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ज्यादा बारिश हाने से बना खरमोर का खुशनुमा मौसम

atul porwal

Publish: Sep 15, 2019 11:27 AM | Updated: Sep 15, 2019 11:27 AM

Dhar

बारिश की देरी से अब तक केवल ४ मेल खरमोर ही नजर आए, फिमेल की भी संभावना

धार.
खरमोर पक्षी के लिए धार जिले के सरदारपुर तहसील में अभ्यारणय बना हुआ है। प्रति वर्ष जुलाई से सितंबर तक यहां खरमोर आते हैं और अक्टूबर के पहले सप्ताह में चले जाते हैं। वन विभाग से मिली जानकरी के अनुसार इस वर्ष देर से शुरू बारिश के कारण 15 अगस्त बाद खरमोर का आगमन हुआ। अब तक विभाग ने 4 मेल खरमोर की पुष्टी की है। हालांकि विभाग को फिमेल खरमोर की भी संभावना है, लेकिन इसकी पुष्टी सितंबर माह के अंत में अभ्यारण्य का मुआयना के बाद होगी।
वन विभाग के सरदारपुर एसडीओ राकेश डामोर ने बताया कि वैसे जुलाई में बारिश शुरू होते ही खरमोर आने का सिलसिला शुरू हो जाता है, लेकिन इस वर्ष बारिश की देरी के कारण १५ अगस्त बाद खरमोर आना शुरू हुए। हालांकि इस वर्ष काफी ज्यादा बारिश हुई, जिससे किसानी नुकसान तो हुआ, लेकिन यह मौसम खरमोर के लिए अनुकल है। डामोर का कहना है कि खरमोर के लिए ग्रास लैंड जरूरी होती है। ज्यादा बारिश से घास बड़ी हुई तो खरमोर को इससे फायदा हुआ। उन्हें लंबी घास पसंद है, जिसमें वे आसानी से प्रजनन कर सकते हैं। हालांकि विभाग के अनुसार अब तक 4 मेल खरमोर नजर आए, लेकिन फिमेल खरमोर की पुष्टी उनके चले जाने के बाद अभ्यारण्य का मुआयना करने पर ही होगी। एसडीओ डामोर का कहना है कि अब तक कोई वर्ष ऐसा नहीं गया, जब खरमोर के जोड़े ना आए हों। वर्ष 2018 में खरमोर के 7 जोड़े आए थे, लेकिन इस वर्ष बारिश की देरी के कारण अब तक केवल 4 मेल खरमोर नजर आए। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि खरमोर के 4 जोड़े प्रजनन के लिए सरदारपुर खरमोर अभ्यारण्य में आए होंगे।

तीन महीने रहती है नो इंट्री
सरदारपुर रैंज में खरमोर अभ्यारण्य में जुलाई से सितंबर तक मतलब तीन महीने नो इंट्री रहती है। यहां ना तो आमजन को घूसने की अनुमति है और ना ही वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी यहां जा सकते हैं। खरमोर पक्षी के प्रजनन को लेकर यह अहतियात बरती जाती है। विभागीय अफसरों की मानें तो जरा सी आहट पर पक्षी उड़ जाते हैं, जिससे नो इंट्री जरूरी है। बावजूद इसके अभ्यारध्य के आसपास हुए अतिक्रमण और बसी बसाहटों के लोग नो इंट्री का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बावजूद इसके अब तक वन विभाग की ओर से एक भी शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई या किसी पर पुलिसीया कार्रवाई नहीं हो सकी।

ऐसा है अभ्यारण्य का इतिहास
करीब 10 साल पहले जब यहां खरमोर का प्रजनन हुआ तो वन विभाग ने सरदारपुर तहसील के पानपुरा गांव के पास 34 हजार 812 हेक्टेयर जमीन खरमोर के नाम आरक्षित कर दी। यहां पर खरमोर अभ्यारण्य तैयार किया गया, जिसके चारों ओर तार फेंसिंग की गई। इस जमीन पर वन विभाग ने शांत क्षेत्र घोषित किया। पानपुरा, कीमायची, दुलैट, रिंगनोद के कुछ क्षेत्र सहित करीब 14 गांव इसकी जद में हैं, जहां की जमीन के क्रय-विक्रय पर पूरी तरह प्रतिबंध है।