स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

Patrika exclusive: नक्सली आदिवासियों से वसूल रहे लेवी धान और तेंदूपत्ता के बोनस, ग्रामीणों से रुपए लेकर बढ़ा रहे अपना फंड

Bhupesh Tripathi

Publish: Jan 20, 2020 16:47 PM | Updated: Jan 20, 2020 16:47 PM

Dantewada

सरपंच दंपति ने किया खुलासा - पिछले दो- तीन साल से नक्सली ग्रामीणों से नकद पैसों की वसूली करने लगे हैं। पहले वे अनाज व अन्य चीजें लिया करते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में नक्सलियों ने कैश में वसूली शुरू की है .

दंतेवाड़ा . अब तक आद्योगिक समूहों और ठेकेदारों से लेवी वसूलने वाले नक्सली अब आदिवासियों से भी वसूली करने लगे हैं। नक्सलियों ने अपने फंड में इजाफा करने के लिए आदिवासियों के सरकारी बोनस पर सेंध लगाना शुरू कर दिया है। यह खुलासा हिरोली ग्राम पंचायत की सरपंच बुदरी कुंजाम दंपति ने पत्रिका के सामने किया है।

दोनों पति पत्नी दो दिन पहले नक्सलियों के चंगुल से छूटकर दंतेवाड़ा एसपी के पास पहुंचे और जान खतरे में होने की बात कही। दोनों का कहना है कि नक्सली इन पर बैलाडीला के डिपॉजिट 13 को बेचने का आरोप लगा रहे थे और जन अदालत लगाकर उनकी हत्या करने वाले थे। बुदरी कुंजाम और उनके पति फिलहाल दंतेवाड़ा के कारली स्थित पुलिस लाइन के शांतिकुंज में रह रहे हैं। दोनों ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। उनमें सबसे अहम ग्रामीणों से लेवी वसूली किए जाने का था। सरपंच दंपति ने हमें बताया कि पिछले दो- तीन साल से नक्सली ग्रामीणों से नकद पैसों की वसूली करने लगे हैं। पहले वे अनाज व अन्य चीजें लिया करते थे लेकिन पिछले कुछ सालों में नक्सलियों ने कैश में वसूली शुरू की है।

उन्होंने बताया कि जब भी धान या तेंदूपत्ते का बोनस आता है तो नक्सली उसमें अपना हिस्सा मांगते हैं। घर के सदस्यों की संख्या के आधार पर हिस्सा तय होता है। अगर किसी घर में दो सदस्य हैं तो वहां से ज्यादा और जहां दो से अधिक हैं तो प्रति सदस्य नक्सलियों के हिस्सा बढ़ता जाता है। फरवरी-मार्च में माओवादी लेवी की वसूली करते हैं। ग्रामीणों को वसूली से पहले सूचना दे दी जाती है कि किस तिथि पर वसूली होगी, उस तारीख पर सभी रकम तैयार रखते हैं। ऐसा सिर्फ हिरोली पंचायत में नहीं हो रहा, बल्कि जहां उनकी पैठ है वहां यह आम है। वे आदिवासियों को मिलने वाले सरकारी पैसों पर इसी तरह सेंध लगा रहे हैं। बस्तर में नक्सली बोनस का फायदा उठाने की कोई कसर नहीं छोड रहे हैं।

गांव में 5 एकड़ जमीन और घर छोड़ आए, वापस जाना यानी मौत
हिरोली सरपंच बुधरी कुंजाम दंपति के दो बच्चे थे दोनों की मौत हो चुकी है। गांव में दोनों का मकान है। 5 एकड़ खेत भी है। धान की फसल कट चुकी है। सरपंच दंपति से जब हमने पूछा कि संगीनों के साए में कब तक रहेंगे तो दोनों ने कहा कि अब तो जीना यहीं मरना यहीं। हिरोली वापस गए तो मौत तय है। दोनों इतना डरे हुए हैं कि हिरोली का नाम सुनते ही सिहर उठते हैं। सरपंच बुधरी कहती हैं कि सर सब कुछ पीछे छूट गया इस बात का गम तो है लेकिन सुकून इस बात का है कि जान सलामत है। वापस अब कभी नहीं जा पाएंगे। यहीं कोई काम ढूंढेंगे। अभी तो बड़े साहब लोग बयान ले रहे हैं।

