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शिक्षिका ने सजाई क्लास, पाठ्य पुस्तकों की पढ़ाई के साथ दे रहीं मौलिक ज्ञान

Shyam Kumar Awasthi

Publish: Nov 24, 2019 23:09 PM | Updated: Nov 24, 2019 23:09 PM

Dhar

शासकीय प्राथमिक स्कूल ग्राम डोल
खुद आती है हेलमेट पहनकर, बच्चों को भी कहती- अपने पापा से कहना हेलमेट पहनकर ही बाइक चलाएं

अंतिम कुमार सिटोले
गुजरी. समीपस्थ ग्राम डोल मे सुंदर व आकर्षक कक्षाएं, स्वच्छ वातावरण व मनोरंजक शिक्षण माहौल, टाई-बेल्ट सहित स्कूल यूनिफॉर्म यह दृश्य किसी महंगे निजी स्कूल का नहीं बल्कि एक शासकीय प्राथमिक स्कूल में दिखाई देता हैं। मामला विकासखण्ड के शासकीय प्राथमिक स्कूल ग्राम डोल का है । यहां की शिक्षिका द्वारा कुछ ऐसा कार्य किया जा रहा हैं, जो हर शासकीय स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है ।
यह स्कूल की शिक्षिका अनिता भार्गव का काम है। भार्गव द्वारा ना सिर्फ अपने स्कूल की कक्षाओं को कुछ विभाग व कुछ स्वयं के खर्चे से आकर्षण सजाया गया है । बल्कि निजी महंगे स्कूलों जैसी शिक्षा भी प्रदान की जा रही है । स्कूल देखकर कहीं नहीं लगता कि वह एक शासकीय स्कूल है ।
स्कूल है आकर्षण का केंद्र : स्कूल में पेपर कटिंग, रंगों की सजावट, चित्रकला, हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमालाएं, महापुरुषों के छायाचित्र, बच्चों की दो रंगो में यूनिफार्म, टाई, बेल्ट, आईडी कार्ड सहित प्राइमरी स्तर की शिक्षा के सभी पहलू स्कूल की कक्षाओं में इस तरह से सजाए गए हैं कि अध्यनरत बच्चे भी शिक्षण कार्य में पूरी तरह से तल्लीन हो गए हैं । शिक्षिका का कहना है कि उनके इस प्रयास के बाद शायद ही ऐसा कोई दिन होता होगा जब कोई बच्चा स्कूल आने से वंचित होता होगा । बल्कि सभी बच्चे स्कूल आने के लिए लालायित रहते हैं । शिक्षिका अनिता भार्गव सहित शिक्षक करण चावरे व करण सिंगारे के अनुसार उनके द्वारा बच्चों को पाठ्य पुस्तकों के साथ ही मौलिक, सामाजिक और मनोरंजनात्मक शिक्षा भी दी जा रही है । ताकि बच्चे विषयवार शिक्षा अध्यन कर बोर न हों और उनका मन भी स्कूल आने व पढ़ाई में लगा रहे हैं । शिक्षिका सभी शिक्षण कार्य को एक्टीविटी करके सिखाती व पढ़ाती है। कारण यहीं है कि एक बार में ही बच्चों को सब समझ आता है व याद भी हो जाता है । शिक्षिका के शिक्षण कार्य को देखने कोई न कोई स्कूल आता रहता है। जो यह सब देखकर शिक्षिका के जुनून और प्रयासों की सराहना करते थकता नहीं है ।
अधिकारियों का है यह मानना
इधर शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का भी मानना है कि भार्गव का अध्यापन कार्य को कुछ अलग व मनोरंजनात्मक बनाने के प्रयास उसे वर्षो के अनुभवी शिक्षकों से भी उपर के पायदान में लाकर खड़ा करता है । आज के दौर में अन्य शासकीय स्कूलों के शिक्षक कम बजट व स्कूलों की आर्थिक तंगी की दुहाई देते सुनाई देते हैं । वहीं शिक्षिका इन सब से परे अपने स्कूल को एक अलग पहचान दिलाने में पूरी तरह से आमदा दिखाई देती है ।
इनका कहना
स्कूल में कुल 44 बच्चे अध्ययनरत है जिनमे 22 बालिकाएं तो 22 बालक है । बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही मौलिक अधिकारों की जानकारी देना मेरा कर्तव्य है । पूर्व में भी मैंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चंदावड के वार्डन पद पर रहकर तकरीबन पांच वर्षों तक सेवा दी है । जहां शिक्षा के साथ पौधे लगाए थे जो आज फल दे रहे है ।
-अनिता भार्गव, शिक्षिका

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