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जानिए, छत्तीसगढ़ घूमने से पहले इन रहस्य भरी जगहों के बारे में

Bhup Singh

Publish: Nov 17, 2015 18:34 PM | Updated: Nov 17, 2015 18:34 PM

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आज हम आपको छत्तीसगढ़ की कुछ ऐसी जगह के बारे में बताएगे जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है

आज हम आपको छत्तीसगढ़ की कुछ ऐसी जगह के बारे में बताएगे जो किसी आश्चर्य से कम नहीं है। जिसमें बहुत रहस्य बने हुए है, कि यहां की जमान पर उछलने का अहसास, तरह-तरह की मधुर आवाजें निकलना, 7 धाराएं एक नदी में आकर मिलना आदि। 

आए जाने इन स्थानों के रहस्य क्या है:-

मैनपाट की स्पंजी जमीन
मैनपाट अपनी सुंदरता और बहुत ठंड होने के कारण छत्तीसगढ़ का तिब्बत नाम से मशहूर है। यहां ना केवल राज्य से बल्कि देश के दूसरे प्रदेशों से सैलानी जलजला नाम की जगह आते है। यहां 1997 में भूकंप आया था जिसके बाद जमीन के अंदर के दबाव तथा खाली स्थान में पानी भरा गया था जिसकी वजह से यहां कि जमीन  पर कंपने का अनुभव होने लगा। इसीलिए यह जमीन स्पंज लगती हैं।

टिनटिनी पत्थर 
दावा किया गया है कि दरिमा स्थित टिनटिनी पत्थर दरअसल मंगल ग्रह से गिरा उल्का पिंड है। माना जा रहा है कि उल्का पिंड के रूप में गिरते समय इसमें आग लगी थी और हल्के  गैस के तत्व निकले थे। भारी तत्व और इसमें निकली गैसों से बने गड्ढे के कारण इस पत्थर को बजाने से छह प्रकार की आवाजें आती हैं, जैसे घंटियों में होती हैं। इसी कारण इसका नाम टिनटिनी पत्थर पड़ा है।

गुफा और अंधी मछलियां
कांगेर वैली नेशनल पार्क के पास एक अंधेरी कुटुमसर गुफा है अर्थात पानी से घिरी हुई जगह। जहां अंधी मछलियां रहती है। यह गुफाए बहुत पुरानी बनी है और अंधी मछलियों के लिए मशहूर है। जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती जिसके कारण यहां आने वाला व्यक्ति पूरी तरह अंधा महसूस करता है। जिसके कारण यहां कि मछलियों की आखों पर एक पतली सी झिल्ली चढ़ चुकी है, जिससे वे पूरी तरह अंधी हो गई हैं।

फरसाबहार में नागलोक
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में बसे फरसाबहार गांव का नाम ही है नागलोक। यहां 40 प्रकार के सांप पाए जाते है, जिसमें दुनिया की सबसे जहरीली 6 में से 4 प्रजातियां यहां मिलती हैं। बारिश के दिनों में इनके रहने की जगहों में पानी भर जाता है तो यह सूखी जगहों  में आ जाते हैं। यहां स्नेक पार्क बनाने की भी प्लानिंग है, जिसमें एंटी वेनम के लिए सांपों का जहर भी निकाला जाएगा। 

छत्तीसगढ़ में 7 धाराओं में बंटती है नदी
इंद्रावती नदी मध्य भारत की एक बड़ी नदी है और गोदावरी नदी की सहायक नदी है। इस नदी नदी का उदगम स्थान उड़ीसा के कालाहन्डी जिले के रामपुर थूयामूल में है।नदी की कुल लम्बाई 240 मील है। यहां से बारिश के मौसम में सात धाराओं का नजारा साफ नजर आता है। सभी सात धाराओं के पानी का रंग पहाड़ी इलाकों में अलग बहने के कारण थोड़ा अलग-अलग हो जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित यह जगह बेहद खूबसूरत है।

आलू-अंडे उबल जाते हैं ताजा पानी में
अम्बिकापुर से रामानुजगंज जाने वाली सड़क के पास गर्म पानी के आठ- दस कुंड हैं। यहां पानी बहुत गर्म आता है क्योकि यहां पानी का तापमान 96-100 डिग्री सेंटीग्रेट तक होता है। इस पानी में सल्फर यानी गंधक की मात्रा मिलती है जिससे त्वचा रोग ठीक होते हैं।