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चाढ़े चार करोड़ रुपए का प्लास्टर मरीजों पर गिरा, पहले से पीडि़त मरीजों की और बढ़ गई पीढ़ा

Laxmi Kant Tiwari

Publish: Aug 18, 2019 12:20 PM | Updated: Aug 18, 2019 12:20 PM

Damoh

जिला अस्पताल का मामला

दमोह. जिला अस्पताल के बर्नवार्ड में शनिवार सुबह ७ बजे अचानक वार्ड की छत का प्लास्टर मरीजों के पलंग पर जा गिरा। जिसमें दो मरीजों सहित एक परिजन भी घायल हो गया। घायलों को तुरंत ही वार्ड से बाहर निकालकर उनकी मलहम-पट्टी करते हुए इलाज शुरू किया। पत्रिका ने १० अगस्त को ही जिला अस्पताल प्रबंधन को सचेत किया था। जिसमें 'जिला अस्पताल मे आइसीयू की छत से टपक रहा पानी, गिर रहे प्लास्टर के टुकड़ेÓ शीर्षक से खबर का प्रकाशन कर अस्पताल प्रबंधन को सचेत किया था। जिसमें सिविल सर्जन ने पीआइयू विभाग को सूचना देकर जल्द ही सुधार कार्य कराने की बात कही थी। लेकिन १० अगस्त को खबर प्रकाशित होने के ८ दिन बाद तक किसी ने सुध नहीं ली। और आखिरकार प्लास्टर गिरने से तीन लोग घायल हो गए।
ऐसे हुई प्लास्टर गिरने की घटना -
जिला अस्पताल में छह दिन पूर्व भर्ती हुए गनेश पिता हरप्रसाद अहिरवार (२६) निवासी हिरदेपुर पिछले छह दिनों से इलाजरत थे। बर्नवार्ड में उनका इलाज चल रहा था। इसी तरह से बर्नवार्ड में ही करंट में घायल होने के बाद गुरुवार से ही सोमनाथ पिता झुन्नी लाल अठया (४०) भी भर्ती थे। जिनकी देखरेख के लिए मरीज के चाचा भरत लाल पिता दुर्जन अठया पलंग के नीचे पड़ी खाली जगह पर सो रहे थे। उसी बर्नवार्ड में एक महिला भी इलाजरत थी। इसी बीच अचानक सुबह ७ बजे करीब २ इंच से भी मोटी छत के प्लास्टर की परत वार्ड में गिरी। तो पलंग पर सो रहे दोनों मरीज व उनका एक परिजन मलवा गिरने से घायल हो गया। जिसमें एक मरीज का सिर फूट गया। दूसरे के सीने पर प्लास्टर गिरा। मरीज का परिजन भी मलवे में दबने से घायल हो गया।
डॉक्टर ने घायलों को निकाला बाहर-
घटना की जानकारी लगते ही इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. संदीप पलंदी तुरंत ही बर्नवार्ड पहुंचे। जिन्होंने मौके पर बार्डवाय सहित अन्य कर्मचारियों व सुरक्षागार्ड को बुलाया। जिसके बाद मलवा हटवाते हुए मरीजों को तुरंत वार्ड से बाहर किया। जिनका इलाज ओपीडी में चालू कराया गया।
यहां डॉक्टर के कमरे में जाते समय मरीज की कर दी सुरक्षा गार्ड ने पिटाई -
घटना के बाद जब स्टेचर पर बिठाकर मरीज को बाहर तक ले जाया गया। बाद में वह स्टेचर से उतरकर डॉक्टर के कमरे में जाने लगा तो उसे सुरक्षागार्ड ने रोका और उससे पूछताछ करने लगा। लेकिन मरीज मलवे के गिरने से पीडि़त होने पर दर्द को सहन नहीं कर पा रहा था इसलिए वह इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर के कमरे में घुसने का प्रयास करने लगा। तो वहां सुरक्षागार्ड ने उसे रोकने का प्रयास किया। नहीं मानने पर दूसरे सुरक्षागार्ड ने उसके साथ मारपीट कर दी। जोरदार झापड़ रसीद कर दिया, लेकिन जैसे ही डॉक्टर को पता लगा तो उन्होंने जमकर फटकार लगाते हुए उसे तुरंत ड्यूटी से हटाते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमोरी को दी।

