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अकाल की आशंका, मानसून की बेरूखी से बढ़ी किसानों की चिंता

Bhupesh Tripathi

Publish: Jul 26, 2019 17:20 PM | Updated: Jul 26, 2019 17:20 PM

Dantewada

Farmer's suicide: कब बरसोगे बादल ? असामान्य बारिश होने से फसलों की सिंचाई में आ रही बांधा

दंतेवाड़ा। वैसे तो देश के प्रत्येक व्यक्ति के मन में किसानो (Farmer in india) के लिए एक एक सरल और नम्र भाव होता है , परन्तु आज समाज के उन्ही सझदार लोगो के छोटे छोटे गलतियों के वजह से किसान खेती करने में असमर्थ हो गया है। वायु से लेकर जल और जमीन प्रदूषण (Pollution) ने मौसम (Mansoon) की दशा और दिशा बदल दी है। जिसका परिणाम एक दिन सभी को भोगना है।

सावन के महिने में बारिश के बेरूखी से किसानों की चिंता बड़ (farmer's suicide) गई है। जो किसान बारिश के भरोसे थे उनका बुराहाल है। इस वर्ष मनसून के शुरवाती दौर में कुछ दिन बारीश हुई। इसके बाद मौसम साफ़ होते दिख रहा है , दूबारा मानसून (Weather) दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा। जिले में अधिकांश खेती किसानों का काम भगवान भरोस ही होता है।

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किसान बारिश के इंताजर में आश लगाए बैठे है। इधर बारिश की ऐसी नाराजगी कि बादल बरसने की जगह और तेज धूप और गर्मी से लोगों को हलाकान कर रहा है । इधर मानसून पर अचानक ब्रेक लग जाने से जिले के बांध, तालाबों व जलाशयों का स्तर भी मानूसन के इंतजार में रसातल की ओर है। 15 दिनों से लोग मूसलाधार बारिश के लिए तरस रहे हैं ।

सुकमा जिले में खेत तैयार कर धान की रोपाई का किसान इंतजार कर रहे है एवं जो किसानों बीज छिड़कर बोआई कर लिये तैयार थे उनके खेतों में पानी सुख ( chhattisgarh in famine) चूका है और खेतों में दरारे आने शुरू हो चुकी है । यही हाल और हप्ता दस दिनों तक रहा तो फसल चैपट होने की कगार में पहुंच जाऐगी।

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मानसून ने किसानों की बढ़़ाई चिंता
मानसून की इस बेरुखी से आम लोगों के चेहरे तो मुरझाए ही हैं। अन्न उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें अब गहराने लगी हैं। अब किसानों को कर्ज लेकर खेती में लगे लागत को कैस निकालें इसकी चिंता सता रही है। किसान परेशान है कि इस बार बारीश नहीं हुई तो हमारा क्या होगा।

बोनी में पिछड़ गए है बारिश कम होने से किसान धान की फसल बोआई में पीछे हैं। अब तक जिले में करीब 40 फीसदी धान की बोआई की गई है। यह बोआई खुर्रा व छिंटा बोनी पद्धति से की गईं। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है वे रोपा पद्धति से धान बोआई करने की तैयारी कर रहे हैं।

15 दिन पहले ही लेट है मानसून
पहले ही 15 दिन मानसून लेट था इसलिए खेती किसानों का काम पहले ही पिछड़ गया था। अब बारिश की बैरूखी से अब किसानों मजधार में खडा कर दिया हैं। कई किसानों ने किसी तरह से बीज छिडकर बोआई कर दी। कई किसान धान की रोपाई डालकर छोड दिया है। अब आगे क्या होगों इसको लेकर किसान चिंतित है।

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फैक्ट फाइल
जिले में 20-21 जुलाई के ब्लॉकवार औसत वर्ष
सुकमा : 60.1 प्रतिशत
छिंदगढ़ : 93.1 प्रतिशत
कोंटा : 83.4 प्रतिशत
जिला का औसत वर्षा : 84.2

खेतों में पडऩे लगी है दरारे
पंद्रह दिन हो गये हैं, अच्छे से बारीश नहीं हुई है। इस बीच दो से तीन बार हलकी बारीश जरूर हुई। लेकिन उससे काम नहीं चल सकता है। लम्बे समय से बारीश नहीं होने ( chhattisgarh in famine) से खेतों से पानी सुखने लगा है खेतों में दरारे पढने लगी है। यही हाल हप्ता दस दिनों तक रहा तो किसानों के लिए ये बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

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