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हद दर्जे की लापरवाही...पुरातत्व विभाग नहीं दे रहा ध्यान, वर्षों पुराने मंदिर का हो रहा क्षरण

Amit S mandloi

Publish: Jul 19, 2019 11:39 AM | Updated: Jul 19, 2019 11:39 AM

Dhar

- पत्थर दरकने के डर से मंदिर के शिखर पर ध्वजा तक नहीं चढ़ा पा रहे श्रद्धालु

बदनावर. राजेंद्र धोका
बदनावर का श्री बैजनाथ मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है, मंदिर में लगातार क्षरण हो रहा है। मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है,लेकिन विभाग बेफ्रिक है। उधर मंदिर के शिखर पर ध्वजा भी नहीं चढा पा रहे है। पंडित काकहना है कि अगर ध्वजा चढाने कोई उपर चढता है पत्थर खिसक जाएंगे और बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

श्री बैजनाथ महादेव मंदिर लोगो की आस्था का केंद्र है्र, किसी भी कार्यक्रम की शुरूआत के लिए इसे श्री माना जाता है। लेकिन इसके रखरखाव का जिम्मा लेने वाला पुरातत्व विभाग नींद में सोया नजर आ रहा है, वही जनप्रतिनिधि भी मामले में मौन नजर आ रहे है। सरकार के नुमाईंदे तो विकास में लगे थे लेकिन विपक्ष इस लापरवाही के प्रति भी जागरूक न हो सका। धार्मिक सामाजिक संस्थाएं काम करना चाहती है लेकिन पुरातात्वीक संपत्ति में छेड़छाड़ नहीं कर सकती वहीं जिन्हें काम करना है वे रूचि नहीं ले रहे। दस सालों से लेपन के अभाव में मंदिर के पत्थरों में क्षरण जारी है लेकिन सुध नहीं ली जा रही। मंदिर के पिछले भाग में पत्थरों के मध्य झाडिय़ां उग आई है लेकिन जवाबदारों को यह नजर नहीं आ रहा है। आस्था के केंद्र श्री बैजनाथ महादेव मंदिर के पत्थरों में क्षरण के चलते जरा सा हाथ लगते ही पत्थर खिरने लगते है। क्षरण की प्रक्रिया गत सालो से सतत होने के बाद भी जवाबदारों का इस और ध्यान नहीं होने से लोगों में आक्रोश है, लोगों का स्पष्ट कहना है कि पुरातन धरोहर के प्रति उदासीन रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक दो तीन सालों में विभाग द्वारा पत्थरों की केमिकल से धुलाई की जाती है जिससे पत्थर में लगे कीड़े समाप्त होने से क्षरण होना बंद हो जाता है लेकिन गत दस सालों से केमिकल से धुलाई नहीं होने के कारण क्षरण की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिससे पुरातन धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आने लगा है। मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है, इसकी देखरेख के लिए विभाग द्वारा केअर टेकर भी नियूक्त किया गया है लेकिन जवाबदार द्वारा ध्यान नही दिए जाने का खामियाजा पुरातन धरोहर भूगत रही है। मंदिर के पीलर के पत्थर भी टूटने लगे है वहीं इमारत पर नक्कशी की जाकर बनाई प्रतिमाएं भी खंडित होने लगी है। मंदिर के शिखर पर ध्वजा आदि बदलने के दौरान चडऩे में भी लोग डरने लगे है।

बाहरी काम करा रहे

मंंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन होने से मंदिर पुजारी और सामाजिक संस्थाएं बाहरी कार्य करवा कर लोगो के दर्शन एवं बैठने आदि की व्यवस्था जरूर करवा रहे है। वर्तमान में मंदिर तक प्रवेश के रास्ते को चौड़ा किया गया है जिससे खासकर महिलाओ, युवतीयो को एक रो में मंदिर तक पहुंचने में आसानी हो सकेगी। मंदिर परिसर में ओटला निर्माण कर उस पर शेड लगाया गया है। जर्जर हो चुके पुरातन समाधी स्थल का भी कायाकल्प किया गया है। पीपल के वृक्ष के आसपास ओटला निर्माण किया गया। परिसर में पैवर्स लगाकर बैठने के लिए बैंचें लगाई है। पेयजल के लिए टंकी लगवाई, पौधारोपण किए जाने से हरियाली बड़ गई । मंदिर परिसर सहित अनेको स्थानो से मिली पुरातन प्रतिमाओ को स्टेंड बनाकर उन पर सहेजा जाने से मंदिर की भव्यता में निखार आया है। लेकिन लोगो का कहना है कि मंदिर के पत्थरो में हो रहे कारण को रोकना बेहद जरूरी है।

हर किसी की श्रद्धा लेकिन नहीं दे रहे है ध्यान
इस मंदिर से हर वर्ग,हर राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता की श्रद्धा जुडी हुई है। पूर्व में सरकार में रही भाजपा के नेताओं ने कोई ठोस प्रयास नहीं किए। अब विधायक राजवद्र्धनसिंह दत्तीगांव है, वे भी इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे है।