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उम्मीद थी कि ठीक हो जाएगी आखें, ऑपरेशन हुआ तो पूरी चली गई रोशनी

atul porwal

Publish: Aug 18, 2019 12:00 PM | Updated: Aug 18, 2019 12:00 PM

Dhar

मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने धार से इंदौर गए दस मरीजों की आखें हो गई खराब, इंदौर के आई हास्पिटल को किया सील

धार.
सरकारी योजना है तो आखों की परेशानी लेकर जिले भर के मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। यहां से कई मरीजों को इंदौर के आई हास्पिटल भेजा गया। 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद का ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन आखों से पट्टी हटने के बाद इन्हें कुछ नजर नहीं आया। परेशान मरीजों ने हल्ला मचाया तो इंदौर के सीएमएचओ ने तत्काल अस्पताल को सील करवा दिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। लेकिन सरकारी योजना का लाभ लेने के चक्कर में धार जिले के 10 मरीजों के आखों की रोशनी ही चली गई।
ऑपरेशन फेल होने से 11 मरीजों के आखों की रोशनी चली गई, जिनमें 10 मरीज धार जिले के बताए जा रहे हैं। लेकिन पुख्ता प्रमाण के लिए कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही किसी तरह का बयान दिया जा सकता है। धार जिला अस्पताल में पदस्थ नैत्र सहायक शैलेंद्र तिवारी के अनुसार अस्पताल में करीब 17-18 मरीज आखों की परेशानी लेकर आए थे। इनकी जांच कर मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने की सलाह दी। उन्हें राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत इंदौर में होने वाले ऑपरेशन के बारे में भी बताया गया। बावजूद 5 मरीजों ने जाने से इंकार कर दिया, वहीं 13 मरीज इंदौर के आई होस्पिटल भेजे गए थे। 8 अगस्त को इनका ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन इनमें से कितने का ऑपरेशन फेल रहा और अब उनकी स्थिति क्या है इसके बारे में जांच रिपोर्ट से ही पता चल सकेगा। इंदौर से मिली खबर के अनुसार धार जिले के आहू गांव की रामी बाई के आखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है, जिनका रो-रो कर बुरा हाल है।

पहले भी फेल हुए ऑपरेशन
इंदौर के आई हास्पिटल में दिसंबर 2010 में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेल हो गए थे। इसमें 18 लोगों के आखों की रोशनी चली गई थी। इस पर तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. शरद पंडित ने संबंधित डॉक्टर व जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ एपआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की थी। इसके बाद 24 जनवरी 2011 को अस्पताल को मोतियाबिंद ऑपरेशन व शिविर के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। उपकरण, दवाईयां, फ्ल्यूड के सेंपल जांच के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे गए। इसके बाद शिविरों के लिए सीएमएचओ की मंजूरी अनवार्य कर दी गई। कुछ महीने बाद अस्पताल पर पाबंदियां रही फिर इन्हें शिथिल कर दिया। 2015 में बड़वानी में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन फेल हुए, जिनमें 60 से ज्यादा लोगों के आखों की रोशनी चली गई।