स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

नाबालिग चला रहे वाहन, आफत में जान

mahesh gupta

Publish: Sep 20, 2019 10:44 AM | Updated: Sep 20, 2019 10:44 AM

Dholpur

चंबल नदी देखने जा रहे बाइक सवार दो स्कूली छात्रों की मौत के बाद भी धौलपुर का जिला प्रशासन नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए कोई भी पहल करता नजर नहीं आ रहा है।

चंबल नदी के मोड़ पर बाइक सवार स्कूली छात्रों की मौत के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
धौलपुर. चंबल नदी देखने जा रहे बाइक सवार दो स्कूली छात्रों की मौत के बाद भी धौलपुर का जिला प्रशासन नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए कोई भी पहल करता नजर नहीं आ रहा है। आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे धौलपुर की सडक़ों पर नाबालिग वाहन चालकों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। यातायात विभाग की अनदेखी से अभिभावक भी बच्चों को बाइक की चाबी देने में जरा भी संजीदगी नहीं दिखा रहे। वहीं, दोपहिया वाहन पर तीन-तीन, चार-चार लोग भी धड़ल्ले से बैठकर यातायात नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
शहर की विभिन्न कालोनियों सहित हाइवे पर भी अक्सर नाबालिग फर्राटे से दोपहिया वाहन दौड़ाते देखे जा सकते हैं। इन नाबालिगों को न तो यातायात नियमों की जानकारी होती है और न ही दुर्घटना होने का भय। ये जितनी तेजी से वाहन चला सकते हैं उतनी तेजी से चलाते गुजर जाते हैं। काफी रफ्तार से इन्हें वाहन चलाता देख लोग सहम जाते हैं और दुर्घटना होने की आशंका से कांप भी जाते हैं।
अभिभावक हैं जिम्मेदार
नाबालिग वाहन चालकों पर अक्सर कार्यवाही की जाती है। इसमें माता-पिता की भी विशेष भूमिका होती है कि वो अपने बच्चों को तय उम्र से पहले वाहन की चाबियां ना पकड़ाएं और नाबालिग चालक अपनी और दूसरों की जान से खिलवाड़ ना करें। लोगों का कहना है कि नाबालिगों के तेज गति से वाहन चलाने के लिए उनके अभिभावक भी जिम्मेदार हैं। नाबालिगों को बाइक अथवा कार की चाबी सौंपते समय उन्हें सोचना चाहिए कि उनका बच्चा अभी वाहन चलाने योग्य हुआ है या नहीं। साथ ही उसकी उम्र ड्राइङ्क्षवग लाइसेंस बनवाने की हुई है या नहीं। देश में 18 वर्ष की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए ड्राइङ्क्षवग लाइसेंस बनाने का कानून है। लेकिन इस कानून की धज्जियां रोज उड़ाई जाती हैं। कई विद्यालयों में पढऩे वाले नाबालिग छात्र-छात्राएं अक्सर दोपहिया वाहन से विद्यालय आते-जाते हैं। लोगों का कहना है कि विद्यालय प्रशासन को भी ऐसे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को उन्हें वाहन न चलाने देने की सलाह देनी चाहिए।
भारी वाहन भी चलाते हैं नाबालिग
ऐसा नहीं है कि नाबालिग केवल बाइक या कार चलाते देखे जाते हैं। कई नाबालिगों को तो अक्सर ट्रैक्टर व ट्रक भी चलाते देखा जाता है। इनमें सबसे ज्यादा तादाद ट्रैक्टर चलाने वालों की है। कई बार ये अनुभवहीन चालक दुर्घटना का कारण भी बनते हैं।
सख्त नियमों की हो पालना
लोगों का कहना है कि नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकने के लिए अभी तक कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया है। इसी का फायदा उठाकर नाबालिग वाहन चलाते हैं और दुर्घटना का कारण बनते हैं। लोगों ने प्रशासन से नाबालिगों के वाहन चलाने के विरुद्ध सख्त नियम बनाने के साथ इनके वाहन चलाने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। एक ओर क्षेत्र के आलाधिकारी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियमित जांच की बात करते हैं लेकिन क्षेत्र की सडक़ों में जिस प्रकार नाबालिग वाहन चलाकर फर्राटा भरते हैं उसे रोकने की कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। यही वजह है कि बिना लाइसेंस के भी ऐसे नाबालिगों को भी सडक़ पर वाहन चलाते देखा जा सकता है। वहीं कुछ वाहन चालक वाहन चलाते समय मोबाईल कान में लगाकर एक हाथ से ही गाड़ी चलाते हैं जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।