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‘दिव्यांगों को पढ़ाना, पुण्यार्जन के समान’

Vinay Sompura

Publish: Sep 14, 2019 20:19 PM | Updated: Sep 14, 2019 20:19 PM

Dungarpur

डूंगरपुर. तपस शैक्षिक पुनर्वास एवं अनुसंधान संस्थान की ओर से राष्ट्रीय बहुदिव्यांगता जन सशक्तिकरण संस्थान, चेन्नई के सहयोग से विशेष प्रशिक्षकों की दो दिवसीय कार्यशाला शनिवार से डूंगरपुर में शुरू हुई।

‘दिव्यांगों को पढ़ाना, पुण्यार्जन के समान’
- विशेष प्रशिक्षकों की राज्य स्तरीय कार्यशाला
पहले दिन संप्रेषण पर चर्चा
डूंगरपुर. दिव्यांगजनों में सोचने और समझने की शक्ति कम होती है, उन्हें किसी बात को समझाने के लिए एक विशेष संप्रेषण की जरुरत होती है। यह संप्रेषण किस तरह का हो यह बात उनकी रूचि पर निर्भर करता है। यह बात अहमदाबाद की बाबा साहेब ओपन युनिवर्सिटी के स्पेशल बीएड विभागाध्यक्ष सहायक प्रो. निगम पंड्या ने कही। पंड्या तपस शैक्षिक पुनर्वास एवं अनुसंधान संस्थान की ओर से तपस कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन, डूंगरपुर में आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षकों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
वैकल्पिक एवं बुद्धिशील संचार के साधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा दिव्यांगजन को कोई संदेश देने या समझाने के लिए कौनसा तरीका सबसे कारगर होगा, यह जानना बहुत जरुरी है, तभी हम उसे कोई बात आसानी से समझा सकते हैं। यदि हम उन पर कोई चीज जबरदस्ती से थोपने की कोशिश करेंगे तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे। किसी संचार माध्यम से जल्दी समझता है, यह उसकी समझ और रूचि पर निर्भर करता है।
नहीं शब्द को अपनी डिक्शनरी से हटाएं
उन्होंने कहा अधिकांश शिक्षक दिव्यांगों के बारे में ये सौच बना लेते हैं यह तो सीख ही नहीं सकता, यह काम कर ही नहीं सकता तो हमें इस नहीं शब्द को अपनी डिक्शनरी से हटाना होगा, तभी हम उन्हें कुछ सीखा पाएंगे। सम्मेलन में गुजरात के पंचमाल जिले से आए दिव्यांग शिक्षक रावल राजेन्द्र कुमार व रमन भाई ने बताया अक्सर दिव्यांग विद्यार्थियों में सीखने क्षमता कम होने से सामन्य शिक्षक दुव्र्यवहार करने लगते है, जबकि प्रशिक्षित शिक्षक उनके साथ अच्छी तरह से पेश आते हैं। विजय चतुर्वेदी ने बताया कि राष्ट्रीय बहुदिव्यांगता जन सशक्तिकरण संस्थान, चेन्नई के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या बड़ी संख्या में विशेष शिक्षकों ने प्रतिभागिता निभाई।