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गैंगरेप कांड के 11 आरोपी दोषी करार, 10 जून को सुनाई जाएगी सजा

Prateek Saini

Publish: Jun 07, 2019 20:41 PM | Updated: Jun 07, 2019 20:41 PM

Dumka

अनुसंधान कर्ता ने इस केस में साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली थी...

(दुमका): दुमका के द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार की अदालत ने दुमका के दिग्घी में रिंग रोड के पास दो वर्ष पूर्व हुए गैंगरेप कांड में कोर्ट ने 11 आरोपियों को दोषी करार दिया है। सभी दोषियों को 10 जून को अदालत सजा सुनाएगी। सामूहिक दुष्कर्म की यह घटना 6 सितम्बर 2017 की देर शाम श्रीअमड़ा मोड़ से ग्राम दिग्घी जाने वाली सड़क से कुछ दूरी पर स्थित एक सुनसान मैदान में हुई थी।

 

19 वर्षीय पीड़िता अपने ब्वॉय फ्रेंड के साथ घूमने के लिए गई थी और शाम करीब 7 बजे लौट रही थी। इसी दौरान चार-पांच लड़कों ने दोनों को घेर लिया। चार हजार रुपया और मोबाइल यह कह कर मांगा कि तुम लोग गलत काम करने आए हो। पीड़िता और उसके दोस्त के साथ मारपीट की। फोन कर बुलाने पर पहले स्कूटी से दो-तीन लड़के वहां पहुंचे। इधर पैदल और बाइक से 10-12 अन्य लड़के भी पहुंचे। सभी ने पीड़िता और उसके दोस्त को घेर लिया था। इसके बाद एक-एक लड़के ने पीड़िता के साथ रेप किया था।


पीड़िता के बयान पर दुमका मुफस्सिल थाना में भादवि के धारा 323, 341, 342, 387, 376(डी), 504, 506, 201/ 34 के तहत प्राथमिकी (कांड संख्या 97/17) दर्ज की गई थी जिसमें 8 युवकों दानियल, अनिल, सूरज, सदाम, शहबाज, कुर्बान, इमरान और जियाउल को नामजद आरोपी बनाया गया था। 8 सितम्बर 2017 को पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इन 16 आरोपियों में से 11 अभियुक्तों का मामला स्पीडी ट्रायल के तहत द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अदालत में चल रहा था,जबकि पांच अभियुक्तों का मामला जेजेबी में चल रहा था।

 

तत्कालीन एसपी मयूर पटेल कन्हैयालाल ने घटना की जांच और मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया था जिसमें तत्कालीन डीएसपी मुख्यालय अशोक कुमार सिंह, थाना प्रभारी मुफस्सिल विनय सिन्हा, नगर थाना प्रभारी इस्पेक्टर मनोज ठाकुर को रखा गया था। गैंगरेप की घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र में हुई थी जबकि इस केस के अनुसंधान कर्ता दुमका नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर को बनाया गया था। पुलिस ने घटनास्थल से एक स्कूटी, पीड़िता के कपड़े, हेयरपिन, चाकू और साक्ष्य के लिहाज से कई अन्य सामानों को बरामद किया था। अनुसंधान कर्ता ने इस केस में साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली थी।