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शर्मनाक : विकास के मखमल पर टाट का पैबंद है फैजाबाद में मौजूद ये लकड़ी का पुल

Anoop Kumar

Publish: Nov 13, 2018 17:54 PM | Updated: Nov 13, 2018 17:54 PM

Faizabad

रोजाना जान की बाज़ी लगाकर खुद के बनाये इस लकड़ी के पुल को पार कर जाते हैं गाँव के लोग

फैजाबाद : जिले के ग्रामीण इलाके में मौजूद एक लकड़ी का पुल इस इलाके में विकास का आइना दिखा रहा है।लकड़ी का पुल रुदौली विधानसभा क्षेत्र में कल्याणी नदी पर ग्रामीणों ने अपनी मेहनत से बना डाला है। जब स्थानीय ग्रामीण सरकारों से निराश हुए तो अपने कंधों पर उठा ली जिम्मेदारी और नदी में बना डाला लकड़ी का पुल। इस लकड़ी के पुल पर लोग अपनी जान पर खेलकर रोजाना नदी पार करते हैं | चाहे वह पैदल हो साइकिल हो या फिर मोटरसाइकिल सभी राहगीर जान की बाजी लगाकर ये पुल पार करने को मजबूर होते हैं।
रुदौली विधानसभा क्षेत्र में बह रही कल्याणी नदी लोगो का कल्याण तो कर रही है लेकिन सरकारें जनता का कल्याण करने को राजी नहीं।

न जाने कितनी सरकारें आयीं और चली गयीं लेकिन फैजाबाद के सुल्तानपुर गांव की नही बदली सूरत

रुदौली विधानसभा क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव के पास यह लकड़ी का पुल सरकारों के विकास का आइना दिखा रहा है। कितनी सरकारें आई और गई लेकिन इस पुल की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसा भी नहीं है कि ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत न कराया हो लेकिन जब यह पुल नहीं बना तो बाराबंकी के रामसनेहीघाट की दूरी को कम करने के लिए सुल्तानपुर गांव के लोगों ने अपनी मेहनत से जंगल से लकड़ी काटकर लकड़ी के पाये पर पुल खड़ा कर दिया।ये पुल लकड़ी के पाये पर खड़ा है और रस्सियों से उसे बांधा गया है। लकड़ी के कमजोर पुल पर लोग अपनी जान की बाजी लगाकर नदी को पार करते हैं। चाहे वह पैदल हो साइकिल से हो या फिर मोटरसाइकिल से सभी लोग जान की बाजी लगा रहे हैं लेकिन सरकार इन लोगो की तरफ ध्यान नहीं दे रही है।

रोजाना जान की बाज़ी लगाकर खुद के बनाये इस लकड़ी के पुल को पार कर जाते हैं गाँव के लोग

जनप्रतिनिधि कहते हैं कि बस बहुत जल्दी ही पुल बन जाएगा। सुल्तानपुर गांव के वासियों ने निर्णय लिया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे ताकि कम से कम इस बार की सरकार इस समस्या पर ध्यान आकर्षित करें। यह पुल रुदौली विधानसभा क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव को कम दूरी में बाराबंकी के रामसनेहीघाट को जोड़ता है। वैसे रामसनेहीघाट पहुंचने के लिए सुल्तानपुर गांव के वासियों को कम से कम 35 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है और इसी दूरी को कम करने के लिए लकड़ी का पुल ग्रामीणों ने बनाकर तैयार कर डाला।