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कानून कहता है बच्चे नहीं चला सकते गियर वाली गाडिय़ां

atul porwal

Publish: Sep 20, 2019 11:27 AM | Updated: Sep 20, 2019 11:27 AM

Dhar

बेरोकटोक दौड़ रही गाडिय़ों पर आरटीओ की नजर नहीं, ट्रेफिक पुलिस भी बेखबर

धार.
बगैर गियर की गाडिय़ों को देखते हुए दो साल पहले सरकार ने एक प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें 16 से 18 वर्ष की उम्र वाले बच्चों का ऑटोमेटिक की 100 सीसी गियर वाली गाडिय़ों के लायसेंस देना तय हुआ था। बड़ी पेचिदगियों के बावजूद यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पाया। अलबत्ता बगैर गियर वाली 50 सीसी की गाडिय़ों के लायसेंस देना जारी रहा। हालांकि जिलेभर में अवस्क युवा बेधडक़ गियर वाली गाडिय़ां दौड़ा रहे, जिनमें से अधिकांश के पास कोई लायसेंस नहीं है। अवयस्क बच्चों में ट्रेफिक सेंस नहीं होने के कारण सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। वर्ष 2016 में सडक़ दुर्घटनाओं के 2078 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2017 में लगभग 1900 प्रकरण दर्ज हुए थे। इन दो वर्षों में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या करीब 895 रही, वहीं घायलों की संख्या का आंकड़ा भी लगभग 4800 तक पहुंच गया था। बावजूद इसके ना तो आरटीओ अवयस्कों द्वारा दौड़ाई जा रही गियर और आटोमैटिक गियर वाली गाडिय़ों पर नजर दौड़ रहे हैं और ना ही ट्रेफिक पुलिस इन पर पाबंदी लगा पा रही है। यही कारण है कि अवयस्क बेकाबू होकर गाडिय़ां दौड़ाते नजर आ रहे हैं।
1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक धार जिले में 16 से 18 वर्ष की उम्र वाले बच्चों को जारी किए गए लायसेंस की संख्या सैंकड़े में भी नहीं थी, जबकि इससे अधिक संख्या में बच्चे दो पहिया के अलावा चार पहिया गाडिय़ां दौड़ते नजर आ रहे हैं। इन पर कार्रवाई के लिए न केवल आरटीओ बल्कि ट्रेफिक के साथ स्थानीय पुलिस तैनात है, लेकिन कोई इस पर गंभीर नजर नहीं आया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार वर्ष 2016 व 2017 में नाबालिग बच्चों द्वारा गाड़ी दौड़ाने पर एक भी प्रकरणर दर्ज नहीं हो सका, जबकि आज भी शहर ही नहीं ग्रामीण सडक़ों पर अवयस्क बच्चे गियर और ऑटो गियर वाली गाडिय़ों पर फर्राटे भर रहे हैं। हालांकि सडक़ दुर्घटनाओं के मामलों में कई कारण शामिल है, लेकिन धार शहर की सडक़ों पर तेज आवाज के साथ अंधगति से दौड़ रही दो पहिया गाडिय़ां दुर्घटनाओं का प्रमाण दे रही हैं। आदर्श सडक़ पर दौड़ रहे अवयस्क चालकों की धरपकड़ के लिए कई बार पुलिस ने जाल बिछाया, लेकिन हर बार असफल रही और कभी कोई पकड़ में भी आया रहम पर छूट गया।

बड़ों के पास भी नहीं लायसेंस
कई वयस्क चालक ऐेसे भी हैं, जिनकी आधी उम्र निकल गई गाड़ी दौड़ाते, लेकिन अब तक उनके पास लायसेंस नहीं है। जिलेभर में दो से लेकर चार पहिया व ट्रेक्टर, ट्रक आदि वाहनों की पंजीयन संख्या 7 लाख से अधिक है, जबकि दो, चार पहिया के अलावा हैवी ड्रायविंग लायसेंस मिलाकर कुल संख्या 20 हजार 803 है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि पंजीकृत वाहनों के बनिस्बद लायसेंस की संख्या कम होने से बाकी बगैर लायसेंस गाडिय़ां दौड़ा रहे हैं।

स्कूल वालों को निर्देशित करेंगे
नाबालिग बच्चों द्वारा गियर और ऑटो गियर वाली गाडिय़ां दौडऩे पर कड़े प्रावधान है। इसमें ना केवल बच्चे बल्कि उनके पालकों पर भी कार्रवाई हो सकती है। पहले चरण में हम स्कूल वालों को निर्देशित करेंगे कि उनके यहां आने वाले बच्चों को गाडिय़ां लाने से मना करे। वहीं पालकों को भी सूचित करें कि वे अपने बच्चों को गियर और आटो गियर की गाडिय़ां ना दे।
-विक्रमसिंह कंग, आरटीओ धार