated: Sep 21, 2019 16:11 PM

Ghaziabad

Highlights

. किसानों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल की हुई वार्ता
. सरकार ने 15 में से 5 मांग मानी
. 5 मांग जल्द पूरी करने का दिया आश्वासन

 

गाजियाबाद. विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को सहारनपुर से दिल्ली तक पदयात्रा निकालने वाले हजारों किसान बैकफूट पर आ गए हैं। दिल्ली—यूपी बॉर्डर से किसानों का 11 सदस्यीय दल दिल्ली पुलिस की गाड़ी में केंद्र सरकार के अधिकारियों से मिला। किसान नेता का कहना है कि इनमें से सरकार ने 5 मांगे मान ली है। साथ ही 10 पर जल्द विचार करने का आश्वासन दिया है। सरकार के इस आश्वासन के बाद किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया है। लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो दौबारा आंदोलन किया जाएगा।

इनका नेतृत्‍व भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह कर रहे हैं। वेस्ट यूपी समेत अन्य जिलों के किसानों का आना गुरुवार से ही शुरू हो गया था। ये दिल्ली—यूपी बॉर्डर पर एकजुट हुए। हजारों की तादाद में किसानों को देखते हुए पहले ही दिल्ली व यूपी बॉर्डर पर भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया था। उसके बाद किसानों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बीच वार्ता हुई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ललित राणा ने बताया कि फिलहाल सरकार ने उनकी 15 में से 5 मांगे मान ली है।

हालांकि किसानों ने वार्ता से पहले यूपी गेट पर डेरा डाला दिया था। दिल्ली यूपी बॉर्डर पर तैनात की गई पुलिस ने किसानों को दिल्‍ली में जाने से रोक दिया हैं। इसी बीच जगह—जगह जाम से गुजरने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। इससे पहले शुक्रवार को नोएडा के ट्रॉसपोर्ट नगर में हुई कृषि मंत्रालय के निदेशक एसएस तोमर के साथ किसानों की वार्ता सफल नहीं हो सकी थी। जिसकी वजह से किसानों ने दिल्ली की तरफ सेे कूच किया था। वहीं, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली पुलिस ने किसानों को दिल्ली मेंं जाने से रोका था।

ये मांगे मानी

संगठन के नेता का कहना है कि किसान फसल बीमा योजना, किसान मुख्य सहित पूरे परिवार बीमा योजना में शामिल करने, 14 दिन में गन्ना भुगतान करने, नदियों का पुनः स्थापित करके उन्हें जीवनदायिनी बनाने और फसल मूल्य का निर्धारण करते हुए किसान प्रतिनिधियों को सम्मिलित करने की मांग मान ली है। उन्होंने बताया कि 10 मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया है।


सरकार के सामने किसानों ने रखी अपनी मांग

. भारत के सभी किसानों के कर्जे पूरी तरह माफ हों
. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिले
. किसान व मजदूरों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मुफ्त
. किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन मिले
. फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय किए जाएं
. खेती कर रहे किसानों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए
. किसान के साथ-साथ परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले
. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट और एम्स की स्थापना हो
. आवारा गोवंश पर प्रति गोवंश गोपालक को 300 रुपये प्रतिदिन मिलें
. किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए
. समस्त दूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त कराया जाए
. भारत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो