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अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें श्री विष्णु के स्वरूप की पूजा, समस्त पापों से मिलेगी मुक्ति

Tanvi Sharma

Publish: Sep 11, 2019 13:05 PM | Updated: Sep 11, 2019 13:05 PM

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अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें श्री विष्णु के स्वरूप की पूजा, समस्त पापों से मिलेगी मुक्ति

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी पड़ती है। इस दिन भगवान श्री गणेश का विसर्जन ( ganesh visarjan 2019 ) किया जाता है और भगवान विष्णु के अनंत रुप की पूजा की जाती है। इस दिन का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। लोग इस दिन व्रत पूजा करते हैं और भगवान अनंत को प्रसन्न करते हैं। वहीं दूसरी तरफ गणपति जी को विदाई देते हैं। इस बार अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर ( anant chaturdashi 2019 ) को पड़ रही है। इस दिन क्या करें क्या नहीं आइए जानते हैं...

 

anant chaturdashi 2019

अनंत चतुर्दशी के दिन क्या करें

हिंदू धर्म शास्त्रों में इस दिन व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान है। विष्णु जी के अनंत स्वरुप की पूजा में सूत्रों का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन सूत सूत्र को हल्दी में भिगोकर 14 गांठ लगाकर तैयार करें। वहीं इसे हाथ या गले में पहनें। हर गांठ में भगवान विष्णु के नामों की पूजा की जाती है। फिर इस सूत्र को लोग अपने हाथों पर बांधते हैं।

सूत्र को लेकर लोगों का मानना है कि इसे बांधने से मनुष्य के हर कष्ट और दुख दूर होते हैं। वहीं जो भी व्यक्ति पूरे विधि-विधान से अनंत देवता की पूजा करते हैं उन्हें समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

अनंत चतुर्दशी ( Anant Chaturthi ) तिथि और शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी की तिथि: 12 सितंबर 2019 चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 12 सितंबर 2019 को सुबह 05 बजकर 06 मिनट से चतुर्दशी तिथि समाप्‍त: 13 सितंबर को सुबह 07 बजकर 35 मिनट तक।

 

anant chaturdashi 2019

जानिए क्या हैं पूजन का विधान-

1. सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर कलश की स्थापना करें।
2. कलश स्थापना करके उस पर सुदंर लोटे में कुश रखना चाहिए।
3. कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें।
4. इसके बाद कुंमकुम, केसर या हल्दी से रंग कर बनाया हुआ कच्चे डोरे का चौदह गांठों वाला 'अनंत' भी रखा जाता है।
5. मिष्ठान आदि का भोग भी लगाएं और अनंत भगवान का ध्यान करते हुए सूत्र धारण करें।
6. तत्पश्चात अनंत देव का ध्यान करके शुद्ध अनंत को अपनी दाहिनी भुजा पर बांध लें।
7. यह डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देने वाला माना गया है।
8. यह व्रत धन-पुत्रादि की कामना से किया जाता है।
9. इस दिन नए डोरे के अनंत को धारण करके पुराने का त्याग कर देना चाहिए।
10. इस व्रत का पारण ब्राह्मण को दान करके करना चाहिए।


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अनंत चतुर्दशी के दिन का महत्व

अनंत चतुर्दशी के बारे में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। महाभारत की एक कथा के अनुसार जब कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था। इसके बाद पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा। वहां उन्हें बहुत से कष्टों को झेलना पड़ा। तब एक दिन अचानक भगवान श्रीकृष्ण पांडवों से मिलने वन में आए और तभी पांडवों ने उन्हें अपना हाल बताया। तभी युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि इस पीड़ा से निकलने का और दोबारा राजपाट प्राप्त करने का क्या उपाय है। तब श्री कृष्ण ने कहा कि आप सभी भाई पत्नी समेत भाद्र शुक्ल चतुर्दशी का व्रत रखें और अनंत भगवान की विधि-विधान से पूजा करें। उन्होंने ऐसा ही किया और वे कष्टों से मुक्त हो गये।