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यूरिया की कालाबाजारी, मनमर्जी से वसूले जा रहे हैं दाम

Rajendra Kumar Jain

Publish: Dec 10, 2019 20:12 PM | Updated: Dec 10, 2019 20:12 PM

Dausa

यूरिया की कालाबाजारी, वसूले जा रहे हैं अधिक दाम : urea

दौसा. जिले में इस समय रबी की गेहूं, जौ, चना व सरसों की फसलों में पहले पानी के साथ दिए जाने वाले यूरिया की किल्लत मच रही है। किसानों को इस वक्त आसानी से यूरिया नहीं मिल रहा है।कालाबाजारी में खरीदना पड़ रहा है। यूरिया के 45 किलो के कट्टे की सरकार से निर्धारित दर 266.50 रुपए है, जबकि ग्रामीण दुकानदार इसको 300 से 350 रुपए में बेच रहे हैं। urea

कृषि विभाग के अधिकारी भी अंकुश नहीं लगा हैं। खास बात यह हैकि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार करीब 7500 मीट्रिक टन खाद अभी स्टॉक में व्यापारियों के पास है। इसके बावजूद सुनियोजित तरीके से खाद की किल्लत बताकर किसानों से मनमर्जीके दाम वसूले जा रहे हैं। urea


सूत्रों की माने तो हर वर्ष खाद की कम्पनियों के बड़े डीलर रबी की फसलों में पहले पानी के समय यूरिया का स्टॉक कर लेते हैं, इससे यूरिया की किल्लत मच रही है। इस बार भी बड़े डीलरों ने स्टॉक कर रखा है। ग्रामीण इलाकों के दुकानदारों का कहना है कि वे ही आगे से यूरिया ब्लैक में ला रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।urea

खास ब्राण्ड के यूरिया पर अधिक जोर urea
जिले में पिछले कई वर्षों से किसान एक ही कम्पनी के ब्राण्ड के यूरिया को अच्छा मान रहे हैं। उसी कम्पनी के यूरिया अधिक मांग हो रही है। अन्य कम्पनियों का किसान उसी स्थिति में ले जाते हैं जब उनको उस कम्पनी का यूरिया नहीं मिले। जबकि कृषि अधिकारियों का कहना है कि सभी कम्पनियों के यूरिया में एक ही मानक है। सभी में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है।

छोटे व मोटे दाने में कोई फर्क नहीं urea
जिले के उप निदेशक कृषि ने भी कई बार बयान जारी कर किसानों को चेताया है कि सभी कम्पनियों के यूरिया में बराबर का नाइट्रोजन होता है। छोटे दाने में यूरिया से नाइट्रोजन पौधे को तुरंत एक साथ मिल जाता है। जबकि मोटे दाने से पौधे की आवश्यकतानुसार धीरे- धीरे नाइट्रोजन प्राप्त होती है। ऐसे में किसानों को भ्रम में नहीं आना चाहिए। मोटा यूरिया विदेशी उच्च तकनीकी से तैयार किया गया है। यदि किसान स्वयं चाहे तो एक खेत में छोटा तो एक में मोटा दाना देकर देख लें। urea


यह है यूरिया की स्थिति
1. कृषि विभाग ने मांग भेजी - 37 हजार मीट्रिक टन
2. कृषि आयुक्तालय ने लक्ष्य दिया - 31 हजार मीट्रिक टन
3. अक्टूबर व नवम्बर की मांग- 13 हजार मीट्रिक टन
4. अक्टूबर व नवम्बर में मिला - 12500 मीट्रिक टन
5. वर्तमान में स्टॉक - 7500 मीट्रिक टन
6. क्रय- विक्रय सहकारी समितियों का स्टॉक- 350 मीट्रिक टन

इनका कहना है...
रबी की फसलों में पहले पानी के समय हर वर्ष यूरिया की किल्लत आती ही है। सभी को अपनी फसलों में यूरिया देना होता है। कालाबाजारी पर लगातार कार्रवाईकी जा रही है।
- श्रीकांत अग्निहोत्री, उप निदेशक कृषि दौसा।

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