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डूंगरपुर के हैं यह 12 ज्योर्तिलिंग, जिनके दर्शनों से होती है हर मनोकामना पूर्ण

Harmesh Kumar Tailor

Publish: Aug 29, 2019 18:13 PM | Updated: Aug 29, 2019 18:13 PM

Dungarpur

Dungarpur

डूंगरपुर के हैं यह 12 ज्योर्तिलिंग, जिनके दर्शनों से होती है हर मनोकामना पूर्ण

नरेश कलाल कोकापुर.
वागड़ को पुराणों में वाग्वर प्रदेश कहा जाता है। पौराणिक समय में इस प्रदेश में कई साधु- संतों, अवधूतों, अघोरी व शैव भक्तों ने अपनी तपस्थली बनाया। यहां पर वनवास काल में पांडवों का भी आगमन रहा। इस पुण्य धरा पर अनादिकाल से भगवान आशुतोष के महान भक्तों की भक्ति से प्रकट हुए हैं वह स्थान ज्योतिर्लिंग बन गए। लेखक राजेन्द्र पंचाल सामलिया के अनुसार इस प्रकार हैं।

डूंगरपुर के हैं यह 12 ज्योर्तिलिंग, जिनके दर्शनों से होती है हर मनोकामना पूर्ण

नरेश कलाल कोकापुर.
वागड़ को पुराणों में वाग्वर प्रदेश कहा जाता है। पौराणिक समय में इस प्रदेश में कई साधु- संतों, अवधूतों, अघोरी व शैव भक्तों ने अपनी तपस्थली बनाया। यहां पर वनवास काल में पांडवों का भी आगमन रहा। इस पुण्य धरा पर अनादिकाल से भगवान आशुतोष के महान भक्तों की भक्ति से प्रकट हुए हैं वह स्थान ज्योतिर्लिंग बन गए। लेखक राजेन्द्र पंचाल सामलिया के अनुसार इस प्रकार हैं।

1. देव सोमनाथ : डूंगरपुर से 24 किमी दूरी पर देवगांव में है। यह वागड़ का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग हैं। सौराष्ट्र में सोमनाथ की भांति यहां विशाल मंदिर स्थित हैं, जो स्थापत्य कला की दृष्टि से खासा महत्व रखता है। जिस तरह समुद्र तट पर सोमनाथ बिराजे हैं, वैसे ही यहां भी सोमनदी तट पर देव सोमनाथ विराजमान हैं।

2. गोरेश्वर महादेव: सागवाड़ा से 12 किमी दूरी पर नदी किनारे हैं। यहां आस पास मन्दिर व घाट बने हुए हैं। मल्लिकार्जुन की भांति यह ज्योतिर्लिंग वागड़ में काफी चमत्कारी रहा हैं। यह मोरन नदी में स्थित है। माना जाता है यहां पांच शिवलिंग थे। इसमें अब एक ही बचा है। इस स्थान पर विभिन्न प्रकार के रोगी बाधा लेकर ठीक हो जाते है।

3. सिद्धनाथ ठाकरड़ा :यह सागवाड़ा के पश्चिम में डूंगरपुर मुय मार्ग से थोड़ा अंदर ठाकरडा गांव हैं जो भगवान शिव का आशीर्वाद स्वरूप पुत्र प्राप्ति जैसी मनोकामना पूरी करता हैं। यह महाकालेश्वर की भांति हर मनोकामना पूरी करता हैं। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में देश के मध्य में महाकालेश्वर हैं वैसे ही ये डूंगरपुर जिले के मध्य में हैं।

4. क्षीरेश्वर महादेव : सागवाड़ा के समीप यह खडग़दा - अंबाडा के पास स्थित निरंजनी अखाड़े के साधुओं का गढ़ स्थल रहा हैं, यह प्रसिद्ध मंदिर ओंकारेश्वर की भांति दर्शनीय स्थान हैं। यह भी मोरन नदी के तट पर प्राचीन मठ और प्राकृतिक सुंदरता देखने लायक है,जंगल के बीचों-बीच स्वयभू क्षीरेश्वर महादेव का ***** स्थित हैं। यह बीच में कटा हुआ दो भागों में बंटा है ।
5 पाडली गुजरेश्वर : यह विकासनगर से पूर्व दिशा में प्रसिद्ध मंदिर हैं। यह डूंगरपुर-धबोला सडक़ पर पाडली गुजरेश्वर गांव में स्थित हैं। आदिवासियों के लिए यह मंदिर विशेष आराध्य है यहां विशाल कल्पवृक्ष हैं। इसकी तुलना नागेश्वर से कर सकते हैं। एकांत स्थान में स्थित यह ज्योतिर्लिंग अपने आप मे विशेष है।

