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राहत कार्यों का जायजा लेने पहुंचे राहत सचिव

mahesh gupta

Publish: Sep 20, 2019 11:34 AM | Updated: Sep 20, 2019 11:34 AM

Dholpur

करौली-धौलपुर सांसद डॉ. मानोज राजोरिया ने धौलपुर जिले के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने आए आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग के सचिव आशुतोष पेडणेकर के साथ सर्किट हाउस में प्रशासन द्वारा किए जाने वाले राहत कार्यों की समीक्षा की। सांसद ने कहाकि बाढ़ पीडि़तों के लिए भाजपा कार्यकत्र्ता भी राहत कार्यो में लगे हंै। प्रशासन भी उनके साथ सामजस्य कर राहत कार्यो में मदद कर सकते है।

जिला प्रमुख ने दिया ज्ञापन
धौलपुर. करौली-धौलपुर सांसद डॉ. मानोज राजोरिया ने धौलपुर जिले के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने आए आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग के सचिव आशुतोष पेडणेकर के साथ सर्किट हाउस में प्रशासन द्वारा किए जाने वाले राहत कार्यों की समीक्षा की। सांसद ने कहाकि बाढ़ पीडि़तों के लिए भाजपा कार्यकत्र्ता भी राहत कार्यो में लगे हंै। प्रशासन भी उनके साथ सामजस्य कर राहत कार्यो में मदद कर सकते है।
धौलपुर पैलेस स्थित भाजपा कार्यालय पर सांसद ने बताया कि चम्बल में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ता भी राहत कार्यों में हाथ बंटा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में भोजन-पानी की व्यवस्था तथा चिकित्सा कार्यों में भी पार्टी कार्यकर्ता मदद कर रहे हैं। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष बहादुर सिंह त्यागी, धौलपुर विधायक श्रीमती शोभारानी कुशवाह, पूर्व मंत्री जगमोहन बघेल, जिला प्रमुख डॉ. धर्मपाल सिंह, भाजपा नेता अशोक शर्मा, शरीफ खान एवं अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
राजाखेड़ा. जिले के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के बुधवार से दौरे पर आए आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग के सचिव आशुतोष पेडणेकर से जिला प्रमुख ने धौलपुर के सर्किट हाउस में भेंट कर प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों को अपर्याप्त बताते हुए मांग पत्र सौंपा।
जिला प्रमुख ने बताया कि राजाखेड़ा उपखंड की अर्थव्यवस्था कृषि और पशुपालन आधारित है जो बाढ़ से पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुकी है। उन्होंने सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की है कि सभी कृषकों को उनके राशन कार्ड के अनुसार न्याय संगत फसल का मुआवजा दिलाया जाए। बाढ़ से ग्रामीणों के आवासों और घरेलू सामान को भी भारी क्षति हुई है, उसका भी सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाया जाए।
पशुओं के लिए भी बाढ़ के बाद चारे की उचित व्यवस्था की जाए जिससे दूध की आय से वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। बाढ़ के पानी से खेतों में भरे चम्बल रेता को खाली कर बेचने की अनुमति संबंधित कृषकों को दी जाए और पुलिस उत्पीडऩ से बचाया
जाए। पशुओं की हानि का सर्वे कराकर उसका भी मुआवजा देने की मांग की गई है।