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chronic myeloid leukemia - तेजी से फैलती हैं ब्लड कैंसर की कोशिकाएं

Yuvraj Singh Jadon

Publish: Sep 06, 2019 14:19 PM | Updated: Sep 06, 2019 14:19 PM

Disease and Conditions

किसी व्यक्ति के खून में जीन 9 व 22 की अदला-बदली हो जाती है तो उसे क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकीमिया रोग हो जाता है।

क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकीमिया ( chronic myeloid leukemia ) ब्लड कैंसर ( Blood Cancer ) का एक प्रकार है जो किसी व्यक्ति के खून में जीन 9 व 22 की अदला-बदली से होता है। इससे बोनमैरो में रक्त कोशिकाएं असंतुलित हो जाती हैं और सफेद रक्त कोशिकाओं (डब्लयूबीसी) की संख्या बढ़ जाती है। चूंकि खून शरीर के सभी हिस्सों में जाता है, ऐसे में इसके साथ बेकाबू रूप से बढ़ी हुई कोशिकाएं स्वस्थ सेल्स को भी प्रभावित करती हैं। यही क्रॉनिक मायलॉइड ल्यूकीमिया है। युवाओं व बुजुर्गों को यह ज्यादा होता है।

इस बीमारी का पता कैसे चलता है?
प्रारंभिक अवस्था में इसके कोई खास लक्षण सामने नहीं आते हैं। सामान्य लक्षणों में थकान रहना, खून की कमी, अचानक वजन घटना, बार-बार बुखार आना, पसीना ज्यादा आना, भूख न लगना या थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना या पेट फुलाव आदि हैं। रोग की पहचान के लिए डॉक्टरी सलाह से ब्लड टैस्ट करवाना चाहिए। साथ ही बोनमैरो की बायोप्सी जांच से भी इसका पता चल जाता है।

इसका असर कब होता है? इसकी स्टेज क्या हैं?
यह रोग धीरे-धीरे असर दिखाता है। अन्य कैंसर की तरह इसकी भी कई स्टेज हैं। पहली स्टेज शुरुआत के ३-४ साल बाद दिखती है। दूसरी में कैंसर तेजी से बढ़ता है और तीसरी में स्थिति बेकाबू हो जाती है। जब रक्त की कोशिकाएं असंतुलित होकर पूरे शरीर में घुमती हैं तो स्थिति गंभीर हो जाती है।

बीमारी के मुख्य कारण क्या हैं?
तिल्ली या लिवर का आकार बढ़ने, रेडिएशन, प्रदूषण, बैक्टीरिया वाले भोजन से जीन खराब और रक्तकोशिकाएं प्रभावित होती हैं।

इससे बचने के उपाय क्या हैं?
शुरुआती स्टेज में जांचों से रोग पर काबू पा सकते हैं। ऐसे में इसे डायबिटीज, बीपी की तरह रोज मात्र एक गोली लेने से ही कंट्रोल कर सकते हैं। कीमोथैरेपी व बोनमैरो ट्रांसप्लांट भी करा सकते हैं।