6 . भुवनेश्वर महादेव : यह डूंगरपुर से लगभग 15 किमी पश्चिम दक्षिण में बिछीवाड़ा रोड पर छोटे से गांव की मुय सडक़ पर पहाड़ी की गोद में स्थित श्री वैधनाथ महादेव के सदृश्य अति प्राचीन मंदिर हैं यहां हमेशा दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता हैं। मान्यता है यह ***** हर वर्ष अपने आकार में बढ़ता है।

7. कटकेश्वर महादेव - यह मंदिर आसपुर तहसील के कतीसोर गाँव के पास स्थित हैं यहां विशाल मंदिर व परिसर हैं तथा सामने श्मशान घाट हैं, यहाँ जाने पर आपको भीमाशंकर महादेव के दर्शन का लाभ मिलता हैं। इस मंदिर का शिवलिंग भी स्वयंभू हैं।

8 . गामड़ी देवकी : डूंगरपुर में गामड़ी देवकी के महादेव के स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करना त्र्यबकेश्वर ज्योतिलिंग के दर्शन करने के समान हैं, इस मंदिर में देवाधिदेव महादेव साक्षात विराजमान हैं, इनके दर्शन से पाप, ताप व संताप का तुरन्त शमन हो जाता है।

9. सलारेश्वर पीठ : यह डूंगरपुर के सीमलवाड़ा तहसील के पीठ कस्बे में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, श्री घुश्मेश्वर महादेव की भांति इसकी महिमा अपरंपार हैं । यहां वागड़ और राजस्थान से ही नहीं बल्कि गुजरात से भी काफी दर्शनार्थी आते हैं। हाल ही के वर्षों में इसका जीर्णोद्धार करके भव्य मंदिर बनाया गया हैं।

10. जेतोलेश्वर ओड : केदारनाथ की भांति पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर गुप्त था। विगत 5-7 वर्षों में खासा प्रसिद्ध हुआ । जो पाडवा और सागवाड़ा के बीच ओड गाँव के पूर्व में 2 किमी दूरी पर हैं।

11 . बेणेश्वर महादेव - संत मावजी के धाम पर स्थित यह मंदिर काशी विश्वनाथ की भांति पहा?ी पर त्रिवेणी संगम पर स्थित हैं। इसके दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता हैं। यह स्थान वागड़ का वाराणसी है यहां सभी देवी देवताओं के मंदिर है।

12 . बोरेश्वर महादेव : यह डूंगरपुर के अंतिम छोर में बांसवाड़ा की सीमा पर नदी के पास स्थित हैं। यहां का रमणीय वातावरण और महादेव की ***** के दर्शन कर लगता हैं, यहाँ भगवान राम ने सेतु बन्ध हेतु इसे स्थापित किया हो इस मन्दिर का जीर्णोद्धार एक लोहार ने करवाया था यही पास में टोरेश्वर महादेव है जहां गुफा भी है मान्यता है की गौतम ऋषि ने यहाँ तपस्या की थी वही से गौतमेश्वर चले गए थे ।

वागड़ के इन 12 स्थानों के दर्शन के बाद देश के बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने जैसा अनुभव होता है यह अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभूति है । इसके अलावा भी डूंगरपुर में कई मन्दिर स्वयभू है जैसे - सागवाड़ा में गमलेश्वर महादेव, सामलिया में बेणेश्वर महादेव, सरोदा में नीलकंठ, माल में खंडेश्वर, भीलूड़ा में नीलकंठ , सोम कमला आबा बांध पर सोमेश्वर महादेव, चीतरी में सिद्धेश्वर, पादरड़ी बड़ी में सोमनाथ महादेव, ओबरी में धात्रेश्वर, घोटाद में नीलकंठ महादेव आदि।