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चंद्रयान 2 : विक्रम लैंडर के फेल होने की ये 10 बड़ी वजह आई सामने, नासा की ताजा तस्वीरों में हुआ खुलासा

Soma Roy

Publish: Oct 21, 2019 13:11 PM | Updated: Oct 21, 2019 13:11 PM

Dus Ka Dum

  • chandrayaan 2 : चंद्रयान 2 आर्बिटर हाई रिजोल्यूशन कैमरे से ली गई विक्रम के लैंडिंग की तस्वीरें
  • मौसम के बदलने की वजह से हुआ काफी नुकसान

नई दिल्ली। चंद्रयान 2 ( chandrayaan 2 )मिशन के सफल न होने के बावजूद इसे मुकाम तक पहुंचाने की लगातार कई कोशिशें की गई। हाल ही में नासा ने चंद्रयान 2 आर्बिटर ( orbiter ) हाई रिजोल्यूशन के जरिए ली गई एचडी तस्वीरें सांझा की है। जिसमें चंद्रयान 2 के लैंडर विक्रम की लैंडिंग की पास की फोटोज जारी की है। इसमें मिशन के फेल होने की असली वजह सामने आई है।

1.चंद्रयान 2 आर्बिटर हाई रिजोल्यूशन कैमरे से ली गई तस्वीरों में पाया गया कि जब विक्रम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा गया तब ये कुछ घंटों के लिए वहां एकदम शांत अवस्था में पहुंच गया था। उस दौरान लैंडर कोई रिस्पांस नहीं दे रहा था।

2.चंद्रयान 2 मिशन के फेल होने का एक और कारण सामने आया जिसमें देखने को मिला कि वैज्ञानिक कई कोशिशों के बावजूद विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।

3.तस्वीरों में देखा गया कि चंद्रमा की सतह के पास का मौसम बदलना भी मिशन के फेल होने का कारण बना। वहां अंधेरी रात छाने लगी थी। साथ ही वहां का तापमान लगभग 200 डिग्री सेल्सियस गिर गया था।

4.अचानक मौसम में हुए बदलाव के चलते विक्रम लैंडर वहीं अटक गया और एक हफ्ते तक एक ही जगह पड़ा रहा। इसकी तस्वीरें खींचने के लिए नासा ने उत्तरी ध्रुव से कोशिश की थी। मगर चांद के पास ज्यादा अंधेरा होने से पहले फोटोज साफ नहीं आ सकी थी।

5.हाल ही की सांझा हुई तस्वीरों में देखने को मिला कि विक्रम लैंडर चांद की सतह पर लैंड करते समय घूम गया था।

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6.तस्वीरों में देखा गया कि विक्रम के इंजन की दिशा घूमकर आकाश की तरफ हो गई है। जिसके चलते ये चांद की सतह पर ठीक तरीके से लैंड नहीं हो सका था।

7.वैज्ञानिकों के अनुसार विक्रम के लैंड होने के समय वहां प्रकाश की ठीक व्यवस्था नहीं थी। अंधेरा होने के चलते लैंडर को सतह दिख नहीं सकी थी। जिसके चलते मिशन कामयाब नहीं हो पाया।

9.चूंकि विक्रम ठीक से लैंड नहीं हो पाया, ऐसे में आरबिट के चक्कर लगाने की गति को भी धीमा किया गया है। क्योंकि जो मिशन एक साल में पूरा किया जाना था। अब ईधन की बचत के चलते इसमें सात साल लग सकते हैं।

10.मालूम हो कि नासा ने आआईआरएस को चांद की सतह पर मौजूद खनिज तत्वों का पता लगाने के लिए डिजाइन किया है।