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मरहम पट्टी के काम आ रहे जिले के कई अस्पताल

atul porwal

Publish: Sep 22, 2019 16:04 PM | Updated: Sep 22, 2019 16:04 PM

Dhar

डॉक्टरों के अभाव में शहर की ओर दौड़ लगा रहा ग्रामीण मरीज, बढ़ रही बीमारी, सीएमएचओ का कहना डॉक्टरों की कमी तो पूरे प्रदेश में है

पत्रिका आंचलिक पड़ताल
अतुल पोरवाल@धार.
स्वास्थ्य सेवाएं पुख्ता करने के लिए भले ही सरकार लाख जतन करे, लेकिन धार जिले के कई सरकारी दवाखाने आज भी केवल मरहम पट्टी के काम आ रहे हैं डॉक्टरों की कमी और संसाधनों का अभाव से मरीजों को राहत नहीं है। डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के अभाव में बड़े स्तर पर रैफर करने का खेल चल रहा है। इससे मरीजों का दर्द और बढ़ता जा रहा है।

यह है जिले की स्थिति
जिला चिकित्सालय-1
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र-15
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र- 46
उप स्वास्थ्य केंद्र- 303

डॉक्टरों की स्थिति
जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं ठीक करने के लिए जितनी जरूरत दवाईयों और संसाधनों की हे उससे कहीं ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है। जिले भर में प्रथम श्रेणी डॉक्टरों के स्वीकृत पद 79 है, जबकि मौजूद केवल 17 डॉक्टर हैं। इसके अलावा द्वितीय श्रेणी डॉक्टरों के 101 पद स्वीकृत हैं, जबकि मौजूद केवल 90 डॉक्टर हैं। आदिवासी जिले को पूरी सुविधाएं देने का दावा करने वाली सरकार धार जिले के इंतजाम से दूर नजर आ रही है, जहां पहले ही डॉक्टरों की कमी है, वहीं कई डॉक्टर सरकारी इंतजाम से दूर होकर वीआरएस ले रहे हैं।

11 ग्रामीण अस्पताल में नहीं है डॉक्टर
गांव की स्वास्थ्य सेवाएं पुख्ता करने का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग इनसे दूर नजर आ रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण जिले भर के 11 सरकारी दवाखाने डॉक्टरों का इंतजार कर रहे हैं। आदिवासी जिले के ठेठ ग्रामीण अंचल के इन दवाखानों पर ना तो स्वास्थ्य मंत्री की नजर है और ना ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पुख्ता इंतजाम कर पा रहे हैं।

यह है धामनोद
धामनोद आगरा-बॉम्बे नेशनल हाईवे से जुड़ा होने के कारण बड़ा व्यावसायिक नगर है। नगर की जनसंख्या अच्छी खासी होने के अलावा इससें आसपास के करीब 80 गांव लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के लाख दावों के बावजूद धामनोद का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदइंतजामी से घिरा है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद मरीज के पलंग पर चद्दर नहीं है तो अस्पताल परिसर की साफ सफाई पर भी गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है।

प्रतिदिन की ओपीडी- लगभग 300
डॉक्टरों की स्थिति- 6 डॉक्टर मौजूद
स्टाफ नर्स- 9
इन डॉक्टरों की कमी- हड्डी रोग विशेषज्ञ, बच्चों का डॉक्टर तथा सर्जन की कमी।
दवाईयों की स्थिति- रैबिज इंजेक्शन और ब्लड प्रेशर की दवाई छोड़ बाकी सब उपलब्ध।
पिछले एक महीने में 9 हजार की ओपीडी व आईपीडी रही, जिनमें से करीब २७२ मरीज रैफर किए गए।

ये है धरमपुरी
जिले के ठेठ आदिवासी अंचल का धमरमपुरी ना केवल नर्मदा के प्रभावितों का पालनहार नगर है बल्कि धरमपुरी बेंट संस्थान के कारण धार्मिक आस्था का केंद्र भी है। धरमपुरी तहसील स्तर का नगर होने के साथ तहसील की आबादी 45 हजार से ज्यादा है और यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के 100 से ज्यादा गांव आश्रित हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवाएं पुख्ता नहीं है।

प्रतिदिन की ओपीडी- लगभग 180
डॉक्टरों की स्थिति- 2 डॉक्टर मौजूद
स्टाफ नर्स- 4
इन उपकरणों की कमी- ईसीजी व सोनोग्राफी मशीन
इन डॉक्टरों की कमी- हड्डी रोग विशेषज्ञ, बच्चों का डॉक्टर तथा सर्जन की कमी।
दवाईयों की स्थिति- रैबिज इंजेक्शन की अनुपलब्ध से परेशान मरीज।
पिछले एक महीने में 2770 की ओपीडी व आईपीडी 337 रही, जिनमें से करीब 28 मरीज रैफर किए गए।

क्या कहते है सीएमएचओ डॉ. एसके सरल
सवाल- जिले के 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नहीं है। क्या कर रहे हैं।
जवाब- डॉक्टरों की कमी तो पूरे प्रदेश में है। हमने अपने स्तर पर राज्य शासन को अवगत करा दिया कि हमारे यहां कितने डॉक्टरों की कमी है। जल्द ही कुछ डॉक्टर मिलने की संभावना है।
सवाल- रैबिज इंजेक्शन की कमी के कारण मरीज परेशान हैं और उन्हें बाजार से खरीदना पड़ रहे हैं। कब स्थिति सुधरेगी।
जवाब- रैबिज इंजेक्शन के लिए हम कई बार पत्र लिख चुके हैं। हालांकि एक हजार इंजेक्शन मिल चुके हैं, जिन्हें वितरित कर दिया गया, लेकिन जल्द ही और इंजेक्शन मिल जाएंगे, जिससे स्थिति सुधर जाएगी।
सवाल- उपकरणों और अन्य अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए क्या प्लानिंग है।
जवाब- जहां जिन मशीनों की जरूरत है, चार्ट बनाकर भेजा है। बाकी और कोई अव्यवस्था नहीं है।