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इन दस आसान प्वाइंट्स में समझिए कि आखिर नागरिकता संशोधन बिल पर इतना हंगामा क्यों है बरपा

Piyush Jayjan

Publish: Dec 10, 2019 08:09 AM | Updated: Dec 10, 2019 08:16 AM

Dus Ka Dum

नागरिकता संशोधन बिल 2019 को लेकर देश में सड़क से लेकर संसद तक बहस गरमाई हुई है। एक और विपक्ष इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर जबरदस्त हमलावर है। वहीं सरकार भी इस बिल को लेकर पीछे हटने का नाम नहीं ले रही हैं।

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार रात नागरिकता संशोधन विधेयक पारित हो गया। इस बिल के पक्ष में 311 वोट पड़े हैं। वहीं विपक्ष में 80 वोट पड़े हैं। लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और केंद्र सरकार के सामने सवाल रखे।

जिसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में दिया। नागरिकता संशोधन बिल (CAB) के लोकसभा से पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ की। अब यह बिल राज्यसभा में बुधवार को पेश किया जा सकता है।

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नागरिकता संशोधन बिल को लेकर देश में सड़क से संसद तक बहस छिड़ी हुई है। एक और विपक्ष इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर जबरदस्त हमलावर है। वहीं सरकार भी इस बिल को राज्यसभा में पास कराने के लिए पूरी तरह तत्पर है। आइए जानते हैं कि आखिर इस बिल में ऐसा क्या है? जिस पर इतना हंगामा क्यों बरपा है।

नागरिकता संशोधन बिल की दस बड़ी बातें-

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  • इस बिल का उद्देश्य बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों - हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।
  • इस विधेयक में मुस्लिमों समुदाय को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए विपक्ष इस बिल को भारतीय संविधान में समाहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए उसकी आलोचना की है।
  • पुराने कानून के हिसाब से किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना पड़ता है।
  • सरकार ने जो बिल पेश किया है उसमें पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह समयावधि घटाकर 6 साल कर दी गई है।
  • देश के पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी इस बिल का विरोध हो रहा है।
  • पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध इसलिए भी हो रहा है क्योंकि ये बांग्लादेश की सीमा के करीब स्थित हैं। पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
  • नए विधेयक में अन्य संशोधन भी किए गए हैं, ताकि 'गैरकानूनी रूप से भारत में घुसे' लोगों तथा पड़ोसी देशों में अत्याचारों का शिकार होकर भारत में शरण लेने वाले लोगों में स्पष्ट रूप से अंतर किया जा सके।
  • नागरिकता संशोधन विधेयक का संसद के निचले सदन लोकसभा में आसानी से पारित हो गया है। लेकिन राज्यसभा में केंद्र सरकार के पास बहुमत नहीं है, ऐसे में राज्यसभा में इस बिल का पारित हो जाना आसान नहीं होगा।
  • नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार इसमें धर्म का कोई उल्लेख नहीं किया गया। जिसकी वजह से अब बहस हो रही है।
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम का प्रस्ताव नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिए पारित किया गया था।