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कलाई पर बंधे कच्चे धागे में समाए हैं विश्व निर्माण के पांच सूत्र, जानिए कौन से हैं वह, देखें वीडियो

Amit Sharma

Publish: Aug 13, 2019 16:09 PM | Updated: Aug 13, 2019 18:07 PM

Firozabad

— ब्रम्हाकुमारी सेवा केंद्र पर मनाया गया रक्षाबंधन का पर्व, अधिकारियों और समाजसेवियों ने लिया बहनों की रक्षा का संकल्प।

फिरोजाबाद। रक्षाबंधन का पर्व भाई—बहन के प्यार का प्रतीक है। बहनों द्वारा भाई की कलाई पर बांधी गई राखी का भी अपना अलग अस्तित्व है। कलाई पर बंधने वाले रक्षा सूत्र से विश्व निर्माण होता है। रक्षा सूत्र किस प्रकार विश्व कल्याण करने में सहायक होते हैं। इस विषय के बारे में ब्रम्हाकुमारियों द्वारा जागरूक किया गया। अतिथियों ने रक्षाबंधन के पर्व को लेकर जानकारी दी।

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यह हैं रक्षा सूत्र
ब्रम्हाकुमारी सेवा केन्द्र की संचालिका विजय बहन ने बताया कि यह पांच सूत्र विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रथम रक्षा सूत्र स्नेह सूत्र है। इस सूत्र के तहत आत्मा को आत्मा से जोड़कर विश्व भातृत्व भाव बढ़ाने का काम किया जाता है। दूसरा रक्षा सूत्र है। तन, मन, धन, जन, मर्यादा, देश, समाज और संस्कृति की रक्षा का प्रेरक है। तीसरा ईश्वरीय सूत्र है जो ईश्वरीय ज्ञान गुण और शक्तियों और वरदानों की प्राप्ति कराने वाला है। चौथा परिवर्तन सूत्र है। स्व का परिवर्तन कर विश्व परिवर्तन की ओर अग्रसर करने वाला यह परिवर्तन सूत्र है। पांचवां पवित्रता सूत्र है। मन, वचन, कर्म, संबंध, शरीर प्रकार की शुद्धि से भरे विश्व की ओर ले जाने वाला यह पवित्रता का सूत्र है।

ये बोले एसडीएम
मुख्य अतिथि उप जिला अधिकारी टूंडला केपी सिंह ने बताया इस कार्यक्रम में आकर मुझे बहुत सुकून महसूस हो रहा है। सच्चे रूप में यह ब्रम्हाकुमारी बहन अलौकिक रक्षाबंधन का कार्यक्रम रखकर समाज को जागरुक करने का दिव्य कार्य कर रही हैं। विशिष्ट अतिथि डीटीएम समर्थ गुप्ता ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था इस रक्षाबंधन के पर्व को उसी तरह से मना रही है जो कि पूर्व में अच्छे विचारों को लेकर मनाते थे। सभी भाइयों को अपनी बहनों की तरह दूसरी बहनों के प्रति भी वही दृष्टि रखनी चाहिए। ब्लॉक प्रमुख भंवर सिंह ने बताया कि अपनी बहू बेटियों को भी सभी का सम्मान करना सिखाना चाहिए जिससे समाज में प्रेम आपसी सहयोग की भावना बनी रहे। पूर्व चेयरमैन रामवती चौधरी ने कहा कि पहले रक्षाबंधन का पर्व बहुत खुशियां भरा होता था। सभी मल्हारा गाकर की खुशियां मनाते थे।

तिलक लगाने का है अपना अलग अनुभव
डॉक्टर आंशू गुप्ता ने कहा कि इस पर्व पर रक्षा सूत्र बांधने से पूर्व भाई के मस्तक पर बहन चंदन का तिलक लगाती हैं जो शुद्ध शीतल और सुगंधित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। तिलक दाएं हाथ से किया जाता है तथा राखी भी दाएं हाथ पर बांधी जाती है। यह विधि हमें यह प्रेरणा देती है कि हम सदा राइट अर्थात सकारात्मक चिंतन करते हुए राइट अर्थात श्रेष्ठ कर्म ही करें जिससे आत्मा अनिष्ट परिणामों से दुखी व शांत होने से सुरक्षित रहेगी ,मिठाई खिलाने के पीछे भी मन को और संबंधों को मीठा बनाने का राज भरा हुआ है। इस मौके पर पूजा सिंह, बीके राधिका बहन, बीके तनु बहन, बीके ममता बहन, बीके रेनू बहन, राजू भाई, भगवती, खेतपाल सिंह, चुन्नीलाल, विजेंद्र आदि मौजूद रहे।


मनभावन त्योहार है राखी, परम पिता का प्यार है राखी
पवित्रता का उपहार राखी, श्रेष्ठाचार का आधार है राखी।