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दीवारी रेत खदान पर एक करोड़ बकाया, फिर भी दे दिया ठेका

Rajkumar Yadav

Publish: Oct 17, 2019 10:28 AM | Updated: Oct 16, 2019 22:30 PM

Dindori

स्कूल के सामने से गुजरते हैं रेत लोड भारी वाहन

डिंडोरी. खनिज विभाग में बैठे अधिकारी कर्मचारियों की मेहरबानी से रेत कारोबारियों की चांदी कट रही है। इसी मेहरबानी की बानगी है कि एक करोड़ रुपए का बकायदार होने के बाद भी उसी ठेकेदार को फिर से दीवारी रेत खदान का ठेका दे दिया गया। यह रेत खदान प्रारंभ भी हो गई है। उल्लेखनीय है कि पहले से ही रेत के कारोबार की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई थी। बारिश में खदान में एकत्रित रेत को देख कारोबारी से रहा नहीं गया और ठेकेदार के इशारों पर मंगलवार की शाम से खदान प्रारम्भ कर दी गई। लेकिन खदान कैसे प्रारम्भ हुई यह जांच का विषय है। सूत्रों के मुताबिक उक्त कारोबारी पर शासन का लगभग एक करोड़ बकाया है।
शेष हैं तीन किश्तें
बताया जा रहा है कि ठेकेदार द्वारा 1 अप्रैल को खदान समर्पण करने आवेदन प्रस्तुत किया गया था। लेकिन खदान समर्पण नहीं हुई। ऐसी स्थिति में बारिश में बहकर एकत्रित हुई अथाह रेत देख कारोबारी की नजरें इनायत एक बार पुन: हुई। जबकि इस दौरान ठीकेदार पर 3818750 रुपये की तीन किश्तें भी शेष हैं जिन्हे ठेकेदार ने जमा नहीं की। ऐसे में खनिज विभाग की मंशा समझ से परे है।
आखिर मेहरबानी क्यो
प्रमुख सचिव के आदेश का हवाला देने वाले और राज्य सरकार के खजाने में इजाफा करने का दंभ भरने वाले खनिज विभाग के अधिकारी अब तलक कमको मोहनिया रेत खदान से शासन को होने वाला लाभ दर्शाने में नाकाम रहे हैं। इसके बाद दिवारी रेत खदान ठेकेदार पर करोड़ो रुपए बकाया होने के बाद भी फिर से खदान प्रारंभ किया जाना समझ से परे है।
पानी उतरते ही तैयार होगा रेम्प
जानकारों की माने तो अभी कारोबारी द्वारा नदी के इर्दगिर्द से रेत एकत्रित की जा रही है और अब शीघ्र ही नदी का प्रवाह थमते ही नदी कि बीचों बीच रेम्प तैयार कर दिया जायेगा। जिसमे आसपास से अवैध खनन कर हजारों घन मीटर मिट्टी मुरुम और बोल्डर के नाम पर मलबा ढोया जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़
ठेकेदार द्वारा खदान तक पहुंच मार्ग बनाने के लिये प्राथमिक स्कूल के मैदान के बीचों बीच सड़क तैयार कर दी है। जहां से हर रोज सैकड़ों डंपरों का गुजरना होता है। बताया जा रहा है कि सड़क के दूसरी ओर बच्चों के लिये शौचालय बने हुये है। जहाँ खतरों से भरा रास्ता पार कर ही जाना पड़ता है। उक्त मामला भी प्रशासन के संज्ञान में है। बावजूद इसके इस ओर सुधार करने की जहमत आज तलक किसी अधिकारी ने नहीं उठाई।
विवादित है कार्यप्रणाली
खनिज विभाग में बैठे अधिकारी कर्मचारियों की कार्य प्रणाली शुरु से ही विवादित रही है। उन पर चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने के आरोप प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। राज लक्ष्मी कंास्ट्रक्शन, दीवारी रेत खदान और अन्य कंपनियाँ जिन्होंने अवैध रूप से क्रेशरों का संचालन कर रखा है उन्हे प्रश्रय देने में कोई कोर कसर नहीं छोंड़ी जा रही है।
इनका कहना है .
शासन के निर्देशानुसार खदान की अनुमति दी गई है।
सुनील उइके, खनिज अधिकारी डिंडोरी