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रोड पर फल बेचने वाला ‘यूसुफ खान’ ऐसे बने ‘दिलीप कुमार’, कभी 3 रुपए के लिए करने पड़े थे ऐसे काम.. जानें 10 रोचक बातें

Vivhav Shukla

Publish: Dec 10, 2019 16:14 PM | Updated: Dec 10, 2019 16:14 PM

Dus Ka Dum

जब यूसुफ खान बन गए दिलीप कुमार

नई दिल्ली। बॉलीवु़ड में ‘ट्रैजेडी किंग’ के नाम से फेमस दिलीप कुमार(dilip kumar birthday) 11 दिसंबर को 97 साल के हो जाएंगे। दिलीप(dilip kumar ) का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान(mohammad yousuf khan) था लेकिन बाद में नाम बदल दिया गया और नया नाम था दिलीप कुमार। इस नाम के साथ पहचान भी मिली। दिलीप साहब के जीवन कई ऐसे किस्से हैं जिनपर फिल्म बनाई जाए तो हर किस्से पर एक फिल्म बन सकती है।ट्रैजेडी किंग’ (tragedy king) के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी दस रोचक बाते बताने जा रहे हैं।

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1- दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। उनका असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान है।

2- दिलीप के पिता का नाम लाला गुलाम सरवर था, उन्होंने फल बेचकर परिवार का गुजारा किया। दिलीप 12 बहन-भाई थे, इसलिए घर चलाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

3- जब भारत ऐर पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो दिलीप का पूरा परिवार मुंबई आ गया। आने के बाद ना तो घर बचा था ना पैसे। इसके बाद दिलीप ने पुणे के एक आर्मी क्लब में सैंडविच स्टॉल पर नौकरी करनी शुरू कर दी।

4- सैंडविच स्टॉल काम करने के लिए दिलीप को 1 रुपए रोजाना मिलते थे। लेकिन जिंदगी में अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अपने आप को इस मुकाम तक पहुंचा दिया।

5- दिलीप साहब एक बार वो अपने काम के सिलसिले में नैनीताल गए। वहां वो देविका रानी से मिले। देविका भारतीय सिनेमा इतिहास की वो पहली हीरोइन थीं, जिन्होंने ऑन स्क्रीन किस किया था। देविका ने यूसुफ को सलाह दी कि उन्हें फिल्मों में जाना चाहिए। लेकिन उस वक्त उन्होंने देविका की बात अनसुनी कर दी।

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6- देविका से मिलने के कुछ समय बाद दिलीप मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर कर रहे थे। तभी उन्हें डॉ. मसानी मिले। डॉक्टर साहब ने उन्हें देखा और वही बात बोल दी जो देविका ने बोली थी।ये बात दिलीपको अटक गई और उन्होंने देविका रानी के स्टूडियो पहुंच गए। यहां उनको नौकरी मिल गई। सैलरी थी 1250 रुपए।

7- यहां से दिलीप साहब का फिल्मी सफर शुरू हुआ। लेकिन इस वक्त तक इनका नाम दिलीप नहीं मोहम्मद यूसुफ खान था। देविका रानी को ये नाम हीरो वाला नहीं लगता था। तो उन्होंने अपने आसपास बैठे राइटरों से यूसुफ के लिए नाम सुझाने के लिए कहा।

8- साल 1944 में यूसुफ से दिलीप बने इस नए लड़के की फिल्म ‘ज्वार भाटा’ रिलीज़ हुई। लेकिन फिल्म नहीं चली। दिलीप कुमार की दूसरी फिल्म थी ‘प्रतिमा’ (1945)। ये भी फ्लॉप रही। फिर 1946 में डायरेक्टर नितिन बोस की फिल्म ‘मिलन’ आई। लीड में थे दिलीप कुमार। फिल्म हिट हो गई।

9- इसके बाद दिलीप कुमार ने 'जुगनू', 'शहीद', 'अंदाज', 'जोगन', 'दाग', 'आन', 'देवदास', 'नया दौर' और 'मुगल-ए-आजम' जैसी सुपरहिट फिल्में की। । वे 25 साल की उम्र में देश के नंबर वन एक्टर बन गए। हर जुबान पर बस एक ही नाम था। दिलीप कुमार

10-दिलीप 8 फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजे गए, इसके अलावा 19 बार फिल्मफेयर नॉमिनेशन में आए। दिलीप कुमार को दादा फाल्के अवॉर्ड, पद्मभूषण अवॉर्ड और सर्वोच्च सम्मान भी मिल चुका है। इसके अलावा, उन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्चा नागरिक सम्मान भी मि

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