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भारतीय संस्कृति में मांसाहार निषेध और ये कह रहे बच्चों को अंडे परोसो

Shyam Kumar Awasthi

Publish: Dec 01, 2019 00:09 AM | Updated: Dec 01, 2019 00:09 AM

Dhar

अंडे का फंडा

मध्यान्ह भोजन में अंडे के वितरण के तुगलकी फरमान को वापस लेने के लिए राज्यपाल व सीएम के नाम सौंपा आवेदन

बदनावर. आंगनवाड़ी केंद्रों पर मध्याह्न भोजन में बच्चे को अंडे वितरण करने के शासन के निर्णय के खिलाफ शनिवार को शाकाहार समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। सभामंच से रैली निकाली, विरोध में जमकर नारेबाजी की। शाकाहारी समाज के लोग हाथों में विरोध की तख्तियां लेकर चल रहे थे।
नगर भ्रमण के बाद बस स्टैंड पर नायब तहसीलदार मनीष जैन एवं रवि शर्मा को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम आवेदन सौंपा गया। आवेदन में बताया कि भारतीय संस्कृति में मांसाहार निषेध है। आंगनवाड़ी एवं प्राथमिक शालाओं में जहां जीवन निर्माण की शुरुआत होती है, वहां बच्चे को मध्याह्न भोजन में अंडा देने का प्रयास भारतीय संस्कृति विरोधी होकर शाकाहार संस्कृति पर कुठाराघात है। संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार में हस्तक्षेप का प्रयास है। बच्चे क्या खाएंगे इसका निर्णय लेने का अधिकार माता-पिता को है। शासन को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि एक शाकाहारी बच्चे को अंडा परोस कर मांसाहार के गर्त में धकेला जाए। यह तुगलकी निर्णय शाकाहार समाज की संस्कृति को भ्रष्ट करने वाला है। शासन ने किसी भी पालक वर्ग से रायशुमारी कर यह निर्णय नहीं लिया है। आवेदन में तुलगकी निर्णय वापस नहीं लेने की दशा में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। संचालन ओम पाटोदी ने किया। वाचन विजय बाफना ने किया। आभार महेंद्र सुंदेचा ने माना।

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