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इस नक्सली इलाके में 20 साल बाद पंचायत चुनाव के लिए बनेगा बूथ, ग्रामीण डालेंगे वोट, कहा बदलाव अच्छा है

Badal Dewangan

Publish: Jan 22, 2020 18:16 PM | Updated: Jan 22, 2020 18:16 PM

Dantewada

नवंबर में ग्रामीणों ने किया था कैंप खोलने का विरोध, ग्रामीणों ने दबी जुबान में कहा- बदलाव अच्छा लग रहा है। अब हमारे लोग मलेरिया-टायफाइड से नहीं मरेंगे

दंतेवाड़ा/नकुलनार-आकाश मिश्रा/ अनीश परिहार
दंतेवाड़ा जिले के पोटाली में पुलिस कैंप का पिछले साल नवंबर महीने में खूब विरोध हो रहा था। ग्रामीणों ने तीर-धनुष हाथों में लेकर प्रदर्शन किया था। दो महीने बाद पत्रिका की टीम गांव पहुंची तो यहां के हालात बदले हुए नजर आए। 20 साल में पहली बार गांव में ही दो बूथ पंचायत चुनाव के लिए स्थापित किए जा रहे हैं। माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार के कई जगहों पर नारे लिखे हैं लेकिन कुछ ग्रामीण वोट डालने का मन बनाए हुए मिले। यहां माओवादियों की दहशत ग्रामीणों के बीच अब भी कायम है लेकिन दबी जुबान में ग्रामीणों ने कहा कि कैंप खुलने के बाद हुए बदलाव अच्छे लग रहे हैं। अब हमारे लोग मलेरिया और टायफाइड से नहीं मर रहे हैं।

दरअसल कैंप खुलने के बाद पोटाली, बुरगुम में माओवादियों की आमद कम हुई है। गांव में राशन की दुकान भी खुल चुकी है। इलाज के लिए कैंप में डॉक्टर है जो हर वक्त ग्रामीणों का इलाज करने के लिए तैनात किया गया है। पहले गांव में मलेरिया और टायफाइड से ग्रामीणों की बड़ी संख्या में मौत होती थी लेकिन कैंप आने के बाद त्वरित जांच के साथ इलाज मिल रहा है। पहले गंभीर रूप से बीमार ग्रामीण को पालनार लेकर जाते थे लेकिन अभी हालात बदले हैं। ग्रामीण कहते हैं कि अगर स्थाई हेल्थ सेंटर खुल जाए तो और बेहतर होगा।

लोकसभा और विधानसभा में १० किमी पैदल चलकर गए वोट डालने
पोटाली में रहने वाले ग्रामीण पहले भी वोट डाल चुके हैं लेकिन वोट डालने के लिए उन्हें तब नजदीकी मतदान केंद्र अरनपुर जाना पड़ता था। गांव के वृद्ध (पहचान उजागर ना हो इसलिए नाम नहीं लिखा गया है) ने बताया कि उस वक्त भी माओवादियों से चुनाव बहिष्कार की धमकी मिलती थी लेकिन फोर्स वालों के कहने पर हम वोट डालने जाते थे। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि विधानसभा के उपचुनाव के दौरान जब वे लौट रहे थे तो उन्हें रास्ते में माओवादियों ने रोक लिया था और देख लेने की धमकी दी थी।

राशन दुकान में चना, नमक के साथ कंबल भी उपलब्ध
पोटाली में 20 साल के बाद राशन दुकान खुली है। कैंप शुरू होने के बाद यहां सबसे बड़ा काम यही किया गया। फोर्स की मौजूदगी में यहां दुकान तैयार की गई। इस दुकान में चना, नमक, चावल के साथ कंबल भी मिलता है। यहां पोटाली के अलावा बुरगुम के ग्रामीण भी राशन लेने के लिए आते हैं। राशन दुकान मुख्य सडक़ पर बनाई गई है। जिस सडक़ पर दुकान है उससे करीब १०० मीटर दूर ही बालक छात्रावास का वह भवन है जिसे माओवादियों ने २००४ में उड़ा दिया था।


ललिता मरकाम के नाम पर पोटाली के युवाओं ने बनाई सर्वसम्मति
पोटाली के सरपंच के रूप में ललिता मरकाम को निर्विरोध चुन लिया गया है। ललिता पत्रिका के सामने नहीं आईं। उनके पति ने हमें बताया कि गांव के पढ़े-लिखे युवाओं ने गांव को नया नेतृत्व देने के लिए ललिता के नाम पर आम सहमति बनाई। गांव के कई युवक दंतेवाड़ा और जगदलपुर में रहकर पढ़ाई कर चुके हैं और वे बदलाव चाहते हैं।

अरनपुर से पोटाली तक बन रही सडक़, सफर हो जाएगा आसान
अरनपुर से पोटाली के बीच सडक़ निर्माण का काम हो रहा है। पूरी सडक़ पर गिट्टी बिछा दी गई है, जिस पर डामर चढऩा बाकी है। डामर चढऩे के बाद अरनपुर से पोटाली पहुंचना आसान हो जाएगा। ५ मिनट में दूरी तय हो जाएगी। अभी आधे घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। कैंप तक गाडिय़ों के पहुंचने में भी दिक्कत होती है।

बदलाव लाने ही कैंप शुरू किया गया
पोटाली में बदलाव आए, ग्रामीणों तक सरकार की योजना पहुंचे, मतदान संभव हो इसलिए हमने कैंप खोलने की पहल की। अब इसका फायदा ग्रामीणों को ही हो रहा है। माओवादियों की हकीकत से ग्रामीण भी वाकिफ हो चुके हैं।
डॉ. अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा

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