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हरियाणा: दलबदल के बाद भी बीजेपी व कांग्रेस के इन नेताओं की नहीं गली दाल

Prateek Saini

Publish: Apr 16, 2019 18:46 PM | Updated: Apr 16, 2019 18:46 PM

Faridabad

योगेश्वर दत्त और दीपा मलिक का नाम भी खबरों तक रहा सीमित...

 

(चंडीगढ़,फरीदाबाद): लोकसभा चुनाव से पहले दलबदल करने वाले ज्यादातर नेताओं के हाथ निराशा ही लगी है। नेताओं के अलावा कई चेहरे ऐसे भी थे जिन्होंने पलड़ा भारी देखकर भाजपा का दामन तो थामा लेकिन पार्टी ने उन्हें अधिक तवज्जो नहीं दी। हालांकि पिछले चुनाव के दौरान कांग्रेस को छोडक़र भाजपा में शामिल होने वाले कई नेताओं की लॉटरी लग गई थी।


भिवानी से मौजूदा सांसद धर्मबीर तो पिछले चुनाव के दौरान सुबह के समय कांग्रेस को अलविदा करके भाजपा में शामिल हुए थे और भाजपा ने शाम के समय उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया था। लेकिन इस बार स्थिति कुछ बदली हुई हैं। राजनीति के तीन बड़े चेहरे इस बार अलग-अलग पार्टियों में शामिल हुए। इनमें करनाल से लगातार दो बार सांसद रहे डॉ.अरविंद शर्मा, फरीदाबाद से चार बार सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना तथा राज्यसभा सांसद रहे और नलवा से विधायक रहे रणबीर सिंह गंगवा शामिल हैं।

दलबदल के इस खेल में केवल अरविंद शर्मा को ही भाजपा ने रोहतक से टिकट दी है। हालांकि अरविंद शर्मा की पहली पसंद करनाल और दूसरी पसंद सोनीपत थी, लेकिन अरविंद शर्मा को भाजपा ने हुड्डा के गढ़ रोहतक में उतार दिया। अवतार सिंह भड़ाना ने भाजपा केवल इसीलिए छोड़ी क्योंकि वह फरीदाबाद से लोकसभा चुनाव लडऩा चाहते हैं। यहां मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के साथ उनकी छत्तीस का आंकड़ा है।

गुर्जर के सामने चुनाव लडऩे के लिए ही उन्होंने भाजपा भी छोड़ी और उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा भी दिया। इसके बावजूद कांग्रेस ने उनकी जगह तिगांव से कांग्रेस विधायक ललित नागर को टिकट दे दिया। 2014 में इनेलो टिकट पर नलवा से चुनाव जीत कर पहली बार विधानसभा पहुंचे रणबीर सिंह गंगवा ने भी भाजपा इसीलिए ज्वाइन की थी क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी हिसार संसदीय क्षेत्र से उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।

गंगवा का नाम आखिर तक सुर्खियों में भी रहा, लेकिन ऐन-मौके पर केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह अपने आईएएस बेटे बृजेंद्र सिंह को टिकट दिलवाने में कामयाब रहे। नेताओं के साथ-साथ नामी खिलाडिय़ों की स्थिति भी कुछ इस बार ऐसी ही रही है। इस चुनाव के दौरान योगेश्वर दत्त और दीपा मलिक ने भी राजनीति में एंट्री की कोशिश तो की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। रोहतक लोकसभा सीट से अंतिम समय तक दीपा मलिक का नाम चलता रहा। योगेश्वर दत्त भी पिछले कई दिनों से भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। योगेश्वर का नाम भी सोनीपत सीट से प्रबल दावेदारों में से था। इन दोनों ही ओलंपिक विजेता खिलाडिय़ों को कहीं से भी टिकट नहीं मिल सका।