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बसवा व बैजूपाड़ा में पंचायत समिति खुलने से विकास को लगेंगे पंख

Rajendra Kumar Jain

Publish: Nov 19, 2019 11:38 AM | Updated: Nov 19, 2019 11:38 AM

Dausa

Development of panchayat samiti in Baswa and Baijupada will give wings... पंचायत पुनर्गठन

बांदीकुई. पंचायत पुनर्गठन में बसवा एवं बैजूपाड़ा को नई पंचायत समिति का दर्जा मिलने से अब क्षेत्र के विकास को भी पंख लग सकेंगे। उपखण्ड क्षेत्र में अब तीन पंचायत समिति होंगी। इसमें बांदीकुई, बसवा व बैजूपाड़ा शामिल हैं।
बसवा व बैजूपाड़ा के अधीन जुड़ी क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतें विकास में पिछड़ी हुई हैं। अब इन पंचायतों में भी विकास को गति मिल सकेगी। अब बसवा पंचायत समिति के अधीन 18 एवं बैजूपाड़ा में 21 ग्राम पंचायत व बांदीकुई में 26 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।

बसवा व बैजूपाड़ा क्षेत्र को विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अभी तक उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से पिछड़ा रहा है। 1951 से 2019 तक हुए 16 विधानसभा चुनावों में अभी तक बसवा से एक बार भी विधायक निर्वाचित नहीं हुआ है। बसवा में 1978 से 1989 तक नगरपालिका कार्यालय संचालित रहा,लेकिन इसके बाद नगरपालिका को खत्म कर ग्राम पंचायत बना दी गई थी।
वहीं बैजूपाड़ा क्षेत्र के निहालपुरा पंचायत के अलियापाड़ा गांव निवासी मुरारीलाल मीणा 2003 में बसपा से बांदीकुई से विधायक चुने गए। इसके बाद 2008 में दौसा से विधायक निर्वाचित हुए थे और मंत्री पद पर भी काबिज हुए। इसके बाद 2019 में मुरारीलाल मीणा फिर दौसा से विधायक निर्वाचित हुए। तभी से बैजूपाड़ा क्षेत्र के विकास की आस जगी थी। Development of panchayat samiti in Baswa and Baijupada will give wings.... इसी कड़ी में 1981 से 1985 तक अलीपुर निवासी लक्ष्मीनारायण मीणा एव 1995 से 2000 तक हरिकिशन मीणा बांदीकुई पंचायत समिति में प्रधान रह चुके हैं। जबकि 2013 में बैजूपाड़ा को उपतहसील का दर्जा दिया गया था। अब इसके बाद पंचायत समिति बना दिए जाने से विकास को काफी हद तक गति मिल सकेगी। हालांकि गत विधानसभा चुनाव परिसीमन में बैजूपाड़ा सहित 6 ग्राम पंचायतों को महुवा विधानसभा क्षेत्र में जोड़ दिया गया था।
अब उम्मीदें हो सकेंगी पूरी
बसवा कस्बे में समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। यहां प्रसिद्ध धार्मिक स्थल झाझीरामपुरा स्थित है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए कोई सुविधाएं नहीं है। बसवा में पानी की समस्या भी लोगों के लिए कोढ़ में खाज बनी हुई है। लोगों को कई दिनों के अंतराल में पानी मिलता है। ट्रेनों का पर्याप्त ठहराव नहीं होने से आवागमन की समस्या भी बनी रहती है। रोडवेज बसें मेगा हाइवे बस स्टैण्ड से ही गुजर जाती हैं। कस्बे में होकर नहीं जाने से लोगों को कस्बे में पैदल पहुंचना पड़ता है। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भी सुविधाओं की कमी अखर रही है। उच्च शिक्षा के लिए कोई सरकारी कॉलेज नहीं है। कस्बे व आस-पास के गांवों में सडक़ें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। पानी निकास के लिए कोई ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं होने से सडक़ों पर पानी बह रहा है। साफ-सफाई की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। लेकिन अब पंचायत समिति का दर्जा मिलने से कस्बे का विकास हो सकेगा। वहीं बैजूपाड़ा में भी रास्ते सकड़े हैं। पानी निकास, शिक्षा, चिकित्सा एवं अन्य सुविधाओं के लिए लोग मोहताज हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र का इस कस्बे से जुड़ाव भी होने के बाद भी विकास में पिछड़ा हुआ है।

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