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शिंगणापुर में है शनिदेव का सबसे बड़ा मंदिर

Priyanka Chandani

Publish: Mar 12, 2015 18:12 PM | Updated: Mar 12, 2015 18:12 PM

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सिंगणापुर की खासियत यह है कि यहां दरवाजों के किवाड़ नहीं होते

देश में सूर्यपुत्र शनिदेव के कई मंदिर हैं लेकिन उनमें सर्वाधिक प्रमुख है अहमदनगर स्थित शिंगणापुर का शनी मंदिर।

शनिदेव के इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर शनिदेव की प्रतिमा बगैर किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबुतरे पर विराजित ह।

यहां पर दिखने वाली काले रंग की शनीदेव की प्रतिमा लगभग 5 फीट 9 इंच लंबी और एक फीट 6 इंच चौड़ी है जो धूप, ठंड तथा बरसात में दिनरात खुले में है।

शनि शिंगणापुर के बारे में यह प्रचलित है कि यहां "देवता हैं" लेकिन मंदिर नहीं, घर है लेकिन दरवाजा नहीं, वृक्ष है पर छाया नहीं, भय है पर शत्रु नहीं। यहां पर शनि अमावस और शनि जयंती पर लगने वाले मेले में करीब 10 लाख लोग आते हैं और हर रोज यहां लगभग 13 हजार से ज्यादा लोग दर्शन के लिए आते हैं।

शिंगणापुर में सनी जयंती बड़े घूमधाम से मनाी जाती है। इस दिन शनि देव की प्रतिमा नील वर्ण दिखती है। 5 दिनों तक यज्ञ और 7 ç दन तक भजन-प्रवचन कीर्तन का सप्ताह कड़ी धूप में मनाया जाता है।

शिंगणापुर के आस-पास आप शिरड़ी, ˜यंबक्श्वर, नासिक का भी आनंद ले सकते हैं। बारत के किसी भी कोने से यहां आने के लिए रेल सेवा का उपयोग किया जा सकता है। दिल्ली से मुंबई या जयपुर से मुंबई पहुंचकर शिरड़ी होते हुए भी शिंगणापुर पहुंचा जा सकता है।

सिंगणापुर की खासियत यह है कि यहां दरवाजों के किवाड़ नहीं होते। यहां क् लोगों की शनिदेव में आस्था और लोगों में डर यहां के लोगों को रातको सुनिश्चित नींद लेने देते हैं।