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मलाला यूसुफजई ने कश्मीर के हालात पर जताई चिंता, कहा- सात दशकों से यहां के लोग पीड़ा झेल रहे

Mohit Saxena

Publish: Aug 08, 2019 14:09 PM | Updated: Aug 08, 2019 14:17 PM

Europe

  • पाकिस्तानी मूल की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने कश्मीर मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की हिदायत दी
  • कश्मीर में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई

लंदन। नोबेल पुरस्कार विजेता व पाकिस्तानी मूल की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने भी कश्मीर मुद्दे पर बयान जारी किया है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा है कि कश्मीर समस्या का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से ही हो सकता है। बीते सात दशक से चल रही समस्या का हल हिंसा से नहीं हो सकता है। उन्होंने कश्मीर में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। गौरतलब है कि मलाला इस समय लंदन में रह रही हैं।

मलाला ने कहा कि जब वह बहुत छोटी थीं, तब कश्मीर की समस्या के बारे में सुनती थीं। जब उनके माता-पिता भी बच्चे थे, तब भी यह समस्या कायम थी। इसके अलावा उनके दादा-दादी भी इस क्षेत्र में रहे हैं। मगर आज तक कोई भी हल नहीं निकल सका। मलाला ने लिखा कि वह कश्मीर की फिक्र करती हैं क्योंकि दक्षिणी एशिया उनका भी घर है।

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जरूरी नहीं है कि हम एक-दूसरे को चोट पहुंचाते रहें: मलाला

मलाला ने कहा कि जरूरी नहीं कि हम एक दूसरे को चोट पहुंचाते रहें। दोनो देश बैठकर समस्या का हल का निकाल सकते हैं। उन्होंने लिखा कि आज हिंसा के माहौल में यही लोग ही सबसे दयनीय हालात में हैं। इन्हें युद्ध के भीषण परिणाम झेलने पड़ रहे हैं।

मलाला ने ट्विटर पर शेयर नोट में लिखा कि एक-दूसरे को दुख पहुंचाते रहना कोई विकल्प नहीं है। 'यह जरूरी नहीं है कि हम एक-दूसरे को दुख पहुंचाते रहें और लगातार पीड़ा में रहें। आज वह कश्मीरी बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस हिंसा के माहौल में यहीं के (बच्चे-महिलाएं) ही सबसे दयनीय हालत में हैं और इन्हें ही युद्ध के भीषण परिणाम झेलने पड़ते हैं।

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