डिपॉजिट 13 का विरोध करने ग्रामीणों को माओवादियों ने दी यातना
स रपंच दंपति ने नक्सलियों की ओर से डिपॉजिट 13 को लेकर भी कई खुलासे पत्रिका के सामने किए। उन्होंने बताया कि 13 नंबर का जब विरोध शुरू हुआ उससे पहले ही नक्सली गांव में सक्रिय हो गए थे वे लगातार मीटिंग ले रहे थे। ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जा रहा था। कई ग्रमीणों को आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए मारा-पीटा भी गया। आंदोलन में शामिल होने के लिए बकायदा मुनादी करवाई गई।आंदोलन पर पूरे दिन नजर रखी। जिनकी तबियत खराब थी उन्हें भी भेजा गया। उनके कई समर्थक लोगों को जबरन बैठक में ले जाते थे।

खदान को लेकर नक्सली फिर बड़ा आंदोलन की बना रहे रणनीति
डि पॉजिट 13 को लेकर पिछली बार हुए आंदोलन से माओवादी खुश नहीं हैं। आंदोलन जिन शर्तों पर खत्म हुआ और जिन लोगों ने इसमें मध्यस्थता निभाई उससे वे नाखुश हैं। सरपंच दंपति ने यह खुलासा करते हुए बताया कि माओवादी एक बार फिर आंदोलन खड़ा करने की रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर ग्रामीणों को इसके लिए उकसाना शुरू कर दिया है।

फाॅर्स नहीं आती तो काट डालते नक्सली
हिरोली सरपंच बुदरी कुंजाम और उसके पति बताते हैं कि 16 जनवरी गुरुवार की शाम माओवादी उनके घर आए और साथ चलने को कहा। बुदरी की तबियत खराब थी इसलिए उसने जाने से इंकार कर दिया इसके बाद बुधरी के पति को साथ ले गए। शुक्रवार की रात सरपंच पति उनके कब्जे में रहा। माओवादी सरपंच पति को हिरोली के डोकापारा लेकर गए थे। बैलाडीला की पहाडिय़ों में इसे नक्सलियों का सुरक्षित इलाका माना जाता है। 17 जनवरी को बुधरी को भी बोडेपानी लाया गया। दोनों ने बताया कि यहाँ दोनों को जन अदालत लगाकर मारने की तैयारी हो रही थी। दोनों को अपनी मौत सामने दिख रही थी। इसके बाद वहां कुछ हलचल हुई और नक्सली भागने लगे। पता चला कि पुलिस पार्टी सर्चिंग पर निकली हुई है। उसे ही आड़ बनाकर सरपंच दंपति ने वहां से भागना तय किया और फोर्स की आड़ लेकर मुख्य मार्ग पर आ गए। इत्तेफाक से उस वक्त एक बस आ रही थी उसमें सवार होकर सीधे एसपी ऑफिस पहुंचे।

हालात बदले तो लेवी का पैटर्न बदला
पिछले एक साल से लेवी का पैटर्न नक्सलियों ने बदला है। पहले एक मोटी रकम उद्योग समहु और ठेकेदारों से आ जाया करती थी। नई सरकार आने के बाद इसमें रोक लगी। तेंदूपत्ता की सरकारी खरीदी होने लगी तो बाहरी ठेकेदार आने बंद हो गए। इसलिए नुकसान की भरपाई ग्रामीणों की कमाई से करना शुरू किया है।
अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा

[MORE_ADVERTISE1]