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शहरी को ट्रैफिक से बचाने के लिए बनी थी रिंग रोड, काम नहीं आ रही

atul porwal

Publish: Oct 21, 2019 11:32 AM | Updated: Oct 21, 2019 11:32 AM

Dhar

ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही से शहर में घुस रही बड़ी गाडिय़ां, बेकार हो रही तीन करोड़ की इनर रिंग रोड

पत्रिका पड़ताल
धार.
शहर के विकास को देखते हुए और अहमदाबाद की ओर से आने वाले बड़े वाहनों को मांडव रोड पर निकालने के लिए करीब ११ साल पहले इनर रिंग रोड का निर्माण हुआ था। यह रोड धार-तिरला मार्ग पर ज्ञानपुरा के पास से शहर की धूरी नापते हुए धार-मांडव रोड पर वन मंडलाधिकारी कार्यालय के पास निकलती है। इससे शहर को हैवी ट्रैफिक से बचाया जा सकता है। साथ ही अहमदाबाद की ओर से आकर मांडव जाने वाले और मांडव की ओर से आकर अहमदाबाद की ओर जाने वाले लोगों को भी शहर की चिल्लमपों से निजात दिलाने के लिए 6.4 किमी के रिंग रोड का निर्माण हुआ था। लगभग तीन करोड़ रुपए में बनी रिंग रोड ट्रैफिक डायवर्ट करने में नाकाम रही, जिसके पीछे ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही बताई जा रही है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों का कहना है कि उन्हें सडक़ निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जो पूरी की, लेकिन इसके उद्देश्य की पूर्ति पुलिस के हाथ में है।

तीन साल पहले हो चुके हैं 65 लाख खर्च
पीडब्ल्यूडी से मिली जानकारी के मुताबिक सडक़ खराब हो जाने पर 2015-16 में इसकी मरम्मत की गई थी। डमरीकरण और रिपेयरिंग पर लगभग ६५ लाख रुपए खर्च किए गए थे। तब भी जनप्रतिनिधियों और अफसरों का यही उद्देश्य था कि वीआईपी लोगों के आने-जाने के साथ बड़े वाहनों को शहर से दूर रखने के लिए रिंग रोड काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस रिंग रोड का ठीक होना जरूरी है। रिपेयरिंग पर खर्च करने के बावजूद रिंग रोड काम नहीं आ रही, बल्कि पूरा ट्रैफिक अब भी शहर से होकर गुजर रहा है, जिससे जिम्मेदार अफसर बेखबर बने बैठे हैं।

नेशनल हाईवे से राहत, लेकिन पूरी नहीं
पहले इंदौर-अहमदाबार नेशनल हाईवे शहर के बीच से गुजर रहा था। हाईवे से गुजरने वाले बड़े वाहनों को शहर से दूर रखने के लिए इनर रिंग रोड का निर्माण किया गया था। अब नेशनल हाईवे नौगांव बायपास से बन चुका है, जिससे बड़े वाहन शहर के बाहर ही निकल जाते हैं। शहर को राहत तो मिली, लेकिन पूरी तरह नहीं। अब भी कई बड़ी गाडिय़ां शहर से होकर गुजर रही है। इससे शहर में होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी रोक नहीं लग सकी है।

हादसों से जूझ रहा शहर
बड़े वाहनों और बड़ा ट्रैफिक होने से शहर की सडक़ें संकरी पड़ रही है। आए दिन वाहन आपस में भिड़ते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में बनी नागदा-गुजरी सडक़ के कारण घोड़ा चौपाटी से जिला अस्पताल तक खूब दुर्घटनाएं हुई तो तत्कालीन कलेक्टर ने इस रोड पर हैवी ट्रैफिक पर पाबंदी लगा दी, लेकिन रिंग रोड पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि एक रोड पर हैवी ट्रैफिक बंद करने के बावजूद दूसरे मार्ग पर गाडिय़ां डायवर्ट नहीं होने के कारण हादसों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है।

हमारा काम था सडक़ बनाना
हमारे विभाग ने तो सडक़ बनाई थी, ट्रैफिक पुलिस को डायवर्ट करना है। रिंग रोड का निर्माण लगभग 2008-09 में हुआ था, जिस पर 2015-16 में रिपेयरिंग की गई थी। उद्देश्य यही था कि शहर को हैवी ट्रैफिक से बचाने के लिए रिंग रोड जरूरी है। अब इस उद्देश्य को लागू करवाकर इसका पालन कराना हमारा काम नहीं है।
-बीबी खरे, सब इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

अब तो नेशनल हाईवे बन चुका है
जब रिंग रोड बना था शहर से गुजरने वाले पूरे ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए जरूरी था। अब तो इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे बन चुका है, जिससे होकर ही बड़े वाहन निकलते हैं। हां त्यौहारी सीजन में ट्रैफिक डायवर्ट करने के लिए रिंग रोड की आवश्यकता होती है। यदि अब भी बड़े वाहन शहर में आ रहे हैं तो इनको सख्ती से रिंग रोड पर डायवर्ट करेंगे।
-राजेश बारवाल, ट्रैफिक थाना प्रभारी