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प्रकृती के रंगो से बने हैं राजस्थान के पेरवा और जवाइ बांध

Priyanka Chandani

Publish: Mar 02, 2015 12:59 PM | Updated: Mar 02, 2015 12:59 PM

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इस जगह पर ज्यादा सेलानी नहीं अाते  इसलिए आपको यहां ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है

राजस्थान का नाम आते ही सबके जहन में जयपुर, उदयपुर, जेसलमैर जैसे बड़े नाम आ जाते हैं। वैसे यह तो सब जानते हैं की किसी भी राज्य या देश की जान उसके छोटे इलाको में बसती है। यदि राजनितिक तौर पर बात करें तो किसी भी राष्ट्र की तरक्की उसके छोटे इलाको की तरक्की से देखी जाती है।

बात करें राजस्थान की तो यह साल में सबसे ज्यादा पर्यटकों को अपनी और खिंचने वाला राज्य है। हालांकी पिछले 2 सालों में इसके पर्यटकों में कमी भी देखी जा रही है। राजस्थान में लगभग 44795 गांव और कसबे हैं। यह वह गांव और कसबे हैं जहां से सरकार को रेवेन्यु मिलता है। चाहे राजस्थान कितना ही बड़ा पर्यटन स्थल क्युं ना हो लेकिन शायद राजस्थान में रहने वाले बहुत से लोगो को भी यह नहीं पता होगा कि राजस्थान के छोटे-छोटे गांवो के पास भी प्रकृती के अनेक रंग बसते हैं।

राजस्थान के पाली जिले के बाली तहसील में पेरवा नाम का एक छोटा सा गांव अपनी अलग ही खुबसुरती लिये है। वैसे तो जयपुर या जोधपुर सबसे नजदिकी रेल्वे स्टेशन हैं लेकिन यदि आप जयपुर से ट्रेवल कर रहें है तो फालना सबसे नजदिक हैं ष हालांकी पेरवा जाने के लिए जोधपुर से या जयपुर से अपनी गाड़ी से जाना ज्यादा बहेतर है।

यदि सबसे पहले ट्रेवल की शुरूआत करें तो जयपुर से लगभग 500 किलोमिटर की दूरी पर पेरवा आप पूरी रात के सफर के बाद सुबह पहुंचेंगे। सुबह घुमने के लिए वहां पर ट्रेकिंग के लिए जा सकते हैं। पेरवा में लेपर्ड (चिता) सेंच्युरी है। यहां पर जाने के लिए रात का समय सबसे बहेतर है। यदि आप वाइल्ड लाइफ देखने के शौकिन हैं तो आपको रात के समय काफी चिते दिख सकते हैं। छोटी से झील के पास कहा जाता है कि अकसर चिते यहां पानी पीने आते हैं। यहां का सफर आपको प्रकृ ती के इस रंग के और करीब ले जाएगा।

पेरवा के पास छोटे से गांव "बेरा" में भी आप काफी चिते देख सकते हैं। इसी के पास से जवाइ नदी गुजरती है जहां से जवाइ डेम की शुरूआत होती है। इसी के बीच बनती छोटी सी झील पर आपको कई मगरमच्छ भी देखने को मिलेंगे। राजस्थान में यही एक ऎसी जगह है जहां इतनी बड़ी संख्या में मगरमच्छ देखने को मिलते हैं। इसलिए इसे क्रोकोडाइल सेंच्युरी भी कहा जाता है। क्युंकि इस जगह को देखने वालों की दूरी के लिए कोई जाली नहीं बनाइ गइ है तो ध्यान रखें की आप मगरमच्छ को सोता हुआ देखें या उसमें कोइ हरकत नहीं हो तो आगे जाने के बारे में नहीं सोचे। यहां पर हादसे होना आम बात है। साथ ही इस जगह के बारे में जायादा लोगों को जानकारी नहीं है इसलिए यह जगह सेलानियों से दूर ही है इसलिए आपको यहां ज् यादा सावधानी रखने की जरूरत है।

बेरा और पेरवा के बाद आप जवाइ बांध जा सकते हैं। लगभग 18 किलोमीटर की द ूरी पर बसा जवाई बांध एक छोटा सा गांव है, हालांकी इस गांव का इस डेम से कोइ जुड़ाव नहीं है यह एक संयोग मात्र है। महाराजा उमेद सिंह ने 1946 में इस बांध की नींव रखी थी जिसका काम 1957 में समाप्त हुआ। 11 साल के इस काम के दौरान देश में कई उतार चढ़ाव आए, जिसमें सबसे बड़ी घटना भारत-पाकिस्तान विभाजन थी। लगभग 2 करोड़ की लागत से बना यह बांध आज राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है।

बांध में लगभग 7887.5 मेनक्राफ्ट पानी संरक्षण की क्षमता है। बांध लगभग 414.05 स्कवायर में फैला हुआ है साथ ही इसकी उंचाई जमीन से लगभग 18.67 मीटर उपर है।

बांध के आस पास छोटे-छोटे पिकनीक स्पोट बनाए गए हैं। आस-पास में अस्पताल की सुविधा भी उपलब्ध है। साथ ही आस-पास की वाइल्ड लाइफ सेन्च्युरी और पहाड़ों पर ट्रेकिंग इस जगह को और भी खुबसुरत बनाते हैं। यह सब कुछ देखने के लिए आपको कम से कम दो दिन का वक्त चाहिए और ऎसे में रहने के लिए आप कोइ अच्छा होटल पेरवा में ही देख सकते हैं। छोटा गांव होने की वजह से यहां अच्छे होटल भी बजट में मिल जाते हैं।