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शिक्षक की सोच ने बदल दी सरकारी स्कूल की तस्वीर, अब प्ले स्कूल सा नजारा

Bhawna Chaudhary

Publish: Jul 26, 2019 23:00 PM | Updated: Jul 26, 2019 16:20 PM

Gariaband

आदिवासी बाहुल्य ग्राम खट्टी के शासकीय प्राथमिक शाला (Government School) में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) गिरीश शर्मा की एक नयी सोच ने शाला का कायाकल्प ही कर दिया है।

गरियाबंद. नगर से लगभग 7 किमी दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य ग्राम खट्टी के शासकीय प्राथमिक शाला (Government School) में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) गिरीश शर्मा की एक नयी सोच ने शाला का कायाकल्प ही कर दिया है। यह शासकीय स्कूल अपने रंग रोगन, दीवार पर बने 3 डी प्रिंट, आकर्षक वातावरण एवं कार्टून, चित्र प्रायवेट प्ले स्कूल से किसी भी स्तर पर कम नहीं है।

शाला अनुदान से प्राप्त राशि का सदुपयोग यहां पदस्थ शिक्षकों ने अपने स्कूल को बेहतर बनाने के लिए किया है। यह इस जिले की अन्य शासकीय स्कूलों के लिए अनुकरणीय पहल है। गांव के पालकगण भी शाला के इस वातावरण से काफी खुश नजर आ रहे तथा इसके लिये यहां के शिक्षकों की तारीफ की। ग्राम पंचायत सढोली के आश्रित ग्राम खट्टी में 1971 से शासकीय प्राथमिक शाला संचालित है। 2010 में पुरानी बिल्डिंग के जर्जर हो जाने के पश्चात 2 कमरे एवं 1 बरामदे वाले अतिरिक्त शाला भवन में यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षा संचालित है। पांच कक्षाओं के लिए दो सहायक शिक्षक एलबी पदस्थ हैं।

शिक्षक गिरीश शर्मा ने शाला अनुदान के रूप में आने वाली राशि से कुछ नया करने का ठाना। पहले लघु मरम्मत के लिये मिली राशि में से दोनों कमरों की उखड़ चुकी फ्लोरिंग का जीर्णोद्धार, सीढ़ी में चेकर टाइल्स के साथ ही दोनों कमरों में विषय पर आधारित प्रिंट रिच, रंग रोगन दीवाल पर पाठ्यपुस्तक से ही पाठ का चित्र एवं बच्चों के रुचि के अनुरूप कार्टून चित्र उन्होंने बनवा कर स्कूल का पूरा वातावरण ही आकर्षक कर दिया। फिर इस वर्ष प्राप्त शाला अनुदान की राशि से बरामदे को भी सजाया गया। इस तरह इस शासकीय स्कूल को देखकर लगता है कि यह किसी बड़े शहर के प्राइवेट प्ले स्कूल से कम नहीं है।

इससे बच्चों की शाला आने के प्रति रुचि बढ़ी है तथा कुछ दिवस एवं विशेष अवसरों को छोड़ दें, तो उपस्थिति लगभग शत प्रतिशत रहने लगी है। स्कूल प्रांगण में ही छायादार एवं औषधीय वृक्ष यहां की सुंदरता पर चार चांद लगा रहे हैं। इस संबंध में सहायक शिक्षक गिरीश शर्मा कहते हैं डीईओ ओगरे सर एवं बीईओ हरदेल सर के मार्गदर्शन से शाला में पदस्थ शिक्षक नारायण चंद्राकर के सहयोग एवं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति, संकुल समन्वयक केआर साहू से चर्चा कर यह कार्य किया गया। शाला विकास समिति के अध्यक्ष एवं उपसरपंच दीवान सिंह, पालक एवं पंच शैल सिंह ध्रुव ने कहा कि इस तरह के सुंदर वातावरण के लिये शिक्षक गिरीश शर्मा का विचार हम सब लोगों को पसंद आया एवं स्कूल में बच्चों को मजा आ रहा है। यहां मध्यान्ह भोजन कक्ष एवं अहाता जल्द बनाने की मांग उन्होंने की है।

मध्याह्न भोजन कक्ष की आवश्यकता
इन सबके बीच इस स्कूल मे अगर कुछ चीज की और आवश्यकता है तो वह है मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए कमरे की एवं शाला के लिए चार दीवारी की, क्योंकि भोजन पकाने के लिये बने कक्ष के जर्जर हो जाने के कारण भोजन बनाने में काफी परेशानी हो रही है। वहीं चारदीवारी नहीं होने से तेंदुआ भी कई बार शाला भवन के नजदीक आ जाता है, जिससे कुछ भी अनहोनी हो सकती है।