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मिट्टी परीक्षण लैब होने के बाद भी परीक्षण के लिए भटक रहे किसान

Shyam Kumar Awasthi

Publish: Nov 21, 2019 00:36 AM | Updated: Nov 21, 2019 00:36 AM

Dhar

परेशानी : न तो उपकरण आए और न ही अमला पदस्थ हुआ

राजेंद्र धोका
बदनावर. मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के लोकार्पण के दो माह बीत जाने के बाद आज तक भवन के दरवाजे नहीं खुल पाए हंै। काम करने वाले अमले की पदस्थी, फर्नीचर, परीक्षण उपकरण भी नहीं लग पाए हैं। बदनावर ब्लॉक में 80 प्रतिशत आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है। प्रत्येक किसान अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराना चाहता है। किसानों का कहना है कि यह सौगात मिली है तो शीघ्र ही प्रयोगशाला प्रारंभ की जाना चाहिए। जानकारी के मुताबिक मिट्टी की उर्वरकता कम होने से सबसे अधिक खामियाजा पश्चिम क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ा रहा हैं। लघु सीमांत किसानों का यह क्षेत्र मिर्र्च, टमाटर का उत्पादन कर प्रतिदिन सैकड़ों वाहन लोड होते थे, लेकिन अब यह संख्या कुछ बोरों में सिमट गई है। अनेक किसानों ने ये फसलें लेना ही बंद कर दी है। इन सबके पीछे जमीन की मिट्टी का खराब होना बताया जा रहा है। यदि मिट्टी परीक्षण समय पर होता रहे तो किसानों को जमीन में किस तत्व की कमी है पता चलने पर निदान हो सकता है और भूमि उपजाऊ हो सकती है। फिलहाल किसानों को मिट्टी परीक्षण के लिए धार जाना पड़ता है, आठ दिन बाद रिपोर्ट लेने, ऐसे में उसके दो दिन खराब हो जाते है वहीं आर्थिक बोझ भी पडऩे से वह नियमित रूप से परीक्षण नहीं करा पाता है। हालांकि किसान गर्मी में ही मिट्टी परीक्षण कराने में इच्छुक रहते है लेकिन नई पीढ़ी के युवाओं का मानना है कि बदनावर में लेब प्रारंभ होती है तो वर्ष में दो बार मिट्टी का परीक्षण कराएंगे। ऐसे में जमीन सुधरने से अधिक उत्पादन मिल सकेगा। मांगलिया रोड पर 40 लाख रुपए लागत से बने मृदा परीक्षण केंद्र का लोकार्पण विधायक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव ने माह सितंबर में समारोह पूर्वक किया था।
धार जाना पड़ता है
रूपाखेड़ा के किसान बद्रीलाल पाटीदार का कहना है कि 5 साल पहले धार जाकर मिट्टी का परीक्षण कराया था, लेकिन दो बार आने जाने की किल्लत के चलते बाद में नही करा पाए। अब जब यह सौगात बदनावर में मिली है तो इसे तत्काल प्रारंभ कराया जाना चाहिए। मिटटी में जांच के तत्वों की कमी को किसान दूर कर लेगा तो प्रचुर उत्पादन ले सकता है। तिलगारा के किसान रघुनंदन पाटीदार का कहना है कि आज 100 प्रतिशत किसानों की रुचि अपनी जमीन की मिट्टी के परीक्षण में है। यदि बदनावर लेब शीघ्र प्रारंभ होती है तो निश्चित रूप से किसानों को लाभ मिलना शुरू हो सकेगा। जिस प्रकार मिट्टी को नमक की जरूरत है और किसान अज्ञानतावश खेतों में मिर्ची डाल रहा है तो नतीजे कैसे मिलेंगें। यदि मिट्टी का परीक्षण होता है तो किसान उसके अनुरूप जमीन को अधिक उपजाऊ बना सकता है।

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