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बिना अनुमति सरपंच ने किसान की एक एकड़ जमींन पर बना दी सड़क, न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित

Akanksha Agrawal

Publish: Aug 18, 2019 22:40 PM | Updated: Aug 18, 2019 14:19 PM

Gariaband

पीडि़त किसान ने आरोप लगाया है कि उससे बिना सहमति लिए सरपंच और सचिव ने सडक़ बनाने के लिए उसकी एक एकड़ लगानी जमीन पर सडक़ बनवा दिया।

देवभोग. कुम्हड़ईकला पंचायत में एक किसान पंचायत के सरपंच और उपसरपंच के दबंगई का शिकार हो गया है। पीडि़त किसान ने आरोप लगाया है कि उससे बिना सहमति लिए सरपंच और सचिव ने रेत के रायल्टी का ठेका लिए जाने के बाद सडक़ बनाने के लिए उसकी एक एकड़ लगानी जमीन पर सडक़ बनवा दिया। वहीं तीन फीट मुरुम युक्त सडक़ बनाए जाने के बाद किसान का खेत डूबान में आ गया है। पानी निकासी नहीं हो पाने के कारण डूबान जमीन से पिछले दो साल से वह उत्पादन भी नहीं ले पा रहा है।

वहीं मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान की माने तो जिस लगानी जमीन पर संबंधित किसान रास्ता बनाए जाने की बात कह रहा है, वह जमीन चार साल पहले ही सेतु निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है। वहीं किसान अधिकारियों के दावों के विपरीत स्थिति बताते हुए संबंधित जमीन को अपना होने का दावा करते हुए न्याय दिलाने की मांग कर रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार कुम्हड़ईकला का पीडि़त किसान बिम्बाधर धु्रवा पिछले दो साल से न्याय पाने के लिए भटक रहा है। किसान की माने तो उसने मामले में डेढ़ साल पहले कलेक्टर को भी आवेदन कर वस्तुस्थिति से अवगत करवाते हुए न्याय दिलाए जाने की गुहार लगाई थी। इस पर कलेक्टर ने जिम्मेदार ब्लॉक के राजस्व विभाग को निर्देंशित किया था कि पीडि़त किसान के आवेदन पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे न्याय दिलाया जाए।

कलेक्टर के निर्देंश के बाद भी लगभग डेढ़ साल बीतने को है, लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई जिम्मेदार राजस्व विभाग के अधिकारी ने नहीं की। पीडि़त किसान बताता हैं कि उसके पास मात्र एक एकड़ जमीन ही है, वह भी पंचायत के जिम्मेदारों के चलते डूबान में तब्दील हो चुकी है। पीडि़त की माने तो उसे जल्द ही न्याय नहीं मिला तो वह मजबूरीवश परिवार के साथ मुख्यमंत्री के चौपाल में जाकर न्याय के लिए गुहार लगाने को मजबूर हो जाएगा।

नाममात्र का दिया मुआवजा
पीडि़त किसान बिम्बाधर की माने तो सेतु निर्माण विभाग द्वारा करोड़ों रुपए से कुम्हड़ई नदी में पुल बनाया गया। इस दौरान पीडि़त किसान का भी 6 डिसमिल जमीन संबंधित पुल में अधिग्रहण हुआ। पीडि़त की माने तो अधिग्रहण के साल भर बाद एसडीएम दफ्तर से उसे मात्र 13 हजार रुपए का चेक दिया गया। वहीं बाकी बची हुई 75 प्रतिशत की राशि बाद में देने का वादा जिम्मेदार राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किया है। पीडि़त बताता है कि जमीन का अधिग्रहण हुए आज लगभग 4 साल बीत चुके हैं, लेकिन उसे पूरा पैसा नहीं मिल पाया है। शीघ्र मुआवजा नहीं मिलने पर पीडि़त किसान ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है।

देवभोग के नायब तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान ने बताया कि हमने वहां मौका देखने के बाद संबंधित सडक़ पर रोक लगा दिया है। वहीं संबंधित सडक़ को पंचायत ने अधिग्रहण नहीं किया है, बल्कि उसे सेतु निर्माण विभाग के द्वारा अधिग्रहित की गई थी। ऐसे में वह शासन की जमीन है। वहीं जब तक उच्चाधिकारियों के द्वारा खनन करने संबंधी आदेश प्राप्त नहीं होगा, तब तक खनन पर प्रतिबंध लगा रहेगा।

ग्राम पंचायत कुम्हड़ईकला के सरपंच भोजो धु्रवा ने बताया कि वह शासन की जमीन है, हमने किसी की निजी जमीन पर सडक़ नहीं बनाया है। वहीं दबंगईपूर्वक निजी जमीन में सडक़ बनाने का आरोप निराधार और तथ्यहीन है।