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ओडिया आर्किटेक्चर से बना है कोनार्क का सन मंदिर

Priyanka Chandani

Publish: Mar 26, 2015 11:46 AM | Updated: Mar 26, 2015 11:46 AM

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सूर्य मंदीर का नाम दो शब्दों का मिश्रण है, "कोना" का मतलब होता है "कॉर्नर" और "आर्क" का मतलब "सूर्य" है

भारत परंपरा और धार्मिक बंधनों का देश है। यहां जितने लोग हैं लगभग उतने ही सबकी आस्था के अपने-अपनेें हर जगह पर मंदिर है। भारत के सबसे खुबसूरत मंदिरों में से एक है कोनार्क का सूर्य मंदिर। सूर्य मंदिर ओडिया आर्किटेक्चर से बना है जो अपने आप में एक कला है। कहा जाता है कि मंदिर के पत्थरों की भाषा इंसानों की भाषा बोलते हुए हैं। 13 वीं सदी में राजा नरसिम्हादेव ने विशाल रथ के आकार में यह मंदिर बनवाया था जिसमें 7 घोड़े और 12 पहिये हैं जो भगवान सूर्य को स्वर्ग की तरफ से लेकर आ रहा है।

जगन्नाथपुरी से 35 किलोमीटर और भुवनेश्वर से 65 किमी की दूरी पर बने सूर्य मंदीर का नाम दो शब्दों का मिश्रण है। "कोना" का मतलब होता है "कॉर्नर" और "आर्क" का मतलब "सूर्य" से है। सूर्य मंदिर काला पगोड़ा के नाम से प्रसिध्ध तटिय किनारा यूरोपीय नाविकों के लिए एक लेंडमार्क बना हुआ है।

प्राचिन समय में सूर्य और धरती की पूजा करना सबसे उचित माना जात था। जहां सूर्य को पावर और एनर्जी का देवता मना जाता था वहीं धरती को सबकी रक्षा करने वाली और पालने पोसने वाली माता के रूप में माना जाता था।

सूर्य मंदिर कोनार्क जाने के लिए वैसे तो हवाई यात्रा ठिक है क्योंकी भारत के दक्षिण हिस्से में बसा कोनार्क भारत के दूसरे हिस्सों से कापी दूरी पर हैं। प्लेन से यात्रा के लिए आप भुवनेश्वर या चेन्नई तक फ्लाइट और फिर अपनी गाड़ी से भी जा सकते हैं। वैसे ट्रेन से जाने के लिए भी भुवनेश्वर या चेन्नई तक की ट्रेन सेवा तो लेनी ही पड़ेगी।

ठंडे मौसम में कोनार्क जाना आपको ज्यादा सुखदायी लगेगा।