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उत्तम त्याग का पर्व धूमधाम से मनाया

Gaurav Kumar Khandelwal

Publish: Sep 11, 2019 07:54 AM | Updated: Sep 11, 2019 07:54 AM

Dausa

Special prayers in Jain temples:

दौसा. दशलक्षण पर्व के तहत उत्तम त्याग का पर्व सभी जैन मंदिरों में धूमधाम से मनाया गया। विशेष पूजा-अर्चना कर मंडल विधान के कार्यक्रम हुए। जैन समाज के प्रवक्ता संजय जैन ने बताया कि आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा राकेश,राहुल मोरा वाले परिवार को मिला। जैन धर्मशाला स्थित जैन चैत्यालय मंदिर में शांतिधारा का सौभाग्य संजय जैन, विधान जैन लुहाडिय़ा परिवार को मिला। पंडित अध्यात्म प्रकाश ने बताया कि त्याग का मतलब सिर्फ उपवास करना ही नहीं होता, बल्कि इ'छाओं और ख्वाहिशों को वश में रखना होता है। त्याग अ'छे गुणवान कर्मों में वृद्धि करता है।

Special prayers in Jain temples


इससे पहले रविवार रात आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में 'कौन बनेगा धर्म शिरोमणिÓ कार्यक्रम हुआ। इसमें पांच टीमें बनाकर धर्म से संबंधित प्रश्न पूछे गए। प्रथम स्थान पर सुहानी जैन, द्वितीय स्थान पर राहुल जैन मोरा, तृतीय स्थान पर अनिता छाबड़ा रहे। कार्यक्रम संयोजिका मीनाक्षी एवं सपना जैन थे। विजेताओं को प्रेमचंद, विनय जैन छाबड़ा की तरफ से पारितोषिक दिया गया। समाज के अध्यक्ष महावीर जैन ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान मनीष बांदीकुई, अजीत जैन, शैलेंद्र जैन, प्रतीक जैन, विनोद जैन, अंजू जैन, विधान जैन, विधि सेठी जैन, चर्या, सुनीक्षा, शांति सिकंदरा, मोनिका जैन, सुनीता जैन, सिंपल जैन, मनीषा जैन आदि मौजूद थे।


त्याग की भावना रखें


लालसोट. जैनाचार्य विवेक सागर ने दशलक्षण पर्व पर उत्तम त्याग धर्म पर मंगलवार को जैन नसिया में प्रवचन दिए।उन्होंने कहा कि त्याग ही वह शक्ति है, जो आत्मा पर विजय पा सकती है। त्याग मे ही जीवन है, त्याग मानव की नैसर्गिक क्रिया है। उन्होंने कहा त्याग धर्म है, भोग अधर्म है। लोगों को त्याग की भावना भी रखनी चाहिए। इससे भी आत्मबल के साथ मन को सन्तोष मिलता है। उनहोंने दान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उत्तम त्याग धर्म की पूजा विधान किया गया। आचार्य विवेक सागर का मंगलवार को 27वां उपवास रहा।(नि.सं.)

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