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इटावा सफारी में बनेगा प्रदेश का पहला तेंदुआ रेस्क्यू सेंटर, रेस्क्यू करके लाए गए लैपर्ड का किया जाएगा उपचार

Neeraj Patel

Publish: Sep 14, 2019 15:54 PM | Updated: Sep 14, 2019 15:54 PM

Etawah

उत्तर प्रदेश में इटावा सफारी पार्क में प्रदेश का पहला रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार करके शासन को भेज दी गई है।

इटावा. उत्तर प्रदेश में इटावा सफारी पार्क में प्रदेश का पहला रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार करके शासन को भेज दी गई है। निर्माण पर कम से कम पांच करोड़ रूपये का खर्च आने का अनुमान है। इटावा सफारी पार्क के निदेशक वी.के.सिंह ने बताया कि लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर की डीपीआर तैयार कर ली गई है। इसके लिए स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है। यह डीपीआर शासन को भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही कामकाज शुरू करा दिया जाएगा। इसमें रेस्क्यू करके लाए गए लैपर्ड का उपचार किया जाएगा और उन्हें सेहतमंद बनाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इसके निर्माण कार्य में भी ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसमें रेस्क्यू करके लाए गए लैपर्ड रखे जाएंगे और जरूरत के मुताबिक उनका उपचार भी किया जाएगा। इसके लिए सफारी के अंदर 6 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर ली गई है। इस पर 4 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां फिलहाल पांच सफारियां बनी हुई हैं, इनमें लैपर्ड सफारी भी शामिल है। अब लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है।

लैपर्ड को रखने की थी बड़ी समस्या

प्रदेश में अभी तक लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर नहीं है। यह पहला सेंटर होगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आए दिन जंगल से लैपर्ड आ जाने की घटनाएं सुनने में आती हैं। इन्हें किसी तरह रेस्क्यू करके पकड़ लिया जाता है या ये लैपर्ड खुद जंगल की ओर वापस चले जाते हैं लेकिन जो लैपर्ड पकड़े जाते हैं उन्हें कहां रखा जाए यह एक बड़ी समस्या है। फिलहाल तो इन्हें प्रदेश के जू में रख दिया जाता है लेकिन रेस्क्यू किए गए लैपर्ड के लिए एक रेस्क्यू सेंटर की जरूरत काफी समय से चली आ रही थी।

6 हेक्टेयर में बनेगा लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर

वन विभाग ने इटावा सफारी में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर बनाए जाने का निर्णय लिया है। 350 हेक्टेयर में फैली सफारी में जगह की कोई कमी नहीं है। सफारी के अंदर ही 6 हेक्टेयर जगह में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। जहां लैपर्ड सफारी पहले ही बनाई जा चुकी है। इसमें फिलहाल तीन लैपर्ड हैं। अब रेस्क्यू सेंटर बन जाने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी जो लैपर्ड पकड़े जाएंगे उन्हें रेस्क्यू करके इसी सेंटर में रखा जाएगा। चंबल इलाके में खासी तादात मे लैपर्ड पाए जाते हैं। 23 सितंबर 2017 को राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के थाना सहसों के पिपरौली गढ़िया गांव में वन विभाग की टीम ने इटावा सफारी पार्क के डा. गौरव श्रीवास्तव की अगुवाई मादा तेंदुऐ को पकड़ा गया। पकड़ने के बाद इसको इटावा सफारी पार्क मे रखा गया लेकिन 28 सितंबर को इसकी मौत हो गई। मौत का शिकार हुआ तेंदुआ शेड्यूल वन कैटागरी का था।

दो तेंदुए और एक सांभर की हुई थी मौत

डा. गौरव के अनुसार शेड्यूल वन के इस जानवर की अहमियत बब्बर शेरों की तरह होती है। 2017 के मार्च माह मे ही सहंसो इलाके के विंडवा खुर्द गांव मे 11000 बिजली लाइन से तार खींच कर खेतों की फेंसिंग की जद में आने से दुर्लभ प्रजाति के दो तेंदुए और एक सांभर की दर्दनाक मौत हो गई। पानी की तलाश में उत्तर प्रदेश के इस इलाके में प्रवेश कर जाते हैं लेकिन उनको इस बात का कतई अंदेशा नहीं था कि यहां के किसान अपने फायदे के लिए खेतों में बिजली के तारों में करंट भी प्रभावित करेंगे जिससे दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों की मौत हो जाएगी।

रेस्क्यू में पकड़े गए लैपर्ड को भेजा था इटावा सफारी

चंबल इलाके में कम से कम तेंदुए के 10 जोड़े हैं जिनको गांव वालों ने देखकर के वन अधिकारियों को जानकारी दी है। 2007 में इसी तरह जगतौली गांव के पास भी एक तेंदुए की करंट लगने से मौत हुई थी। बहराइच में जंगल से भागकर आए एक लैपर्ड ने काफी आतंक मचाया था। इसे बड़ी मुश्किल से पकड़ा जा सका था। रेस्क्यू करके पकड़े गए इस लैपर्ड को इटावा सफारी में भेज दिया गया था। इस दौरान इसके चोटें भी आई थीं। सफारी में इलाज किए जाने के बाद यह सेहतमंद हो गया है और फिलहाल सफारी में ही रहेगा।