सचेत हो जाते तो बच जाता हादसा -
पत्रिका द्वारा प्रकाशित खबर में १० अगस्त को ही जिला अस्पताल प्रबंधन को सचेत करते हुए खबर का प्रकाशन किया था। लेकिन इसे सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने पीआइयू से बात करना तो बताया पर मरीजों की जान से होने वाली खिलवाड़ पर गंभीरता नहीं दिखाई। अगर पीआइयू ने उनकी बात नहीं मानी थी तो उन्हें कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों से बात करना चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
इन्होंने रखा अपना पक्ष -
सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमोरी का कहना है कि करीब सौ साल पहले के बने भवनों की रिपेयरिंग कराने के बाद उनमें बर्नवार्ड की व्यवस्था पूर्व सीएस के समय की गई थी। तब से वहां मरीजों को भर्ती कराने का सिलसिला चल रहा था। सीलिंग को देखने से ऐसा नहीं लग रहा था कि प्लास्टर गिर सकता है। आइसीयू वार्ड मे जरूर प्लास्टर गिरने के बाद उसे सुधारने के लिए लोनिवि वालों से बोला था। लेकिन लगातार बारिश होने से सीलिंग में नमी होने के कारण सुधार कार्य नहीं कराया जा सकेगा। सीएस तिमोरी ने बताया कि डामर डलवाने के साथ वाटरपू्रफ करवाने के लिए पीआइयू तथा लोनिवि को अवगत कराया था। पुरानी बिल्डिंग में भी भी पानी का रिसाव हो रहा है। जिससे कई वार्डों में परेशानी हो रही है। पानी टपकने की समस्या अस्पताल के साथ उनके बंगले में भी बनी हुई है।
कलेक्टर ने लोनिवि अधिकारी को मौके पर भेजा -
सीएस तिमोरी ने घटना की जानकारी से कलेक्टर तरुण राठी को अवगत कराया। जिसके बाद कलेक्टर ने तुरंत ही लोनिवि अधिकारियों से बात कर उन्हें जिला अस्पताल जाकर निरीक्षण कर समस्या का समाधान करने की बात कही। निरीक्षण करने के बाद मौसम साफ होने पर सोमवार से ही काम लगाने का आश्वासन लोनिवि अधिकारियों ने दिया है। सीएस ने बताया कि लोनिवि से बात होने पर उन्होंने सोमवार से सीलिंग का काम लगाने का आश्वासन दिया है।

वार्ड करया खाली, दूसरे वार्ड में शिफ्ट किए मरीज -
घटना के बाद सिविल बर्नवार्ड से तुरंत ही इलाजरत तीनों मरीजों को वहां से हटवाया गया। जिन्हें डायलेसिस वार्ड के बाजू में खाली पड़े रूम में शिफ्ट कराया। जहां पर मरीजों का इलाज जारी है।
टीनशेड लगाने दिया था प्रस्ताव-
सीएस डॉ. ममता तिमोरी ने बताया है कि पिछले साल भर से जिला अस्पताल की छत के ऊपर टीन शेड बनाने के लिए एक प्रस्ताव व स्टीमेट बनाकर भेजा था। लेकिन उसे अभी तक स्वीकृति व राशि नहीं मिलने से काम चालू नहीं कराया जा सका। पुराना भवन होने से सीलिंग से पानी टपकने की समस्या का समाधान भी हो जाता। तो आज यह समस्या सामने नहीं आती। लेकिन मुख्यालय से स्वीकृति नहीं मिलने पर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि डिपार्टमेंटल इंजीनियर को सब कुछ बताया गया है। लेकिन उन्होंने अलग से जिला अस्पताल के कोई बजट नहीं होने की बात कही थी।
वर्ष १२/१३ में हुआ था साढ़े चार करोड़ का जीर्णाद्धार -
आरएमओ डॉ. दिवाकर पटैल ने बताया कि वर्ष २०१२/२०१३ में साढ़े चार करोड़ रुपए की राशि से पुरानी पूरी बिल्डिंग का जीर्णाद्धार किया गया था। जिसमें ठेकेदार ने दीवारों पर प्लास्टर कर टाइल्स लगाए थे। सीलिंग में भी केवल प्लास्टर करके पुटी कर दी थी। जबकि सीलिंग का व्यवस्थित काम होना था। मामले में तत्कालीन कलेक्टर डॉ. विजय कुमार को सारी जानकारी भी दी थी। लेकिन उनका स्थानांतरण होने के बाद फिर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि बर्नवार्ड में प्लास्टर गिरने के बाद एसडीओ पटैल सहित दो इंजीनियर भी मौके पर आए थे। जिन्होंने निरीक्षण करने के बाद जल्द ही व्यवस्था कराए जाने की बात कही है।