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पिता की जिद ने बदली बच्चे की जिंदगी, बिना हाथ के पैरों से ही लिख दी प्रेरणा की कहानी

Karishma Lalwani

Publish: Jan 20, 2020 12:38 PM | Updated: Jan 20, 2020 12:38 PM

Etawah

- पांच साल की उम्र में अबु ने खोए अपने हाथ

- पैरों से ही लिख कर पूरी की अपनी आधी पढ़ाई

- बिना हाथों के चलाता है फर्राटेदार साइकिल

इटावा. कहते हैं इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए। मुसीबत चाहे कितनी ही बड़ी हो लेकिन अगर उसका डटकर सामना करो, तो हर राह आसान लगती है। इस बात से सबक लिया है 13 साल के अबु हजम ने। दोनों हाथों से दिव्यांग अबु हजम दोनों पैरों से पढ़ाई लिखाई सहित खाने पीने के सभी काम करता है।

पिता की जिद ने बढ़ाया हौसला

इटावा के नई बस्ती में रहने वाले अबु ने पांच साल की उम्र में 11 हजार केवीए की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ जाने अपने हाथ खो दिए थे। परिवार वालों ने इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। अबु अब सामान्य बच्चों की तरह हर काम नहीं कर सकता था। ऐसे में उसे हौसला दिया उसके पिता लइकउद्दीन ने, जिसने उसे हाथ के अभाव में पैरों से लिखने की आदत डलवाई। लिखने के अलावा अबु कम्प्यूटर भी पैरों से ही चलाता है। साथ ही बिना हाथ के कंट्रोल के फर्राटेदार साइकिल भी चलाकर स्कूल जाता है।

हादसे से पहले अबु इटावा के रॉयल ऑक्सफोर्ड इंटर कॉलेज में कक्षा एक का छात्र था। हादसे के बाद तीन माह तक उसकी घर पर देखभाल की गई। इसके बाद पिता अपने बच्चे को लेकर स्कूल पहुंचे। अबु को आम बच्चों की तरह पढ़ाने की बात कही। पिता की बात सुन स्कूल प्रबंधन पहले तो परेशान हुए क्योंकि पढ़ाई के साथ-साथ लिखना भी बहुत जरूरी है। स्कूल प्रबंधन ने अबु के पिता से बातचीत कर बच्चे को पैरों से लिखवाने की आदत डलवाने की बात कही। पिता ने भी बात मानी और यूट्यूब की मदद से अबु के पैरों में पेन थमा दिया। अबु ने लिखना शुरू किया और केवल 2 माह में ही पैरों से लिखने में माहिर हो गया। आज अबु कक्षा 7 में पढ़ रहा है और उसका सपना कंप्यूटर इंजीनियर बनने का है। अबु पढ़ाई के साथ कुरान भी पढ़ता है।

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खास साइकिल से स्कूल जाता है अबु

अबु की कंडीशन को समझते हुए उसके बड़े भाई ने उसके लिए एक खास डिजाइन की साइकिल तैयार की है। अबु इसी से स्कूल आता जाता है। साइकिल के पैडल के पास ही ब्रेक और हैंडल पर स्टेयरिंग की तरह एक हैंडल लगाया गया जो कि अबु अपने सीने के सहारे मोड़ सकता है।

विद्यालय में न कोई धर्म, न जाति का भेदभाव

अबु का हौसला बढा़ने में जितना हाथ उसके माता पिता है, उतना ही उसके दोस्तों का भी है। अबु का दोस्त ऋषभ उसे खाना खिलाता है। अबु के दोस्त छुट्टी में स्कूल बैग तक उसकी साइकिल तक उसका बैग पहुंचाते हैं। अबु की ऐसी छोटी-छोटी मदद उसके दोस्त स्कूल में करते हैं।

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