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नगरपरिषद दो माह में पकड़े बंदर, अन्यथा...

mahesh gupta

Publish: Aug 23, 2019 11:29 AM | Updated: Aug 23, 2019 11:29 AM

Dholpur

स्थायी लोक अदालत ने एक प्रकरण में नगरपरिषद को दो माह में बंदर पकडऩे तथा उन्हें वन क्षेत्र में छोडऩे के आदेश दिए हैं। अगर दो माह तक भी बंदरों को पकडकऱ नहीं छोड़ा गया तो इसके बाद प्रतिदिन एक हजार रुपए का हर्जाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराना होगा।

धौलपुर. स्थायी लोक अदालत ने एक प्रकरण में नगरपरिषद को दो माह में बंदर पकडऩे तथा उन्हें वन क्षेत्र में छोडऩे के आदेश दिए हैं। अगर दो माह तक भी बंदरों को पकडकऱ नहीं छोड़ा गया तो इसके बाद प्रतिदिन एक हजार रुपए का हर्जाना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराना होगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहायक प्रशासनिक अधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि प्रार्थी सारांश अग्रवाल पुत्र अशोक अग्रवाल निवासी हलवाई खाना कोठी, धौलपुर ने एक परिवाद नगर परिषद् के विरुद्ध स्थाई लोक अदालत में पेश किया था। इसमें बताया कि उनके मोहल्ले एवं कचहरी परिसर में बंदरों का आतंक बना है। बंदर आए दिन किसी न किसी व्यक्ति को चोटिल कर रहे हैं।
इस पर प्रार्थी सारांश अग्रवाल व अप्रार्थी के अधिवक्ताअशोक कुमार सक्सेना की उपस्थिति में स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्ता तथा सदस्य कुबेर सिंह शर्मा, इरफान दाऊदी ने प्रार्थी का प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए नगर परिषद को आदेश दिया कि वह निर्णय तारीख 22 अगस्त से 2 माह के भीतर धौलपुर शहर से बंदरों को पकड़वाकर वन क्षेत्र में छुड़वाए। इसके लिए नगर परिषद् चाहे निविदा प्रपत्र जारी करे अथवा जिला प्रशासन का सहयोग लें। धौलपुर शहर के बंदरों को पकड़वाकर वन क्षेत्र में भिजवाएं। यदि परिषद ऐसा करने में असफल रहता है तो अवार्ड के निष्पादन के अतिरिक्त दो माह बाद नगरपरिषद प्रतिदिन के हिसाब से एक हजार रुपए बतौर हर्जाना विधिक सेवा प्राधिकरण धौलपुर में जमा कराएगा।