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जिस सड़क के लिए जवानों का खून बहा उसमें भी हो गया भ्रष्टाचार

Akash Mishra

Publish: Jan 23, 2020 12:54 PM | Updated: Jan 23, 2020 12:54 PM

Dantewada

ढाई हजार जवान जिस सड़क को 24 घंटे घेरे रहते हैं, जिसके निर्माण
के वक्त 110 आईईडी निकली, 5 जवान शहीद हुए, उसमें भी भ्रष्टाचार

आकाश मिश्रा/अनीश परिहार
दंतेवाड़ा/नकुलनार।
दंतेवाड़ा जिले में अरनपुर से लगे इलाके को माओवादी अपने कब्जे वाला इलाका बताते रहे हैं। यहां सुरक्षा बलों के सामने माओवादियों से निपटना हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। इस तरह की चुनौती के बीच १० साल पहले अरनपुर से जगरगुंडा तक की सड़क का निर्माण शुरू किया गया। आमतौर पर किसी सड़क को बनाने के लिए पहले उसका बेस तैयार किया जाता है लेकिन यहां की सड़क के निर्माण में पहले पुरानी सड़क पूरी तरह से खोदी गई ताकि माओवादियों द्वारा लगाई गई आईईडी खोजी जा सके। दो साल तो इसी काम में लग गए। तीन-तीन किमी के पैच में काम चलता रहा। ११२ आईईडी बरामद हुईं। इस दौरान ५ जवान आईईडी विस्फोट की चपेट में आने की वजह से शहीद हुए। एंबुश में कई जवान फंसे भी। फिलहाल अरनपुर सेे जोड़ा नाला तक की सड़क का काम पूरा हो चुका है। जहां तक काम पूरा हुआ है वहां तक कई जगहों पर सड़क पूरी तरह से धंस चुकी है। जबकि इस सड़क पर आम लोगों की आवाजाही नहीं होती। ऐसे में इस सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। अरनपुर गांव में पत्रिका टीम को कुछ लोग मिले जिनका कहना था कि हमारे यहां पंचायत प्रतिनिधियों की कोई सुनता नहीं इसलिए इस तरह का भ्रष्टाचार होना आम है। सरपंच निर्विरोध चुन लिया जाता है। अन्य प्रतिनिधि भी गांव तक ही सीमति रहते हैं। बाहर क्या हो रहा है। इससे किसी को काई मतलब नहीं है। अंदर वाले भी (माओवादी) जैसा चल रहा है चलने दो कहते हैं। अरनपुर जैसी दंतेवाड़ा जिले में कई पंचायतें हैं जहां त्रि स्तरीय पंचायत व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है।

बड़ा सवाल- जब सड़क से कोई गुजरता ही नहीं तो लाखों के स्वागत द्वार की क्या जरूरत
अरनपुर-जगरगुंडा मार्ग में सिर्फ सड़क निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार नहीं दिखा बल्कि स्वागत द्वार के नाम पर भी लाखों के वारे-न्यारे की तस्वीर दिखाई दी। दरअसल सड़क जोड़ा नाला के बाद बंद है। सड़क के आगे जाना यानी मौत को न्योता देना क्योंकि उस ओर माओवादियों की कई प्रेशर आईईडी प्लांट की हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अरनपुर-जगरगुंडा की अधुरी सड़क पर लाखों रुपए की लागत का स्वागत द्वार लगाने की क्या जरूरत थी।

माओवादी आईईडी ना लगा सके इसलिए बनाई डबल लेयर सड़क
अरनपुर से जगरगुंडा तक की सड़क के प्रोजेक्ट में डबल लेयर रोड का निर्माण किया गया है। देश में ग्रामीण इलाके की कम ही सड़के हैं जहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। डबल लेयर रोड बनने से माओवादियों के लिए आईईडी प्लांट करना आसान नहीं होता है लेकिन घटिया सड़क निर्माण की वजह से अब सड़क उखडऩे लगी है और माओवादियों के लिए फिर मौके बनने लगे हैं।

पत्रिका लाइव...
13 किमी में फोर्स के तीन पोस्ट, हर पोस्ट पर जांच और होती है पूछताछ
अरनपुर से जगरगुंडा तक की सड़क का निर्माण कार्य १० साल से चल रहा है। १३ किमी का काम पूरा हो चुका है। १३ किमी के दायरे में ३ सीआरपीएफ हैं। पत्रिका की टीम तीनों पोस्ट से होते हुए गुजरी। सबसे पहले अरनपुर पोस्ट उसके बाद कमल पोस्ट और फिर नाला पोस्ट तक हम गए। हर पोस्ट पर हमें रोका गया और हमसे इलाके में आने की वजह पूछी गई। आईईडी देखी गई और आगे बढऩे की अनुमति दी गई। अनुमति भी तब ही मिली जब अगले पोस्ट से वायरलेस से क्लियरेंस दी गई। १३ किमी के रास्ते में हमें हमारी गाड़ी के अलावा दूसरी गाड़ी नहीं मिली। इस पूरी प्रक्रिया से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह इलाका कितना संवेदनशील है और इसी का फायदा भ्रष्टाचार करने वाले उठा रहे हैं।

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