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सांसद की पहल : रीजनल एयर कनेक्टविटी से जोड़ी जाए सैफई हवाई पटटी, लोगों को आवागमन में मिलेगी सुविधा

Neeraj Patel

Publish: Dec 05, 2019 16:48 PM | Updated: Dec 05, 2019 16:48 PM

Etawah

जिले के सैफई स्थित हवाई पट्टी को रीजनल एयर कनेक्टविटी से जोड़ा जाएगा, जिससे दर्जन भर जिलों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

इटावा. जिले के सैफई स्थित हवाई पट्टी को रीजनल एयर कनेक्टविटी से जोड़ा जाएगा, जिससे दर्जन भर जिलों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और साथ ही क्षेत्र का विकास होगा तथा एक्सप्रेस-वे पर जो दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं उनमें भी कमी आएगी। इटावा के सांसद और अनसूचित जाति आयोग के चैयरमैन डा.रामशंकर कठेरिया ने लोकसभा में बुधवार को यह मुद्दा पूरे जोरदारी से उठाया।

सांसद रामशंकर कठेरिया ने कहा कि सैफई हवाई पट्टी को रीजनल एयर कनेक्टविटी से जोड़ने पर यहां से दिल्ली, लखनऊ व अन्य स्थानों के लिए हवाई उड़ाने शुरू हो जाएंगी। जिससे इटावा के लोगों को तो आवागमन में सुविधा होगी ही इसके साथ ही एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, भिंड, जालौन, मैनपुरी आदि जिलों के लोगों को भी हवाई यात्रा की सुविधा मिल जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह हवाई पट्टी 1200 बीघा जमीन पर बनी है, लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। यह केवल एक परिवार के लिए ही बनकर रह गई है। इसे रीजनल कनेक्टविटी से जोड़ दिए जाने के बाद जब बड़ी संख्या में लोग हवाई यात्रा करने लगेंगे तो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे तथा आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की संख्या कम होने के साथ ही मार्ग दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

सांसद डा. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि इटावा सफारी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। ऐसी स्थिति में यदि सैफई से हवाई उड़ाने शुरू हो जाती हैं तो काफी अधिक संख्या में पर्यटक वायुमार्ग से सफारी देखने के लिए इटावा जाएंगे। इटावा में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो विकास होगा तथा लोगों को रोजगार भी मिलेगा। देश के पूर्व रक्षामंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गांव से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर स्थापित सैफई हवाई पट्टी को एयरकनेक्टीविटी से जोड़ने की दिशा मे पहल के बाबत उठाए गए। इटावा के सांसद डा.रामशंकर कठेरिया के सवाल के राजनैतिक निहतार्थ भी निकाले जा रहे है। असल में सैफई हवाई पटटी मैनपुरी संसदीय सीट के अन्तर्गत आता है जहां से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सांसद है।

लड़ाकू विमानों की हिस्सेदारी

वायु सेना के लड़ाकू विमानों की उडान के लिए देश मे सबसे मुफीद और सुरक्षित हवाई पटटी मानी गई है। पिछले साल वायुसेना का गगन शक्ति 2018 का सफलतम युद्धाभ्यास संपन हो चुका है जिसमें सैकड़ो की तादात में लड़ाकू विमानों ने हिस्सेदारी की। मुलायम सिंह यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल 2003, 2007 में जब सैफई हवाई पट्टी के विस्तारीकरण का आदेश दिया था तो उस समय विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना करते उनके फैसले पर तमाम सवाल खड़े किए थे। उस समय विपक्षी दलों ने उनके फैसले को अदूरदर्शी बताते हुए कहा था कि सैफई हवाई पट्टी पर कौन सा जम्बो जेट उतरेगा जो उसका विस्तार करके सरकारी धन को बर्बाद किया जा रहा है लेकिन अब भारतीय वायु सेना ने यह कहकर कि सैफई हवाई पट्टी लड़ाकू विमानों के टेक आफफ और लैंडिंग के लिए पूरी तरह सही और सुरक्षित है, मुलायम सिंह के फैसले को सही ठहराया है।

लड़ाकू युद्धक विमान टेक आफ और लैंडिंग कर सकेंगे

सैफई हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना ने अपने एयरबेस के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाया है। वायु सेना के सूत्रों का कहना है कि युद्ध के दौरान या अन्य आपात स्थिति में सैफई हवाई पट्टी से लड़ाकू विमान और दूसरे बड़े विमान टेक आफ और लैंडिंग करेंगे। वायु सेना के अधिकारियो का कहना है कि सैफई हवाई पट्टी से रात में भी लड़ाकू युद्धक विमान टेक आफ और लैंडिंग कर सकते हैं। इस हवाई पटटी का निर्माण मुलायम सिंह यादव ने अपने रक्षामंत्रित्वकाल मे शुरू कराया था जो 1999 मे बन कर के पूरी हुई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन इस हवाई पट्टी का नियंत्रण राज्य सरकार के पास है लेकिन अब इसको पूरी तरह से सेना के हवाले करने की रणनीति बनाई जा रही है क्योंकि वायुसेना से ने इस हवाई पटटी को देश की सबसे अपने उपयोग के लिहाल से सबसे मुफीद माना है।

एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया ने नहीं दी मंजूरी

सैफई हवाई पट्टी को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने साल अगस्त 2016 में नागरिक उड्डयन विभाग को इस आशय का प्रस्ताव भेजा गया था कि प्रदेश सरकार ने सैफई हवाई पट्टी को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है। माना यह गया था कि सैफई की स्थिति आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, रेलवे सुविधा व भूमि की उपलब्धता होने के कारण विकसित होने योग्य है। नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक को इस मामले में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर पैरवी करने को कहा था परंतु केंद्र सरकार की एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया की टीम ने दो बार सैफई हवाई पट्टी का निरीक्षण किया और इस प्रस्ताव को स्वीकृत नहीं दी।

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